अंतरिक्ष – अंतिम सरहद, लक्ष्य शक्ति

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सैकड़ों सालों से इंसान यह सोचकर विस्मित होता रहा है कि अंतरिक्ष में चल क्या रहा है।

खगोलविद कई नए खगोलीय पिंडों की खोज कर यह समझने की कोशिश करते रहे हैं कि ब्रह्मांड कैसे बना है। ज्योतिषियों का अंतरिक्ष को देखने का अलग दृष्टिकोण है, वे आकाश में स्थित खगोलीय पिंडों की उस भूमिका की खोज करते आ रहे हैं जिसके चलते उनके होने से पृथ्वी ग्रह पर हमारे दैनिक जीवन पर असर पड़ता है। चाँद पर हजारों कविताएँ लिखी गई हैं। चाँद की पूजा-अर्चना की जाती है। चँद्रमