चुनाव 2019 – भाजपा की वृद्धि और विकास बनाम काँग्रेस की कर्ज़ माफ़ी

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भाजपा ने चुनावों  में 3 प्रमुख राज्यों को गवाँ दिया है और काँग्रेस ने अचानक-से थोड़ी नई गति हासिल की है। आइए देखते हैं कि लोकसभा चुनाव के अगले दौर से पहले महत्वपूर्ण चुनौतियों से किस तरह से रूबरू होने की आवश्यकता है।

क्या अगला चुनाव देश की आर्थिक सफलताओं को लेकर होगा? क्या वह जीएसटी को लेकर होगा? क्या वह विमुद्रीकरण को लेकर होगा या वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की अविश्वसनीय सफलता पर होगा, जिस पर बहुत बड़ी संख्या में भारतीयों को गर्व है?

जहाँ तक आर्थिक सफलता का सवाल है विपक्षी दल और ख़ासकर राहुल गाँधी जानते हैं कि उनके पास प्रधानमंत्री और भाजपा से प्रतिस्पर्धा करने का कोई मार्ग नहीं है और न ही वे पिछले 4 वर्षों की तमाम उपलब्धियों पर सवाल उठा सकते हैं।

इसलिए, एकमात्र बात जो वे कर सकते हैं, वह है कि किसी भी तरह से पूरी कहानी ही बदल दी जाएँ और यह कहानी कैसे बदली जाएगी? गुजरात दंगों के पिछले सभी आरोपों से काम नहीं बना। श्री मोदी का नाम बदनाम करने और उन पर लाँछन लगाने से भी मतदाताओं का मानस बदलता नहीं दिखा है। प्रधानमंत्री के ख़िलाफ व्यक्तिगत आरोप और वक्रोक्तियाँ भी काम न आ पाईं।

वे चाहते थे कि किसी भी तरह से भ्रष्टाचार के आरोप उन पर लग जाएँ। राफेल सौदे से काँग्रेस को बड़ी उम्मीदें थीं, हालाँकि विपक्षी नेताओं ने इस पर ‘मिले सुर मेरा-तुम्हारा’ नहीं कहा था और वैसे भी देश के उच्चतम न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया है। राहुल गाँधी और उनके करीबी माने जाते लोग इस सरकार के किसी भी कैबिनेट मंत्री के खिलाफ़ भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं खोज पाए हैं,

इसलिए, उन्होंने उसी बात का सहारा लिया है जिसे काँग्रेस ने हमेशा बख़ूबी किया है।

कृषि ऋण माफ़ कर देना और उसके लिए राज्य के राजकोष का प्रयोग करना।

कृषि ऋण माफ़ कर देना बहुत अच्छी किस्सागोई है और यह बड़ा एजेंडा बनने जा रहा है जिसका अगले कुछ महीनों में राहुल गाँधी जोर-शोर से प्रचार करने वाले हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों ने पहला निर्णय यह लिया कि ऋण माफ़ करने की घोषणा की जाए। यह दीगर बात है कि कर्नाटक राज्य में 44,000 करोड़ रुपए के ऋण माफ़ किए गए लेकिन केवल 800 किसानों को उसका फायदा हुआ जबकि 2.50 लाख रुपए वाले बड़ी संख्या में गरीब किसान श्री गाँधी की योजनाओं से अमीर किसानों को मिलने वाले बड़े पैमाने के फायदे के बाद अपनी बारी आने का धैर्यपूर्वक इंतजार कर रहे हैं। इन अन्य 3 राज्यों की कहानी भी कुछ अलग नहीं होगी और अमीर किसान सारा पैसा उड़ा लेंगे।

श्री गाँधी समझ नहीं सकते हैं, न ही वे इस बात की परवाह करते हैं कि कर्ज़ माफ़ी के बाद उन राज्यों की आर्थिक स्थिति वे किस तरह सुधार पाएँगे। वे जानते हैं कि जब काँग्रेस शासित इन राज्यों में भारी ऋण छूट की वजह से वित्तीय संकट गहराएगा, तो वे केजरीवाल वाले तरीके से उसका दोष प्रधानमंत्री के सिर मढ़ देंगे।

वे बड़े शहीदाना तरीके से यह कहने तक में नहीं सकुचाएँगे कि मैं तो किसानों की मदद करना चाहता था, लेकिन केंद्र सरकार को ही परवाह नहीं है। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि ऋण माफ़ी बार-बार करते रहना होगी और हर थोड़े वर्षों में इन ऋणों को माफ करते रहना पड़ेगा। ऋण माफ़ी की उनकी घोषणा के बाद, साधन-संपन्न किसानों ने भी बैंकों का ऋण चुकाना बंद कर दिया है। इस ऋण छूट की बात करें तो इसका अनुमान लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपए या लगभग 25 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर लगाया जा है! मुझे हैरानी नहीं होगी यदि वे किसी निश्चित सीमा से नीचे सभी आवास ऋण और वाहन ऋण भी माफ़ कर दें! आखिरकार जो परिवार ऋण लेते हैं उनसे उन्हें जो परेशानी होती है,वह भी इससे कुछ अलग नहीं है।

देश की सबसे शक्तिशाली शीर्ष नौकरी के दरवाजे तक पहुँचने के लिए श्री गांधी इतने बेताब हैं कि वे कुछ भी कर देने पर आमदा हैं। उनके आस-पास के सभी वरिष्ठ नेता इस समस्या को समझते हैं, लेकिन गाँधी घराने के युवा की अपरिपक्व महत्वाकांक्षा के सामने झुक गए हैं।

श्री गांधी अधिक नौकरियाँ ईज़ाद करने की किसी भी योजना के बारे में बात नहीं करेंगे क्योंकि उन्हें पता ही नहीं है कि उनकी पार्टी सत्ता में आने के बाद नौकरियाँ कैसे दिलाएगी? अमेठी और रायबरेली की सारी परिस्थितियाँ और विकास की दयनीय स्थिति सभी देख चुके हैं। वे यह भी जानते हैं कि नई नौकरियाँ एक झटके में खड़ी नहीं हो सकती है।

राहुल गांधी की रणनीति काफ़ी सरल है। यदि वे जीत जाते हैं, तो उनके पास इन ऋण छूटों से होने वाले नुकसान की भरपाई करने उसे ठीक करने की कोशिश के लिए 5 साल हैं। यदि वे हार जाते हैं, तो समस्या का हल विजेता द्वारा किया जाएगा! राहुल गाँधी किसी भी कीमत पर चुनाव में जीत हासिल करना चाहते हैं भले ही उसके लिए बड़े परिश्रम से अर्जित देश के भंडार को ही क्यों न दाँव पर लगाना पड़ जाए।

राहुल गाँधी के लिए जीत के मायने यदि वे अपने महागठबंधन को समझाने में सक्षम हो जाते हैं तो केवल देश की शीर्ष नौकरी को पाने की संभावना भर नहीं है बल्कि अपने और अपने परिवार की आत्मरक्षा का एकमात्र अवसर भी है, जो लंबे समय से भ्रष्टाचार से जुड़े हर तरह के विवादों में फँसा हुआ है।

लोगों की याददाश्त बहुत कम होती है और अगर भाजपा के नेता अतीत की बात करना छोड़ दें तो चार राज्यों (कर्नाटक सहित) में इस साल हुई भाजपा की हार लोकसभा चुनावों में बहुत आसानी से जीत में बदल सकती है, उन्हें आगे देखना होगा और कर्जमाफी होते हुए भी विकास की बातें करना होंगी।

भाजपा को भी पूरी तरह से पता होना चाहिए कि लोकसभा चुनावों में श्री मोदी की वापसी थोड़ी कठिन है,सो उन्हें विकास और लंबे दौर तक प्रभावी स्थायी वृद्धि के एजेंडे को जारी रखना चाहिए।

  1. भाजपा को राहुल गाँधी की पहल को हथिया लेने की आवश्यकता है और यदि ज़रूरी हो, तो ऋण माफी की भी घोषणा कर देना चाहिए। यदि मतदाताओं को लुभाने का यही एकमात्र तरीका है, तो ऐसा भी किया जा सकता है। राहुल गाँधी कर्जमाफी का पूरा श्रेय लेने की हर संभव कोशिश करेंगे और बहुत मजबूती से उसका जवाब देने की ज़रूरत है।
  2. मध्यम वर्ग के लिए आने वाले बजट में आयकर में छूट को लागू किया जाना चाहिए।
  3. एमएसएमई क्षेत्र के लिए ऋण की आसान शर्तों की आवश्यकता है और इसे देर-सबेर जल्द से जल्द उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
  4. कॉरपोरेट क्षेत्र को अपनी ओर आकर्षित करने की जरूरत है और इसके लिए कॉरपोरेट करों में कमी से मदद मिलेगी। जीएसटी को स्वीकार कर लिया गया है और कॉर्पोरेट क्षेत्र में यह अच्छे परिणाम दे रहा है।
  5. भाजपा के वरिष्ठ मंत्रियों का खुलकर सामने आना और अपनी उपलब्धियों के बारे में बात करते हुए देखना अच्छा लग रहा है। पहले 4 वर्षों तक सरकार और अंग्रेजी भाषी प्रेस के एक बहुत बड़े वर्ग के बीच लगभग कोई संवाद नहीं था। अब यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि प्रेस से जुड़े सभी सदस्य अपनी व्यक्तिगत निष्ठा, पसंद-नापसंद के बावजूद भाजपा द्वारा लुभाये जाएँ।
  6. भाजपा के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि वह शिवसेना की तरह अन्य प्रमुख गठबंधन सहयोगियों को अपने साथ वापस ला सकें। उन्हें इसे लेकर भी आशवस्त होना होगा कि अकाली दल, श्री पासवान और श्री नीतीश कुमार का समर्थन उन्हें मिलता रखना चाहिए। तमिलनाडु में राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं और इसलिए भाजपा को रजनीकांत के साथ गठबंधन करने की आवश्यकता है क्योंकि दूसरे सुपरस्टार कमल हासन काँग्रेस में चले गए हैं। आंध्र प्रदेश में केसीआर का दबदबा है और यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि भाजपा इस राज्य के चुनाव से पूर्व गठबंधन में शामिल हो जाए।
  7. अंत में, सभी संबद्ध संगठनों को चुनाव जीतने की आवश्यकता को समझना होगा और इसलिए किसी भी तरह के पथांतरित मुद्दों फिर भले ही वह अति सतर्कता से जुड़ा हो, बचना होगा। इन नेताओं को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वे किसी भी तरह का विवादास्पद वक्तव्य न दें और श्री मोदी के नेतृत्व में हुए सभी अतुलनीय विकासकार्यों के बारे में बात करने के एकल बिंदु एजेंडे पर ध्यान केंद्रित करें। अनावश्यक बयानबाजी बंद की जानी चाहिए।

बीजेपी के प्रबुद्ध मंडल (थिंक टैंक्स) को याद रखना होगा कि जैसे-जैसे हम चुनावों के करीब पहुँच रहे हैं धारणाएँ बहुत ज़्यादा महत्वपूर्ण होती चली जाती हैं।

ये उपाय भाजपा सरकार की सोच के खिलाफ हो सकते हैं, लेकिन जीतने के लिए ये जरूरी हैं और इसके लिए कठिन निर्णय लेने की जरूरत है।

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लेखक कार्यकारी कोच और एंजेल निवेशक हैं। राजनीतिक समीक्षक के साथ वे गार्डियन फार्मेसीज के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। वे 6 बेस्ट सेलर पुस्तकों – द ब्रांड कॉल्ड यू- The Brand Called You रीबूट- Reboot. रीइंवेन्ट Reinvent. रीवाईर Rewire: 21वीं सदी में सेवानिवृत्ति का प्रबंधन, Managing Retirement in the 21st Century; द कॉर्नर ऑफ़िस, The Corner Office; एन आई फ़ार एन आई An Eye for an Eye; द बक स्टॉप्स हीयर- The Buck Stops Here – लर्निंग ऑफ़ अ # स्टार्टअप आंतरप्रेनर और Learnings of a #Startup Entrepreneur and द बक स्टॉप्स हीयर- माय जर्नी फ़्राम अ मैनेजर टू ऐन आंतरप्रेनर, The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. के लेखक हैं।

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Elections 2019 – BJP’s Development and Growth versus Congress’ Loan Waivers

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The BJP has lost 3 key state elections and the Congress has suddenly gained some new momentum. Let us look at what are the key challenges that need to be addressed before the next round of Lok Sabha elections.

Is it going to be the economic successes of the country? Is it going to be GST? Will it be demonetisation or will it be the incredible success India has had internationally, thus making a very large number of Indians proud? Will it be about the infrastructure development all across the country?

The opposition parties and more particularly Rahul Gandhi know that they have no way to compete with the Prime Minister and the BJP as far as economic success is concerned nor can they question all the achievements in the last 4 years.

Therefore, the only thing they can do is to change the narrative completely and what is this narrative going to be? All the previous allegations of the Gujarat riots have not worked. The name calling and abusing Mr Modi is not getting the voters to change their mind. Personal allegations and innuendos against the prime minister are not working.

They need to somehow, make some corruption charges stick. The Rafale deal which seemed promising to the Congress, though the opposition leaders did not echo the same, has been dismissed by the supreme court of the country. Rahul Gandhi and his bunch of merry men cannot find a single corruption charge against any cabinet minister of this Government,

So, they have resorted to what the Congress has always done well.

Use the state exchequer to write off farm loans.

Waiving farm loans makes a very good story and this is going to be a major agenda that Rahul Gandhi is going to shout out loud for the next few months. The first decision the Chief Ministers of Madhya Pradesh, Rajasthan and Chhattisgarh have done is to announce loan write offs. It is another thing that in the state of Karnataka Rs 44,000 crores has been written off and only 800 farmers have benefited while the large majority of Rs 2.50 lakhs poor farmers are waiting patiently for their turn after the wealthy farmers have benefited from the largesse of Mr Gandhi’s plans. The story in the other 3 states will not be aby different and wealthy farmers will take away all the money.

Mr Gandhi does not understand, nor does he care about what loan waivers will do to the economy of the states they are managing. He knows that when these Congress run States with huge loan waivers run in to financial distress all that he will do, in a Kejriwalesque manner, is to blame the Prime Minister.

He will not hesitate to martyr himself and say that he wanted to help the farmers, but the central government does not care. What he does not seem to understand is that loan waivers are repetitive and every few years loans will need to be waived. Since his announcement to waive loans, even the good farmers have stopped repaying banks. The size of the loan waiver is estimated at Rs 1.64 lakh crores or almost USD 25 billion! I wonder if he will waive all housing loans and vehicle loans below a certain limit! After all there is no difference in the distress loans cause to the families who take them.

Mr Gandhi is so desperate that he will do anything to get a foot in the door into the very powerful top job on the country. All the senior leaders who surround him understand the problem but have bowed down in front of the raw ambition of the young Gandhi scion.

Mr Gandhi will not talk about any scheme to develop more jobs because he has no idea how to do that once his party is in power. After all the situation of Amethi and Rae Bareli and the pathetic state of development is there for everyone to see. He also knows that there are no quick fixes to create new jobs.

Rahul Gandhi’s strategy is simple. If he wins, he has 5 years to try and correct the damage caused by these loan waivers. If he loses, the problem has to be sorted out by the winner! Rahul Gandhi is waiting to throw away all the hard-earned reserves of the country to get elected at any cost.

For Rahul Gandhi victory does not only mean a possibility of the top job if he is able to convince his mahagathbandhan but also the only opportunity for self-preservation for him and his family who are mired in all kinds of corruption controversies.

Public memory is very short and the four states (including Karnataka) that the BJP has lost this year can very easily swing back to them in the Lok Sabha elections if the BJP leaders stop talking about the past, look forward and talk about development coupled with loan waivers.

So, what should the BJP do in the run up to the Lok Sabha elections knowing fully well that it is critical for Mr Modi to be voted back to power to continue the agenda of development and long-term sustainable growth?

  1. BJP needs to wrest the initiative back from Rahul Gandhi and if necessary, announce loan waivers as well. If this is the only way the electorate can be wooed, so be it. Rahul Gandhi will desperately attempt to take credit for all loan waivers and this needs to be countered very strongly.
  2. For the middle class, a reduction in income tax must be implemented in the coming budget.
  3. The MSME sector needs easier credit terms and this must be made available sooner than later.
  4. The corporate sector needs to be wooed and a reduction in corporate taxes will help. GST has been accepted and is delivering good results for the corporate sector.
  5. It is good to see senior BJP ministers coming out and talking about their achievements. For the first 4 years there was almost no communication between the government and a very large section of the English-speaking press. It is important to make sure that all members of the press, irrespective of their loyalties are wooed by the BJP.
  6. It is also critical for the BJP to bring back the key alliance partners like the Shiv Sena. They need to ensure the Akali Dal, Mr Paswan and Mr Nitish Kumar continue to support them. The political equations are changing in Tamilnadu and therefore the BJP needs to seal a quick alliance with Rajnikanth since the other superstar, Kamal Haasan seems to have gone with the Congress. Andhra Pradesh has gone with KCR and it is important to ensure that the BJP gets into a pre-poll alliance in this state.
  7. Finally, all the affiliated organisations must understand the need to win the elections and therefore stop any diversionary issues including vigilantism of any kind. These leaders must also make sure that they do not speak of anything controversial and focus on a single point agenda of talking about all the incredible development that has been done under the leadership of Mr Modi. The unnecessary rhetoric must stop.

BJP think tanks must remember that perceptions are far more important as we get closer to elections.

These measures may go against the thinking of the BJP Government, but it is necessary to win and difficult decisions need to be taken.

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The author is an Executive Coach and an Angel Investor. A keen political observer, he is also the founder Chairman of Guardian Pharmacies. He is the author of 6 best-selling books, The Brand Called You; Reboot. Reinvent. Rewire: Managing Retirement in the 21st Century; The Corner Office; An Eye for an Eye; The Buck Stops Here – Learnings of a #Startup Entrepreneur and The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. 

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New Year Resolutions for Retirees!

2. Reboot. Reinvent. Rewire Managing Retirement in the Twenty First Century

The New Year is around the corner and it is time for thinking of those resolutions again! Whether you resolve to be fitter and healthier, connect more socially or to tick off some points on your bucket list, this is a time to take stock of the year gone by and to think of the year ahead.

Given below are some thoughts and you could consider adding some or all to your list of New Year resolutions.

Eat better for your Health

Take your health into your hands. Change your eating pattern. Take baby steps toward eating right. After all, if you have been careless with your food habits, you cannot change these overnight.

Less fats, more fibre with a healthier mix of fruits, vegetables and nuts is always advisable for most people. As seniors, it becomes even more important and relevant for us to regulate our diet. Eat smaller meals more often. Most experts recommend eating 5 times a day but with reduced quantities. As some wise people say, “stop eating just before you are full!” Others say that at least half of your plate should be fruits and vegetable.

Add a mix of vitamins and supplements to your diet to balance what you are not receiving through your normal diet.

Remember that eating better is the only answer to reducing your weight.

Find a New, Healthy Activity

As we get older, whether we have been active earlier or not, now it is much more important to be active. Build exercise or yoga into your daily routine. A round of tennis or golf, a brisk walk for at least 30 minutes every day (150 minutes per week of walking is the minimum recommended), yogic breathing exercises, swimming or cycling would be great to get into your daily schedule.

I have met several seniors who have started running and competing with people of their own age. In the process of staying fit, they have also found a whole new community of like-minded and passionate friends. It is best to experiment and find the right activity for your personality and activity level.

Complete some points in your Bucket List

Give yourself a break. You have earned this. Over the years, all of us have been adding to our bucket list. This list has kept getting longer since we were not able to find the time during our work life.

Resolve to tick off at least two significant items on your bucket list in the coming year.

Connect More with Friends and Family

Re-establish old connections that you lost while you were busy at work. Don’t wait for someone else to take the first step. Once start to reach out to your family and friends, you will be surprised at how much warmth you will receive. It is interesting to see how many people are rediscovering their old school and college friends using Facebook and LinkedIn.

Weekly lunches or coffee mornings with a group of friends, WhatsApp or Skype calls with your family members spread across the World are great ways of re-connecting. Time spent talking and laughing with those that mean the most is time well spent.

Reduce your belongings

Resolve to clean out your closets and your home. Think of the difference between “want” and “need” before you start this exercise. Keep things you need and give away those you want. This may sound philosophical but try and give away whatever you have not used for the past one year. Your challenge will always be “what if” you suddenly need the item again. If you decide to give it away, keep this as an active resolution till the next year and then assess whether you felt the need for the item(s) you gave away. Chances are that you will never miss these items.

In addition, this will start a process of de-cluttering your belongings and clearing up your home over a period of time.

Brush Up on New Technology

Technology, as you are well aware, is changing our World. If you have not already understood the many forms of communication and connection through Facebook, Twitter, LinkedIn, Instagram, YouTube and so many others it is time to do so now. Get familiar with the operating systems of your phones and other devices. Learn and understand these platforms since more and more of our lives will revolve around applications being developed on such platforms and around such communication medium.

To brush-up your own knowledge and skills, there are on-line tutorials for every possible question that you may have. You can also request a younger person at home or in your neighbourhood to tutor you.

Tell Your Story

You have had a wonderful and fulfilling life and now is the time to tell your story. Write your blog and publish it on a daily or weekly basis. Think of all the anecdotes in your life and write about these. Think of the milestones in your career and the time you spent as a child and record these. Think of your parents and your extended family and store these memories carefully in writing.

If you are not comfortable with writing out your blogs, dictate these into your mobile phone. Most phones now have the feature of “voice to text” which should quickly convert your voice recording. If this too does not work, send the recording to anyone who will transcribe it for a very small fee. A dictated blog will also preserve your voice for posterity.

Not only will this record your own memories and thoughts, this could also become a record of your family history for the future generations.

Give your brain a workout

The more you exercise your brain, like your body, the stronger it will be. Remember that diseases of the brain like Dementia and Alzheimer’s are increasing.

Read more and beyond your daily newspaper. Join or start discussion groups on subjects that interest you. Try Sudoku, Chess, Quiz Up or Scrabble. All these games are available free on your smart phone. Play online with people you do not know and compete with the best. Nothing prevents you from becoming the best in the region or for that matter in the World, using your brain and not brawn power.

Once you take the lead you will find lots of followers who want to play with you but were hesitant to take the lead.

Remove negativity and anxiety from your life

Life is too short and at our stage in life, we are already on the “back nine” of a round of golf! Now is the time to remove all the negativity we have carried inside us about family, friends and the World in general. All this negativity is only hurting ourselves.

If you are feeling anxious about someone or something, speak about it to your family and friends. Bottling this up inside you will only make it more challenging to deal with.

Resolve to celebrate the little joys that you will have and don’t hold back.

Get enough sleep

Most people seem to believe in a myth that as you get older you need lesser sleep. Nothing is farther away from the truth. If you are sleeping late or getting up very early, stay in bed longer than you normally would have and soon you will be sleeping longer and waking up much more rested. Avoid your daytime nap in the early days till your night time sleeping pattern becomes normal. Then you can easily go back to your power siesta as well!

Get regular medical check-ups

Monitor, manage and record your blood pressure, your blood sugar and your weight in a regular systematic manner. If you don’t have any of these challenges, consider yourself blessed. It is necessary for you to get annual medical check-ups done and if you did not get a checkup this year, resolve to undergo a comprehensive check up in the New Year.

Travel and discover new places

Throughout your working life you would have wanted to see new places but did not have the time either because of work commitments or family commitments. Now is the time for you to realise all those dreams. You and your partner can travel to new cities or new countries or even discover new parts of the city you live in.

Discovering new places, new cuisines, new customs and making new friends will be a very energising experience.

Finally, as you celebrate during this festive season with your loved ones, raise a toast to the coming year, but with a smaller glass!

Wish you a very Happy, Healthy and Prosperous New Year.

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The author is an Executive Coach and an Angel Investor. A keen political observer, he is also the founder Chairman of Guardian Pharmacies. He is the author of 6 best-selling books, The Brand Called You; Reboot. Reinvent. Rewire: Managing Retirement in the 21st Century; The Corner Office; An Eye for an Eye; The Buck Stops Here – Learnings of a #Startup Entrepreneur and The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur.

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सेवानिवृत्त लोगों के लिए नए साल के संकल्प!

2. Reboot. Reinvent. Rewire Managing Retirement in the Twenty First Century

नया साल अगले मुहाने पर खड़ा है और यह उन संकल्पों के बारे में फ़िर से सोचने का समय है! फ़िर चाहे आप अधिक माक़ूल या स्वस्थ बने रहने का संकल्प करें, अधिक सामाजिक होने पर विचार करें या अपनी बकेट लिस्ट के उन कुछ बिंदुओं को चिह्नित करें,जिन्हें जाते साल में करना रहना गया और उन्हें आने वाले वर्ष में करने के बारे में सोचा जा सकता है। नीचे कुछ विचार दिए गए हैं और आप नए साल के संकल्पों की अपनी सूची में उनमें से कुछ या सभी को जोड़ने पर विचार कर सकते हैं।

अपने स्वास्थ्य के लिए लें बेहतर आहार

अपनी सेहत का जिम्मा अपने हाथों में ले लीजिए। अपने भोजन का स्वरूप बदलें। सही खाना खाने की दिशा में छोटे कदम बढ़ाए। आखिरकार, यदि आप अपनी खाद्य आदतों के प्रति लापरवाह हैं, तो उन्हें रातोंरात नहीं बदल सकते हैं।

हमेशा ज्यादातर लोगों को कम वसा एवं अधिक रेशेदार फल, सब्जियाँ और सूखे मेवों के स्वस्थ मिश्रण का सेवन करने की सलाह दी जाती है। बुज़ुर्ग होने के नाते हमारे आहार को नियंत्रित करने के लिए यह और भी महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हो जाता है। दिन में कई बार स्वल्पाहार लें। ज्यादातर विशेषज्ञ दिन में 5 बार खाने की सलाह देते हैं लेकिन कम मात्रा में। जैसा कि कुछ विद्वान लोग कहते हैं, “आप अपना पूरा खाना होने से ठीक पहले खाना बंद कर दीजिए!” अन्य कहते हैं कि आपकी कम से कम आधी प्लेट फल और सब्जियों से भरी होनी चाहिए।

अपने सामान्य आहार के माध्यम से आप जो प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं उसे संतुलित करने के लिए अपने आहार में विटामिन और अन्य पूरक जोड़ें।

याद रखें कि बेहतर भोजन ही आपके वजन को कम करने का एकमात्र विकल्प है।

कोई नई, स्वस्थ गतिविधि खोजें

जैसे-जैसे हम बड़े होते चले जाते हैं, चाहे हम पहले सक्रिय रहे हो या नहीं, लेकिन अब सक्रिय रहना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। व्यायाम या योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएँ। टेनिस या गोल्फ खेलने का दौर, हर दिन कम से कम 30 मिनट तक तेज चलना (चलने के लिए प्रति सप्ताह 150 मिनट न्यूनतम अनुशंसित है), यौगिक श्वास अभ्यास, तैराकी या साइकिल चलाना आपकी दिनचर्या में शामिल हो तो बहुत अच्छा होगा।

मैंने ऐसे कई वरिष्ठ नागरिकों से मुलाक़ात की है, जिन्होंने अपनी उम्र के लोगों के साथ दौड़ना और दौड़ लगाना शुरू कर दिया है। उन्हें सेहतमंद रहने की इस प्रक्रिया में समान विचारधारा के और उत्साही मित्रों का नया समुदाय भी मिल गया है। अपने व्यक्तित्व और गतिविधि स्तर के आधार पर सही गतिविधि आज़माना और खोजना सर्वोत्तम है।

अपनी बकेट लिस्ट के कुछ बिंदुओं को पूरा करें

खुद को ब्रेक दें। आपने इसे अर्जित किया है। सालों-साल हमारी बकेट लिस्ट में कई बातें जमा होती जा रही हैं। यह लिस्ट लंबे समय तक वैसी की वैसी पड़ी है क्योंकि हम अपने कामकाजी जीवन में समय नहीं निकाल पाए।

आने वाले वर्ष में अपनी बकेट लिस्ट में से कम से कम दो महत्वपूर्ण बातें पूरा करने के लिए हल खोज निकालिए।

दोस्तों और परिवार के साथ और अधिक जुड़ें

अपने काम-काज के चलते व्यस्तता भरे दिनों में जिन पुराने लोगों से मेल-मुलाक़ात बंद हो गई थी, उनसे फ़िर से जुड़िए। पहला कदम उठाने के लिए किसी और की प्रतीक्षा मत कीजिए। एक बार अपने परिवार और दोस्तों से जाकर मिलने तो लगिए, आप हैरान रह जाएँगे कि आपको उनसे कितनी ऊष्मा-उर्जा मिल रही है। यह देखना बहुत दिलचस्प है कि कितने ही लोग फेसबुक और लिंक्डइन का उपयोग कर अपने स्कूल और कॉलेज के पुराने दोस्तों को फिर से खोज रहे हैं।

दोस्तों के साथ कभी-कभार दोपहर का साप्ताहिक भोजन या सुबह की कॉफ़ी या दुनिया भर में फैले हुए आपके परिवार के सदस्यों के साथ व्हाट्सएप या स्काइप कॉल फिर से जुड़ने के शानदार तरीके हैं। उन लोगों के साथ बात करने और हँसने में बिताया गया समय सबसे अच्छे तरीके से बिताया गया समय होगा।

अपना सामान कम करें

अपने कपड़ों की अलमारी और घर साफ करने का तरीका खोजें। इस अभ्यास को शुरू करने से पहले “इच्छा” और “ज़रूरत” के बीच के अंतर के बारे में सोचें। जिन चीजों की आपको आवश्यकता है उन्हें रहने दें और जिनकी आपको चाहना हैं, उन्हें छोड़ दें। यह दार्शनिक लग सकता है लेकिन आजमाएँ, पिछले एक साल से जो भी आपने उपयोग नहीं किया है उसे अलग कर दें। आपके सामने चुनौती यह है कि आपको हमेशा यह लग सकता है कि यदि अचानक उस वस्तु की आवश्यकता आन पड़ी तो-“क्या होगा”। यदि आपने एक बार उसे दूर कर देने का निर्णय ले लिया है, तो उसे अगले आने वाले वर्ष तक सक्रिय संकल्प के रूप में रखें और फिर मूल्यांकन करें कि क्या आपको उस वस्तु (ओं) की आवश्यकता महसूस हुई या नहीं,जिसे आपने दूर कर दिया था। जबकि संभावना तो यह है कि आपको उन वस्तुओं की कभी याद भी नहीं आएगी।

इसके अलावा इससे बेतरतीब पड़े सामान को व्यवस्थित करने और समय-समय पर आपके घर को साफ़ करने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।

नई तकनीक आजमा कर देखें

प्रौद्योगिकी से जैसा कि आप अच्छी तरह जानते हैं हमारी दुनिया बदल रही है। यदि आप फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य सारे माध्यमों से संचार और कनेक्शन के कई रूपों को पहले नहीं समझ पाए हैं तो अब ऐसा करने का समय है। अपने फोन और अन्य उपकरणों के ऑपरेटिंग सिस्टम से परिचित हो जाइए। आइए इन मंचों को जानने और समझने की कोशिश करें क्योंकि हमारा जीवन अधिक से अधिक ऐसे मंचों पर विकसित होने वाले अनुप्रयोगों और इस तरह के संचार माध्यमों के आसपास घूमने वाला है।

अपने ज्ञान और कौशल को धारदार बनाने के लिए आपके हर संभावित प्रश्न के उत्तरों के ऑन-लाइन ट्यूटोरियल हैं। आप अपने घर के या पड़ोस के किसी युवा से अनुरोध भी कर सकते हैं कि वह

आपको सिखा दें।

अपनी कहानी साझा कीजिए

आपने अद्भुत और भरापूरा जीवन जीया है और अब आपकी कहानी सबको बताने का समय आ गया है। अपना ब्लॉग लिखें और इसे दैनिक या साप्ताहिक आधार पर प्रकाशित करें। अपने जीवन के सभी उपाख्यानों के बारे में सोचें और उनके बारे में लिखें। अपने करियर के मील के पत्थर और बच्चे के रूप में बिताए गए समय के बारे में सोचें और उन्हें दर्ज करें। अपने माता-पिता और विस्तारित परिवार के बारे में सोचें और उन यादों को ध्यान से लिखित रूप में संग्रहित करें।

यदि आप ब्लॉग लिखने में सहज नहीं हैं, तो इसे अपने मोबाइल फोन पर बोलकर लिखवा लें। अधिकांश फोन में अब “वॉयस टू टेक्स्ट” की सुविधा है जो आपकी वॉयस रिकॉर्डिंग को तेज़ी से लिखित में बदलना जानती है। यदि यह भी काम नहीं करता है, तो रिकॉर्डिंग को किसी को भेजें जो इसे बहुत ही कम शुल्क लेकर ट्रांसक्रिप्ट कर देगा। वह तय ब्लॉग भावी पीढ़ी के लिए भी आपकी आवाज़ सुरक्षित रखेगा।

यह न केवल आपकी यादों और विचारों को दर्ज करेगा, बल्कि यह भावी पीढ़ियों के लिए आपके परिवार के इतिहास का दस्तावेज भी बन सकता है।

मस्तिष्क को भी व्यायाम दें

जितना अधिक आप अपने मस्तिष्क का प्रयोग करेंगे, उतना ही यह आपके शरीर की तरह मजबूत बनेगा। ध्यान दें कि इन दिनों मस्तिष्क की बीमारियाँ जैसे डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर के मरीज़ बढ़ रहे हैं।

अपने दैनिक समाचार पत्र के अलावा भी दूसरा बहुत कुछ पढ़ें। जिन विषयों में आपकी रुचि है उनसे संबंधित चर्चा समूहों में शामिल हों या ऐसे विषयों के समूह प्रारंभ करें। सुडोकू, शतरंज, प्रश्नोत्तरी या स्क्रैबल आज़माएँ। ये सभी खेल आपके स्मार्ट फोन पर निःशुल्क उपलब्ध हैं। जिन्हें आप नहीं जानते, उन लोगों के साथ ऑनलाइन खेलें और सर्वोत्तम को टक्कर दें। अपनी दिमाग शक्ति का उपयोग करें न कि मांसपेशियों के बल का, फिर तो आपको इस क्षेत्र में या कि यूँ कह लें दुनिया में कुछ भी सबसे अच्छा करने से आपको कोई नहीं रोक सकता है।

एक बार जब आप नेतृत्व कर लेंगे तो आपको बहुत से अनुयायी मिल जाएंगे जो आपके साथ खेलना चाहते हैं लेकिन आगे आने में संकोच कर रहे थे।

अपने जीवन से नकारात्मकता और चिंता दूर करें

जीवन बहुत छोटा है और जीवन के जिस मुकाम पर हम हैं, वहाँ हम पहले से ही गोल्फ के “अंतिम नौ” (बैक नाइन सीधे गोल्फ के दौर के अंत को देखने से संबंधित है) के दौर पर हैं! अब हमारे सामने वह समय है जब हमें अपने भीतर परिवार के लोगों, दोस्तों और दुनिया को लेकर जितनी भी नकारात्मकता है वह सारी ख़त्म कर देना चाहिए। इस सारी नकारात्मकता से हम केवल खुद को चोट पहुँचाते हैं।

यदि आप किसी बारे में चिंतित महसूस कर रहे हैं, तो अपने परिवार और दोस्तों से उस बारे में बात करें। इसे अंदर ही अंदर बोतलबंद कर देने पर आपके लिए ही इससे निपटना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

छोटी से छोटी जो भी खुशी आपके पास आए, उसे मनाना ठान लें और ऐसा करने से ख़ुद को न रोकें।

पर्याप्त नींद लें

ज्यादातर लोग उस कपोल कल्पना पर विश्वास रखते हैं कि जब आप बूढ़े हो जाते हैं तो आपको कम नींद की आवश्यकता होती है। सच्चाई से इसका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। यदि आप देर तक सो रहे हैं या बहुत जल्दी उठ रहे हैं, तो आमतौर पर जितना समय आप बिस्तर पर रहते हैं उससे अधिक समय तक बिस्तर पर रहें और देखेंगे कि जल्द ही आप लंबे समय तक सो रहे होंगे और अधिक आराम कर रहे होंगे। शुरुआती दिनों में तब तक दिन में नींद लेने से बचें जब तक कि आपकी रात को समय पर सोने की आदत सामान्य न हो जाए। फिर आप आसानी से अपनी दोपहर की झपकी भी ले सकते हैं!

नियमित चिकित्सकीय जाँचपड़ताल करवाते रहें

नियमित रूप से और व्यवस्थित तरीके से अपना रक्तचाप, रक्त में शकर की मात्रा और अपना वजन नियंत्रित, प्रबंधित और दर्ज करें। यदि आपके सामने ऐसी कोई भी चुनौती नहीं है, तो इसे आशीर्वाद मानें। आपके लिए ज़रूरी है कि आप सालाना चिकित्सकीय जाँच-पड़ताल करवाते रहे और यदि आपने इस साल जाँच नहीं की है, तो नए साल में व्यापक जाँच करवाने का संकल्प लें।

यात्रा करें और नए स्थानों की खोज करें

अपने पूरे कामकाजी जीवन में आप नए स्थानों को देखना चाहते थे लेकिन अपने कार्य से जुड़ी प्रतिबद्धताओं या पारिवारिक प्रतिबद्धताओं के कारण समय नहीं निकाल पा रहे थे। अब उन सभी सपनों को साकार करने का समय आ गया है। आप और आपके जीवनसाथी नए शहरों या नए देशों की यात्रा कर सकते हैं या यहाँ तक कि आप जिस शहर में रहते हैं उसके ही नए हिस्सों को भी खोज सकते हैं।

नए स्थानों की खोज, नए व्यंजन, नए रिवाज और नए दोस्त बनाना बहुत ही उत्साही अनुभव होगा।

और अंत में, चूँकि आप अपने प्रियजनों के साथ इस त्यौहार के मौसम का जश्न मना रहे हैं, तो आने वाले साल के नाम एक जाम ले लें, पर छोटे पेग के साथ!

हम आपके लिए बहुत ही ख़ुशनुमा, सेहतमंद और समृद्ध नए साल की कामना करते हैं।

*******************

लेखक कार्यकारी कोच और एंजेल निवेशक हैं। राजनीतिक समीक्षक के साथ वे गार्डियन फार्मेसीज के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। वे 6 बेस्ट सेलर पुस्तकों ब्रांड कॉल्ड यूThe Brand Called You रीबूट– Reboot. रीइंवेन्ट Reinvent. रीवाईर Rewire: 21वीं सदी में सेवानिवृत्ति का प्रबंधन, Managing Retirement in the 21st Century; कॉर्नर ऑफ़िस, The Corner Office; एन आई फ़ार एन आई An Eye for an Eye; बक स्टॉप्स हीयर– The Buck Stops Here लर्निंग ऑफ़ # स्टार्टअप आंतरप्रेनर और Learnings of a #Startup Entrepreneur and बक स्टॉप्स हीयरमाय जर्नी फ़्राम मैनेजर टू ऐन आंतरप्रेनर, The Buck Stops Here My Journey from a Manager to an Entrepreneur. के लेखक हैं।

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नया साल अगले मुहाने पर खड़ा है और यह उन संकल्पों के बारे में फ़िर से सोचने का समय है! फ़िर चाहे आप अधिक माक़ूल या स्वस्थ बने रहने का संकल्प करें, अधिक सामाजिक होने पर विचार करें या अपनी बकेट लिस्ट के उन कुछ बिंदुओं को चिह्नित करें,जिन्हें जाते साल में करना रहना गया और उन्हें आने वाले वर्ष में करने के बारे में सोचा जा सकता है। नीचे कुछ विचार दिए गए हैं और आप नए साल के संकल्पों की अपनी सूची में उनमें से कुछ या सभी को जोड़ने पर विचार कर सकते हैं।

अपने स्वास्थ्य के लिए लें बेहतर आहार

अपनी सेहत का जिम्मा अपने हाथों में ले लीजिए। अपने भोजन का स्वरूप बदलें। सही खाना खाने की दिशा में छोटे कदम बढ़ाए। आखिरकार, यदि आप अपनी खाद्य आदतों के प्रति लापरवाह हैं, तो उन्हें रातोंरात नहीं बदल सकते हैं।

हमेशा ज्यादातर लोगों को कम वसा एवं अधिक रेशेदार फल, सब्जियाँ और सूखे मेवों के स्वस्थ मिश्रण का सेवन करने की सलाह दी जाती है। बुज़ुर्ग होने के नाते हमारे आहार को नियंत्रित करने के लिए यह और भी महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हो जाता है। दिन में कई बार स्वल्पाहार लें। ज्यादातर विशेषज्ञ दिन में 5 बार खाने की सलाह देते हैं लेकिन कम मात्रा में। जैसा कि कुछ विद्वान लोग कहते हैं, “आप अपना पूरा खाना होने से ठीक पहले खाना बंद कर दीजिए !” अन्य कहते हैं कि आपकी कम से कम आधी प्लेट फल और सब्जियों से भरी होनी चाहिए।

अपने सामान्य आहार के माध्यम से आप जो प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं उसे संतुलित करने के लिए अपने आहार में विटामिन और अन्य पूरक जोड़ें।

याद रखें कि बेहतर भोजन ही आपके वजन को कम करने का एकमात्र विकल्प है।

कोई नई, स्वस्थ गतिविधि खोजें

जैसे-जैसे हम बड़े होते चले जाते हैं, चाहे हम पहले सक्रिय रहे हो या नहीं, लेकिन अब सक्रिय रहना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। व्यायाम या योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएँ। टेनिस या गोल्फ खेलने का दौर, हर दिन कम से कम 30 मिनट तक तेज चलना (चलने के लिए प्रति सप्ताह 150 मिनट न्यूनतम अनुशंसित है), यौगिक श्वास अभ्यास, तैराकी या साइकिल चलाना आपकी दिनचर्या में शामिल हो तो बहुत अच्छा होगा।

मैंने ऐसे कई वरिष्ठ नागरिकों से मुलाक़ात की है, जिन्होंने अपनी उम्र के लोगों के साथ दौड़ना और दौड़ लगाना शुरू कर दिया है। उन्हें सेहतमंद रहने की इस प्रक्रिया में समान विचारधारा के और उत्साही मित्रों का नया समुदाय भी मिल गया है। अपने व्यक्तित्व और गतिविधि स्तर के आधार पर सही गतिविधि आज़माना और खोजना सर्वोत्तम है।

अपनी बकेट लिस्ट के कुछ बिंदुओं को पूरा करें

खुद को ब्रेक दें। आपने इसे अर्जित किया है। सालों-साल हमारी बकेट लिस्ट में कई बातें जमा होती जा रही हैं। यह लिस्ट लंबे समय तक वैसी की वैसी पड़ी है क्योंकि हम अपने कामकाजी जीवन में समय नहीं निकाल पाए।

आने वाले वर्ष में अपनी बकेट लिस्ट में से कम से कम दो महत्वपूर्ण बातें पूरा करने के लिए हल खोज निकालिए।

दोस्तों और परिवार के साथ और अधिक जुड़ें

अपने काम-काज के चलते व्यस्तता भरे दिनों में जिन पुराने लोगों से मेल-मुलाक़ात बंद हो गई थी, उनसे फ़िर से जुड़िए। पहला कदम उठाने के लिए किसी और की प्रतीक्षा मत कीजिए। एक बार अपने परिवार और दोस्तों से जाकर मिलने तो लगिए, आप हैरान रह जाएँगे कि आपको उनसे कितनी ऊष्मा-उर्जा मिल रही है। यह देखना बहुत दिलचस्प है कि कितने ही लोग फेसबुक और लिंक्डइन का उपयोग कर अपने स्कूल और कॉलेज के पुराने दोस्तों को फिर से खोज रहे हैं।

दोस्तों के साथ कभी-कभार दोपहर का साप्ताहिक भोजन या सुबह की कॉफ़ी या दुनिया भर में फैले हुए आपके परिवार के सदस्यों के साथ व्हाट्सएप या स्काइप कॉल फिर से जुड़ने के शानदार तरीके हैं। उन लोगों के साथ बात करने और हँसने में बिताया गया समय सबसे अच्छे तरीके से बिताया गया समय होगा।

अपना सामान कम करें

अपने कपड़ों की अलमारी और घर साफ करने का तरीका खोजें। इस अभ्यास को शुरू करने से पहले “इच्छा” और “ज़रूरत” के बीच के अंतर के बारे में सोचें। जिन चीजों की आपको आवश्यकता है उन्हें रहने दें और जिनकी आपको चाहना हैं, उन्हें छोड़ दें। यह दार्शनिक लग सकता है लेकिन आजमाएँ, पिछले एक साल से जो भी आपने उपयोग नहीं किया है उसे अलग कर दें। आपके सामने चुनौती यह है कि आपको हमेशा यह लग सकता है कि यदि अचानक उस वस्तु की आवश्यकता आन पड़ी तो-“क्या होगा”। यदि आपने एक बार उसे दूर कर देने का निर्णय ले लिया है, तो उसे अगले आने वाले वर्ष तक सक्रिय संकल्प के रूप में रखें और फिर मूल्यांकन करें कि क्या आपको उस वस्तु (ओं) की आवश्यकता महसूस हुई या नहीं,जिसे आपने दूर कर दिया था। जबकि संभावना तो यह है कि आपको उन वस्तुओं की कभी याद भी नहीं आएगी।

इसके अलावा इससे बेतरतीब पड़े सामान को व्यवस्थित करने और समय-समय पर आपके घर को साफ़ करने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।

नई तकनीक आजमा कर देखें

प्रौद्योगिकी से जैसा कि आप अच्छी तरह जानते हैं हमारी दुनिया बदल रही है। यदि आप फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य सारे माध्यमों से संचार और कनेक्शन के कई रूपों को पहले नहीं समझ पाए हैं तो अब ऐसा करने का समय है। अपने फोन और अन्य उपकरणों के ऑपरेटिंग सिस्टम से परिचित हो जाइए। आइए इन मंचों को जानने और समझने की कोशिश करें क्योंकि हमारा जीवन अधिक से अधिक ऐसे मंचों पर विकसित होने वाले अनुप्रयोगों और इस तरह के संचार माध्यमों के आसपास घूमने वाला है।

अपने ज्ञान और कौशल को धारदार बनाने के लिए आपके हर संभावित प्रश्न के उत्तरों के ऑन-लाइन ट्यूटोरियल हैं। आप अपने घर के या पड़ोस के किसी युवा से अनुरोध भी कर सकते हैं कि वह

आपको सिखा दें।

अपनी कहानी साझा कीजिए

आपने अद्भुत और भरापूरा जीवन जीया है और अब आपकी कहानी सबको बताने का समय आ गया है। अपना ब्लॉग लिखें और इसे दैनिक या साप्ताहिक आधार पर प्रकाशित करें। अपने जीवन के सभी उपाख्यानों के बारे में सोचें और उनके बारे में लिखें। अपने करियर के मील के पत्थर और बच्चे के रूप में बिताए गए समय के बारे में सोचें और उन्हें दर्ज करें। अपने माता-पिता और विस्तारित परिवार के बारे में सोचें और उन यादों को ध्यान से लिखित रूप में संग्रहित करें।

यदि आप ब्लॉग लिखने में सहज नहीं हैं, तो इसे अपने मोबाइल फोन पर बोलकर लिखवा लें। अधिकांश फोन में अब “वॉयस टू टेक्स्ट” की सुविधा है जो आपकी वॉयस रिकॉर्डिंग को तेज़ी से लिखित में बदलना जानती है। यदि यह भी काम नहीं करता है, तो रिकॉर्डिंग को किसी को भेजें जो इसे बहुत ही कम शुल्क लेकर ट्रांसक्रिप्ट कर देगा। वह तय ब्लॉग भावी पीढ़ी के लिए भी आपकी आवाज़ सुरक्षित रखेगा।

यह न केवल आपकी यादों और विचारों को दर्ज करेगा, बल्कि यह भावी पीढ़ियों के लिए आपके परिवार के इतिहास का दस्तावेज भी बन सकता है।

मस्तिष्क को भी व्यायाम दें

जितना अधिक आप अपने मस्तिष्क का प्रयोग करेंगे, उतना ही यह आपके शरीर की तरह मजबूत बनेगा। ध्यान दें कि इन दिनों मस्तिष्क की बीमारियाँ जैसे डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर के मरीज़ बढ़ रहे हैं।

अपने दैनिक समाचार पत्र के अलावा भी दूसरा बहुत कुछ पढ़ें। जिन विषयों में आपकी रुचि है उनसे संबंधित चर्चा समूहों में शामिल हों या ऐसे विषयों के समूह प्रारंभ करें। सुडोकू, शतरंज, प्रश्नोत्तरी या स्क्रैबल आज़माएँ। ये सभी खेल आपके स्मार्ट फोन पर निःशुल्क उपलब्ध हैं। जिन्हें आप नहीं जानते, उन लोगों के साथ ऑनलाइन खेलें और सर्वोत्तम को टक्कर दें। अपनी दिमाग शक्ति का उपयोग करें न कि मांसपेशियों के बल का, फिर तो आपको इस क्षेत्र में या कि यूँ कह लें दुनिया में कुछ भी सबसे अच्छा करने से आपको कोई नहीं रोक सकता है।

एक बार जब आप नेतृत्व कर लेंगे तो आपको बहुत से अनुयायी मिल जाएंगे जो आपके साथ खेलना चाहते हैं लेकिन आगे आने में संकोच कर रहे थे।

अपने जीवन से नकारात्मकता और चिंता दूर करें

जीवन बहुत छोटा है और जीवन के जिस मुकाम पर हम हैं, वहाँ हम पहले से ही गोल्फ के “अंतिम नौ” (बैक नाइन सीधे गोल्फ के दौर के अंत को देखने से संबंधित है) के दौर पर हैं! अब हमारे सामने वह समय है जब हमें अपने भीतर परिवार के लोगों, दोस्तों और दुनिया को लेकर जितनी भी नकारात्मकता है वह सारी ख़त्म कर देना चाहिए। इस सारी नकारात्मकता से हम केवल खुद को चोट पहुँचाते हैं।

यदि आप किसी बारे में चिंतित महसूस कर रहे हैं, तो अपने परिवार और दोस्तों से उस बारे में बात करें। इसे अंदर ही अंदर बोतलबंद कर देने पर आपके लिए ही इससे निपटना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

छोटी से छोटी जो भी खुशी आपके पास आए, उसे मनाना ठान लें और ऐसा करने से ख़ुद को न रोकें।

पर्याप्त नींद लें

ज्यादातर लोग उस कपोल कल्पना पर विश्वास रखते हैं कि जब आप बूढ़े हो जाते हैं तो आपको कम नींद की आवश्यकता होती है। सच्चाई से इसका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। यदि आप देर तक सो रहे हैं या बहुत जल्दी उठ रहे हैं, तो आमतौर पर जितना समय आप बिस्तर पर रहते हैं उससे अधिक समय तक बिस्तर पर रहें और देखेंगे कि जल्द ही आप लंबे समय तक सो रहे होंगे और अधिक आराम कर रहे होंगे। शुरुआती दिनों में तब तक दिन में नींद लेने से बचें जब तक कि आपकी रात को समय पर सोने की आदत सामान्य न हो जाए। फिर आप आसानी से अपनी दोपहर की झपकी भी ले सकते हैं!

नियमित चिकित्सकीय जाँचपड़ताल करवाते रहें

नियमित रूप से और व्यवस्थित तरीके से अपना रक्तचाप, रक्त में शकर की मात्रा और अपना वजन नियंत्रित, प्रबंधित और दर्ज करें। यदि आपके सामने ऐसी कोई भी चुनौती नहीं है, तो इसे आशीर्वाद मानें। आपके लिए ज़रूरी है कि आप सालाना चिकित्सकीय जाँच-पड़ताल करवाते रहे और यदि आपने इस साल जाँच नहीं की है, तो नए साल में व्यापक जाँच करवाने का संकल्प लें।

यात्रा करें और नए स्थानों की खोज करें

अपने पूरे कामकाजी जीवन में आप नए स्थानों को देखना चाहते थे लेकिन अपने कार्य से जुड़ी प्रतिबद्धताओं या पारिवारिक प्रतिबद्धताओं के कारण समय नहीं निकाल पा रहे थे। अब उन सभी सपनों को साकार करने का समय आ गया है। आप और आपके जीवनसाथी नए शहरों या नए देशों की यात्रा कर सकते हैं या यहाँ तक कि आप जिस शहर में रहते हैं उसके ही नए हिस्सों को भी खोज सकते हैं।

नए स्थानों की खोज, नए व्यंजन, नए रिवाज और नए दोस्त बनाना बहुत ही उत्साही अनुभव होगा।

और अंत में, चूँकि आप अपने प्रियजनों के साथ इस त्यौहार के मौसम का जश्न मना रहे हैं, तो आने वाले साल के नाम एक जाम ले लें, पर छोटे पेग के साथ!

हम आपके लिए बहुत ही ख़ुशनुमा, सेहतमंद और समृद्ध नए साल की कामना करते हैं।

*******************

लेखक कार्यकारी कोच और एंजेल निवेशक हैं। राजनीतिक समीक्षक के साथ वे गार्डियन फार्मेसीज के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। वे 6 बेस्ट सेलर पुस्तकों ब्रांड कॉल्ड यूThe Brand Called You रीबूट– Reboot. रीइंवेन्ट Reinvent. रीवाईर Rewire: 21वीं सदी में सेवानिवृत्ति का प्रबंधन, Managing Retirement in the 21st Century; कॉर्नर ऑफ़िस, The Corner Office; एन आई फ़ार एन आई An Eye for an Eye; बक स्टॉप्स हीयर– The Buck Stops Here लर्निंग ऑफ़ # स्टार्टअप आंतरप्रेनर और Learnings of a #Startup Entrepreneur and बक स्टॉप्स हीयरमाय जर्नी फ़्राम मैनेजर टू ऐन आंतरप्रेनर, The Buck Stops Here My Journey from a Manager to an Entrepreneur. के लेखक हैं।

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भारत में आगामी चुनाव – जवाबों से अधिक हैं सवाल

181110 Elections

भाजपा ने बेल्लारी में एक और सीट खो दी है और काँग्रेस ने अविश्वसनीय नेतृत्व की विजयी तुरही को पहले ही बजा दिया है, जिसे उनके “युवा” नेता देश को उपलब्ध करा रहे हैं!

जब भाजपा में “चिंतन बैठकें” चलेंगी तब भाजपा के विचारक (थिंक) टैंक को इस पर भी विचार करना चाहिए कि असल में मतदाताओं के दिमाग में क्या चल रहा है और क्यों ऐसा लग रहा है कि उनके अपने निर्वाचन क्षेत्रों के हाल उनके कानों तक नहीं पहुँच पा रहे हैं।

स्पष्ट रूप से कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर निरंतर हमले की विपक्षी रणनीति मतदाताओं के दिमाग को प्रभावित करने लगी है, मतदाताओं की बहुत ही आम प्रतिक्रिया है कि “बिना आग के धुआँ नहीं उठता”। प्रधानमंत्री मोदी पर बार-बार चलकर जाने की विपक्षी रणनीति भाजपा को चोट पहुँचाने लगी है।

तमाम राजनीतिक तफ़सीलों को हवाओं में उड़ा दिया गया है और विपक्ष के लिए प्रधानमंत्री मोदी मतलब “अर्जुन के लिए मछली की आँख” की तरह है। उन्हें भ्रष्ट से लेकर बिच्छू और हिटलर से लेकर एनाकोंडा तक न जाने क्या-क्या कहकर बुलाया जा चुका है और विपक्ष ने उनके लिए किताब का कोई नकारात्मक विशेषण बकाया नहीं रखा है।

अधिकांश विपक्षी नेता अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या प्रधानमंत्री पर हमला बोलने का इरादा योग्य है, जिन्हें वर्तमान समय के सबसे कद्दावर नेता के रूप में देखा जा रहा है। वे इसे लेकर भी निश्चिंत नहीं हैं कि वे किस विषय का आधार लेकर हमले कर सकते हैं।

तथाकथित महागठबंधन अपने तरीके से चलते हुए लगता है अपने पागलपन की कगार तक पहुँच गया है। हालाँकि उनके द्वारा बार-बार किए जाने वाले हमले मतदाताओं तक पहुँच रहे हैं, तथापि मतदाता इस कथा को स्वीकार करेंगे या नहीं, यह अब भी काफ़ी अस्पष्ट है।

हालाँकि, क्या असल में कोई महागठबंधन है?

क्या सीपीआई (एम) और तृणमूल काँग्रेस या समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसे पूरी तरह से भिन्न विचारधारा वाले राजनीतिक दल वास्तव में किसी साझा मंच पर आ सकते हैं? क्या वे कभी भी आम आर्थिक एजेंडे और शासन की भ्रष्टाचार मुक्त प्रणाली पर सहमत हो पाएँगे?

भारत के चतुर मतदाता पहचानते हैं कि उनके सामने ऐसी स्थिति नहीं हो सकती जब राजनेता भारत के प्रधानमंत्री की कुर्सी के साथ संगीत कुर्सी का खेल खेलें और जिसके प्रमुख खिलाड़ी मायावती, ममता बनर्जी, राहुल गाँधी, अखिलेश यादव और चंद्रबाबू नायडू हो।

हर कोई स्वीकार कर रहा है कि अगर मोदी को दूसरा कार्यकाल नहीं मिलता है तो वह बड़ी आपदा होगी क्योंकि राजनीतिक दलों की भीड़ में नियमित आवर्तन पर हर साल एक नया प्रधानमंत्री मिलने के विकल्प की डरावनी आशंका है। हर 12 महीने में नया प्रधानमंत्री और संभावित रूप से पूरी तरह फिर नए संशोधित मंत्रिमंडल की कल्पना तक करना भयानक है!

काँग्रेस जानती है कि अगले चुनावों के बाद तक जीवित बने रहने के लिए उनका एकमात्र आसरा आक्रामक होना है। भाजपा पर हमला करने के लिए मंदिर दर्शन और नर्म हिंदुत्व के अलावा राहुल गाँधी छत्तीसगढ़ में शराब पर प्रतिबंध लगाने के लिए ऋण छूट देने का वादा करने तक कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।

उनके हमले आम तौर पर आरएसएस, राफेल, विमुद्रीकरण, घोर पूंजीवाद, जीएसटी और गैर-निष्पादित संपत्ति के आसपास केंद्रित होते हैं। आरएसएस पर हमला हास्यास्पद है। आरएसएस से जुड़े तमाम लोग राहुल गाँधी जो भी आरोप लगाते हैं, उनमें से किसी पर विश्वास नहीं करते हैं। वे जो आरएसएस से न भी जुड़े हैं, वे भी इस बात से सहमत हैं कि हिंदू कभी भी आतंकवादी नहीं हो सकते हैं। क्या आम मतदाता को पता भी है कि राफेल सौदा है क्या?

क्या कोई भी वास्तव में राहुल गाँधी द्वारा उठाए गए भ्रष्टाचार के मामलों पर विश्वास करता है, क्योंकि वे अपने भाषणों में अपनी सहूलियत से एक बार एक बात कहते हैं फिर ठोकर लगने पर दूसरी गलती करते हैं। क्या यह ऐसा ही नहीं कि कोयले की कोठरी में रहने वाला कहे कि काजल काला है? चुनावों को लेकर काँग्रेस की रणनीति क्या है सिवाय मोदी को गाली देने और भ्रष्टाचार के ढेरों अस्तित्वहीन आरोप लगाने के?

क्या राहुल गाँधी अब न केवल काँग्रेस की बल्कि महागठबंधन की भी बड़ी देयता नहीं बन गए हैं? क्या काँग्रेस के भीतर का असंतोष उसके नेताओं को एक दिशा में एक साथ खींचने में सक्षम होगा? क्या राहुल गाँधी की सावधानीपूर्वक बनाई गई योजनाएँ तेजी से अलग-थलग हो रही हैं क्योंकि वास्तव में कोई भी उन पर या उनकी क्षमताओं पर भरोसा नहीं कर रहा है।

क्या राहुल गाँधी चुनावी खेल में बहुत जल्दी “मुरझा” रहे हैं और क्या उनके तरकश वर्ष 2019 की पहली तिमाही के अंत तक कमान पर चढ़े तीरों से भरे होंगे या वे पहले से चलाए गए या बोथरे तीरों का इस्तेमाल करेंगे?

सरकार द्वारा लिए गए हर निर्णय की काँग्रेस के नेताओं और उनसे जुड़े उन पत्रकारों द्वारा बार-बार पड़ताल की जाती है जिन पत्रकारों को भाजपा ने पिछले 4 सालों में छोड़ दिया है। जैसे-जैसे चुनाव पास आएँगे यह चढ़ाई और जोर पकड़ेगी। यह स्थिति लगभग इस तरह दिखती है जहाँ राहुल गाँधी और उनकी टीम हर दिन अख़बारों के पन्ने पलटती है और “चटपटे जायके” की तरह मसाला खोजती है कि कैसे हमला किया जा सकता है।

भाजपा प्रवक्ताओं का इन हमलों पर कोई जवाब सुनने में नहीं आता है गोयाकि वे अपने डेसीबल स्तर और तिज़ारती हमले को बढ़ाने की कोशिश करें और उससे भी बढ़कर यह कह दें कि, “ठीक है, पर वे भी तब ऐसा कर सकते थे, जब वे सत्ता में थे”।

भाजपा मोदी के मजबूत नेतृत्व तले विकास करने और भ्रष्टाचार को हटाने के मंच पर सत्ता में आई। पिछले 54 महीनों में कई ठोस विकास कार्य हुए हैं और बचाव करने के बजाय सफलताओं पर जोर देना अधिक महत्वपूर्ण है।

ऐसे में यह सवाल पूछा जाना लाज़मी है कि क्या यह सारा मोदी विरोधी प्रचार और शोर भाजपा के पीछे खड़े हिंदू वोट को मजबूत करने के लिए हैं क्योंकि कोई भी मोदी के खिलाफ लगाए जाने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों पर वास्तव में विश्वास नहीं कर रहा है?

तब भी, भाजपा इससे जुड़े सभी सकारात्मक पहलुओं का लाभ उठाने में सक्षम नहीं दिख रही है और विपक्षी नेताओं के गिरोह द्वारा बनाए झमेलों में उलझी हुई है, जिनका एकमात्र लक्ष्य है- हर कीमत पर जीत हासिल करना, फिर परिणाम भले ही कुछ भी हो।

भाजपा केवल यह उम्मीद कर सकती है कि विपक्षी रणनीति की धार बहुत जल्दी ख़त्म हो जाएगी क्योंकि ख़ुद के कहे का विरोधाभास न करते हुए बार-बार झूठ बोलते रहना काफी कठिन होता है।

राजनीति और चुनाव महज़ धारणाओं के खेल हैं।

भ्रष्टाचार वह विषय है जिसे भारतीय मतदाता समझते हैं और तुच्छ मानते हैं। भाजपा ने स्थापित किया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश में भ्रष्टाचार को काफी कम कर दिया है।

राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के चुनाव क्या वास्तव में वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में क्या हो सकता है उस संभावना की ओर इशारा करते हैं? लोकसभा चुनाव अभी 6 महीने दूर हैं। विभिन्न समाचार चैनलों द्वारा की जा रही मतदाताओं की गणना के बहुत ही विविध परिणाम आ रहे हैं और हम जानते हैं कि ये परिणाम अगले कुछ महीनों में बदलते रहेंगे।

जैसा कि कहा जा रहा है, देश को विकास की आवश्यकता है और मतदाताओं की उनके नेताओं से यही उम्मीद है। लेकिन 5 साल की अवधि में जो विकास हुआ है वह चुनाव में जीत नहीं दिलवा पाता है। पिछले कुछ दिनों में चुनाव में जीत या हार इस पर निर्भर हो रही है कि सीमांत मतदाता क्या तय कर रहे हैं।

धारणाएँ, झूठ और भ्रष्टाचार के आरोप मतदाताओं के दिमाग में संदेह पैदा करते हैं और उसका तुरंत जवाब देने और बड़े पुरज़ोर तरीके से जवाब देने की आवश्यकता होती है जैसे कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने व्यापमं मामले में किया था, जिसके बाद राहुल गाँधी को अपना बयान वापस लेना पड़ा था।

भ्रष्टाचार के आरोपों पर चुप रहना या जवाब देने के लिए उचित समय की प्रतीक्षा करना झूठ को मजबूत करता है और मतदाता मौन के कारण पर सवाल पूछने लगते हैं।

अगले कुछ महीनों में भाजपा की किस्मत अच्छी नज़र आ रही है, जो तेल की कीमतों में गिरावट के साथ शुरू हो रही है। अच्छी बारिश और किसानों के हाथों में अधिक पैसा कहानी को अचानक भाजपा के पक्ष में कर देगा। भाजपा को अब यह भी करना होगा कि उसके नेताओं को शहरों, स्थानों और तत्सम विषयों के नाम बदलने जैसे विविधीय विषयों की बात करना बंद करना होगा, जिससे कहानी में भटकाव आए और उसे विकास और भ्रष्टाचार के मुद्दे से दूर ले जाएँ।

सत्तारूढ़ दल को हमेशा विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है और विपक्ष जानता है कि हवा उसी दिशा में बह रही है, जिस ओर उसकी नाव जा रही है। इस पड़ाव पर अब उत्तरों से अधिक प्रश्न हैं।

हालाँकि स्पष्ट है कि भाजपा को अपनी कथा बदलने की और शीघ्रताशीघ्र बदलने की जरूरत है। जो भी मौलिक परिवर्तन किए गए हैं, उन सभी के परिणाम अगले पाँच वर्षों में देखे जा सकेंगे।

भाजपा के लिए यह चुनाव काफ़ी महत्वपूर्ण ” जीतना ही होगा” जैसा है।

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लेखक कार्यकारी कोच और एंजेल निवेशक हैं। राजनीतिक समीक्षक के साथ वे गार्डियन फार्मेसीज के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। वे 6 बेस्ट सेलर पुस्तकों – रीबूट- Reboot. रीइंवेन्ट Reinvent. रीवाईर Rewire: 21वीं सदी में सेवानिवृत्ति का प्रबंधन, Managing Retirement in the 21st Century; द कॉर्नर ऑफ़िस, The Corner Office; एन आई फ़ार एन आई An Eye for an Eye; द बक स्टॉप्स हीयर- The Buck Stops Here – लर्निंग ऑफ़ अ # स्टार्टअप आंतरप्रेनर और Learnings of a #Startup Entrepreneur and द बक स्टॉप्स हीयर- माय जर्नी फ़्राम अ मैनेजर टू ऐन आंतरप्रेनर, The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. के लेखक हैं।

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राफेल के साथ राहुल गाँधी और उनकी काँग्रेस कहाँ जा रही है?

 

181116 Rahul and Rafale

आख़िर ऐसी क्या वजह है कि जिसके चलते राफेल पर राहुल गाँधी अपने तथाकथित राजनीतिक करियर के साथ सबकुछ दाँव पर लगाने के लिए तैयार हैं?

मुझे यकीन है कि राजनेता होने के नाते वे जानते होंगे या उन्हें इस बात की सलाह भी दी गई होगी कि उन्हें सारे तीर एक ही तरक़श में नहीं रखने चाहिए। मतदाताओं के बीच उनकी व्यक्तिगत विश्वसनीयता हमेशा कम ही रही है और ससंद में और संसद के बाहर भी वे गड़बड़ करते नज़र आए हैं और सोशल मीडिया पर तो वे लगातार मंडराते ही रहते हैं। ऐसे में मुझे हैरत होगी यदि उन्हें इस बारे में कुछ पता न हो।

आगामी प्रादेशिक और लोकसभा चुनावों में व्यक्तिगत रूप से उनका बहुत कुछ दाँव पर लगा है। यदि कर्नाटक की बात छोड़ दे तो काँग्रेस ने राहुल गाँधी के नेतृत्व में लगभग हर चुनाव में मुँह की खाई है और कर्नाटक में भी सरकार बनाने के लिए गठबंधन सहयोगी का समर्थन लेना पड़ा और सहयोगी दल को गठबंधन के नेता के रूप में स्वीकार करने पर सत्ता मिल पाई। निश्चित ही अपनी शिकस्तों को काँग्रेस पार्टी पूरी तरह से अलग परिप्रेक्ष्य में पेश करेगी और केवल कुछ उप-चुनावों में मिली जीत की बात करती है।

मंदिर यात्राओं के दौरान किताब में और नर्म हिंदुत्व को दर्शाते हुए अपनी पहचान हिंदू समुदाय के साथ एक ओर तकनीकी तौर पर “जेनऊ धारी” के रूप में करने की वे हर संभव कोशिश करते हैं और दूसरी ओर सरकार के हर कदम पर सवाल उठाते हैं। ख़ास तौर पर जो विस्मित करती है, वह है उनकी असंसदीय (अशोभनीय) भाषा, जो चुनावों के करीब आने के साथ और अधिक से अधिक विशेषण एकत्रित करती प्रतीत होती है।

बात करने के लिए बहुत कम मुद्दे हैं, पिछले पूरे 4 वर्षों में भ्रष्टाचार का कोई मुद्दा सामने नहीं आया है और सरकार के कई महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलावों के चलते कोंसने का कोई मौका नहीं मिल रहा है, ऐसे में राहुल गाँधी और उनके दल-बल ने राफेल मुद्दे को एकल बिंदु एजेंडे के रूप में उठा रखा है। इसी के साथ, उन्होंने प्रधान मंत्री मोदी को व्यक्तिगत तौर पर लक्षित करने का फैसला कर लिया है क्योंकि उनका मानना है कि अगर वे मोदी को चोट पहुँचाते हैं, तो वे अपने आप भारतीय जनता पार्टी को भी चोट दे सकेंगे।

राफेल विमान खरीद पर राहुल गाँधी के तर्क उदात्त से हास्यास्पद हो रहे हैं। उनकी उकताहट भरी टिप्पणियों को शेष वरिष्ठ काँग्रेस नेता पूरी वफ़ादारी से तोता पढंत की तरह दुहरा रहे हैं, क्योंकि एक बार उनके “राजकुमार” ने बात कह दी, तो उनके पास उसके अनुपालन, दोहराव और बचाव के अलावा अन्य कोई विकल्प बचता नहीं है। वरिष्ठों के सामने लगाए गए आरोपों को सत्यापित करने का कोई ठोस मार्ग नहीं है, पर उनकी पूरी रणनीति किसी भी तरह मतदाताओं के दिमाग में संदेह के बीज बोने की है।

श्री गाँधी का विश्वास निश्चित रूप से इस दर्शन पर हैं कि वे यदि कोई आरोप लगाकर लंबे समय तक रोना-गाना करते हैं, कीचड़ उछालते हैं तो थोड़ा-बहुत कीचड़ तो ज़रूर चिपकेगा। उनका मानना है कि उनके अपने परिवार और पार्टी की ख़राब आर्थिक ख़्याति के चलते जहाँ उनका हर कदम कीचड़ में धँसा है, प्रधानमंत्री मोदी भी ऐसे बेतुके आरोपों से कलंकित हो सकते हैं। वे पहचानते हैं कि उनके और उनके परिवार को मुक्ति केवल तभी मिल सकती है, जब वे किसी भी तरह मतदाताओं को यह मनवा देते हैं कि मोदी और सत्तारूढ़ दल भी “भ्रष्ट” हैं!

विपक्षी पार्टियों में से अब लगभग मृत प्राय: सीपीआई (एम) को छोड़कर अन्य कोई भी इस मामले को उठाने का फैसला नहीं कर रहा है क्योंकि राहुल गाँधी के तर्क में किसी को भी कोई औचित्य नहीं दिख रहा है।

श्री गाँधी किसी पौराणिक अनुबंध की चीर-फाड़ करते रहते हैं कि यूपीए सरकार ऐसे कोई हस्ताक्षर करने की योजना बना रही थी लेकिन किए नहीं। वे यह तुलना इसलिए करते हैं कि मानो ऐसा कोई अनुबंध एनडीए सरकार द्वारा पहले से ही निष्पादित किया गया हो और उनकी सरकार ने उस पर काम किया था। उनसे सवाल पूछा जाना चाहिए कि यूपीए सरकार के 10 वर्षों में इस पर हस्ताक्षर क्यों नहीं हुए थे? क्या कांग्रेस इस सौदे से पैसे कमाना चाहती थी, जैसे बोफोर्स मामले में किया था लेकिन संतोषजनक सौदा करने में असमर्थ रहे थे?

विशेषज्ञों के तार्किक तर्कों का मतलब उनके लिए कुछ भी नहीं है। सरकार द्वारा विस्तृत स्पष्टीकरण प्रदान किए जा चुके हैं, लेकिन उन्हें राहुल गाँधी और उनके वफादार प्रवक्ताओं ने बड़ी तत्परता से खारिज कर दिया। श्री गाँधी मनमोहन सिंह की अगुवाई में अपनी ही सरकार द्वारा बनाए कानून को खत्म करने में लगे थे, तब उनसे सत्ताधारी पार्टी के शब्दों पर विश्वास करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है!

रक्षा मंत्री के वक्तव्य का मतलब उनके और उनकी पार्टी के लिए कुछ भी नहीं है। डेसॉल्ट के सीईओ श्री एरिक ट्रैपियर द्वारा दिए गए वक्तव्यों को धांधली माना जा रहा है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति के वक्तव्य को तज दिया गया है और प्रेरित बताकर परे कर दिया गया है। वे अपने आपके अलावा किसी पर भी विश्वास नहीं करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि कीमत पर चर्चा नहीं की जाएगी और श्री गाँधी ने अदालत के मजबूत प्रतिशोध से डरते हुए बुद्धिमानी दिखाकर इस मामले में चुप रहने का विकल्प चुना है और सम्माननीय न्यायालय के विचारों पर आक्षेप नहीं किया है।

उनके पास अनुभव और समझ की बेहद कमी है और वे किसी भी कीमत पर प्रधान मंत्री बनने की अपक्व महत्वाकांक्षा रखते हैं, इसका प्रदर्शन हो चुका है। राफेल के सभी ब्योरों का खुलासा पड़ोसी देशों के साथ करने में भी उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि उन्हें लगता है कि इस सौदे में कुछ तो ऐसा है जो शायद छिपाया गया है। फिर भले ही देश की सुरक्षा भाड़ में जाए।

श्री गाँधी बहुत ही हताश स्थिति में हैं। अपनी पार्टी की कमजोर स्थिति के चलते उन्हें चुनाव लड़ने के लिए विपक्षी नेताओं को साथ लेना होगा, पर वे महागठबंधन के नेतृत्व की चाहना करते हैं।

यदि काँग्रेस पार्टी तथाकथित महागठबंधन पर सवार होकर भी सत्ता में नहीं आती है, तो यह मानना मुश्किल नहीं होगा कि काँग्रेस पार्टी के अन्य सक्षम नेता उभरने लगेंगे और श्री गाँधी के नेतृत्व पर सवाल उठाएँगे। काँग्रेस का विघटन हो सकता है या नेताओं के अन्य समूह के साथ अहम पुनर्गठन का दौर चल सकता है।

काँग्रेस पार्टी अपने भीतर होने वाले इस तरह के विनाशकारी परिवर्तनों से परिचित है।

आखिरकार, श्री राहुल गाँधी की दादी श्रीमती इंदिरा गाँधी ने भी वर्ष 1969  में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस को विभाजित कर काँग्रेस (इंदिरा) के उस पार्टी के अग्रदूत का गठन किया था, जिसका नेतृत्व आज श्री गाँधी के पास है। मोरारजी देसाई, बाबू जगजीवन राम, पी.वी. नरसिम्हा राव और ऐसे ही तमाम अन्य लोगों के नाम अब कहाँ हैं, जिन्हें पार्टी से बाहर फेंक दिया गया और भूला दिया गया।

राहुल गाँधी लंबे समय से “भेड़िया आया-भेड़िया आया” चिल्ला रहे हैं और अब यह केवल कुछ समय की बात है, उसके बाद मतदाता उनकी किसी भी बात पर विश्वास करना बंद कर देंगे। जैसे कि पुरानी कहावत है, श्री गाँधी भी कुछ लोगों को हर बार मूर्ख बना सकते हैं या वे कुछ देर के लिए सभी लोगों को मूर्ख बना सकते हैं लेकिन वे निश्चित रूप से हर बार सभी को मूर्ख नहीं बना सकते!

श्रीमती सोनिया गाँधी ने हाल ही में जिस नेहरू विरासत की बात की थी क्या राहुल गाँधी उसकी आखिरी कड़ी है?

क्या राफेल की इस तरह की एक और कथा बन जाएगी जो कहे  “राजकुमार के पास पहनने के लिए कपड़े नहीं है”?

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लेखक कार्यकारी कोच और एंजेल निवेशक हैं। राजनीतिक समीक्षक के साथ वे गार्डियन फार्मेसीज के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। वे 6 बेस्ट सेलर पुस्तकों – रीबूट- Reboot. रीइंवेन्ट Reinvent. रीवाईर Rewire: 21वीं सदी में सेवानिवृत्ति का प्रबंधन, Managing Retirement in the 21st Century; द कॉर्नर ऑफ़िस, The Corner Office; एन आई फ़ार एन आई An Eye for an Eye; द बक स्टॉप्स हीयर- The Buck Stops Here – लर्निंग ऑफ़ अ # स्टार्टअप आंतरप्रेनर और Learnings of a #Startup Entrepreneur and द बक स्टॉप्स हीयर- माय जर्नी फ़्राम अ मैनेजर टू ऐन आंतरप्रेनर, The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. के लेखक हैं।

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Where is Rahul Gandhi and his Congress going with Rafale?

181116 Rahul and Rafale

What is driving Rahul Gandhi to stake everything, including possibly his political career on Rafale?

As a politician, I am sure he knows or has been advised that he must never put all his eggs in one basket. He has always been low on personal credibility with the electorate and his gaffes in Parliament and outside are constantly doing the rounds on social media. I would be surprised if he is not aware of this.

The stakes are very high for him personally in the coming State and Lok Sabha elections. The Congress has lost virtually every election under Rahul Gandhi’s leadership barring Karnataka where it had to support its coalition partner to form the Government and saty in power albeit with their partner as the leader of the coalition. Of course, the Congress party will present a completely different perspective on these losses and only speak about some of the bye-election wins.

Mr Gandhi is trying everything in the book from temple visits and soft Hindutva to identifying his “janeo dhari” self with the Hindu community to technology on the one hand and questioning every step the Government takes on the other. What is particularly surprising is his unparliamentary language which seems to be gathering more and more adjectives as the elections draw nearer.

With very few issues to speak about, no corruption issues at all over the past 4 years and faced with significant positives of the Government that he no way to counter, Rahul Gandhi and his band of merry men have picked up Rafale as their single point agenda. Coupled with this, they have decided to target Prime Minister Modi as a single individual because they believe if they hurt Mr Modi, they will hurt the Bhartiya Janata Party.

Rahul Gandhi’s arguments on the Rafale aircraft purchase are moving from the sublime to the ridiculous. His shrill comments are being loyally parroted by the senior Congress leaders because once their ”Prince” has spoken, they have no option but to comply, repeat and defend. They have nothing concrete to establish their allegations, but their entire strategy is to somehow, sow some seeds of doubt in the minds of the electorate.

Mr Gandhi certainly believes in the philosophy that if he shouts out an allegation crying himself hoarse long enough, some of the dirt may stick. He assumes that because of the financially dirty reputation of his own family and party, whereby he and his family have had a sticky finger in every pie, Prime Minister Modi can also be tarnished with such nonsensical allegations. He recognises that the only salvation for him and his family is to somehow convince the electorate that Mr Modi and the ruling party is “also corrupt”!

None of the other opposition parties, barring the now almost defunct CPI(M), have chosen to rake up this matter since no one sees any merit in Mr Rahul Gandhi’s argument.

Mr Gandhi keeps pulling out some mythical contract that the UPA Government was planning to sign but did not. He does this to compare what his Government may have done with a contract that has already been executed by the NDA Government. The question to ask is why this was not signed in 10 years of the UPA Government? Did the Congress want to make money from this deal, like they did with Bofors and were unable to close a satisfactory deal?

Logical arguments from experts mean nothing to him. Detailed explanations have been provided by the Government, but these are discarded very promptly by Rahul Gandhi and his loyal spokespersons. Mr Gandhi is used to tearing up legislation of his own Government led by Mr Manmohan Singh so how can he be expected to believe the words of the ruling party!

Statements by the Defence Minister mean nothing to him and his party. Statements by Mr Eric Trappier, the CEO of Dassault are deemed to be rigged. Statements from the French President are discarded and thrown away as motivated. He believes no one except himself.

The Supreme Court has taken a view that the price will not be discussed and Mr Gandhi, fearing a strong reprisal from the Court, has wisely chosen to stay silent on this matter and not cast aspersions on the views of the honourable Court.

His complete lack of experience and understanding coupled with his raw ambition to become the Prime Minister at any cost is on display. He has no worries about disclosing all details of Rafale to our neighbouring countries because he thinks there is something that maybe hidden in the deal. Security of the country be damned.

Mr Gandhi is in a very desperate position. He needs to get opposition leaders together to fight elections and despite the weak position of his own party, he wants to assume leadership of the mahagathbandhan.

If the Congress party does not come to power even after riding on the back of the so called mahagathbandhan, it would not be hard to assume that other competent leaders in the Congress party will start to emerge and question Mr Gandhi’s leadership. The Congress may disintegrate or go through a serious reorganisation under another set of leaders.

The Congress party is familiar with such cataclysmic changes within itself.

After all, Mrs Indira Gandhi, Mr Rahul Gandhi’s grandmother, split the Indian National Congress in 1969 and formed Congress (Indira) the precursor to the party that Mr Gandhi leads today. Where are the tall leaders like Morarji Desai, Babu Jagjivan Ram, PV Narasimha Rao and so many others who were thrown out of the party and forgotten.

Rahul Gandhi has cried “wolf-wolf” too long and it is only a matter of time before the electorate will stop believing anything he says. As the old saying goes, Mr Gandhi can fool some people all the time or he can fool all the people for some time but he certainly cannot fool all the people all the time!

Will Mr Rahul Gandhi be the last of the Nehru legacy that Mrs Sonia Gandhi recently spoke about?

Will Rafale become another celebrated story of the “Prince has no clothes”?

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The author is an Executive Coach and an Angel Investor. A keen political observer, he is also the founder Chairman of Guardian Pharmacies. He is the author of 6 best-selling books, The Brand Called You; Reboot. Reinvent. Rewire: Managing Retirement in the 21st Century; The Corner Office; An Eye for an Eye; The Buck Stops Here – Learnings of a #Startup Entrepreneur and The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur.

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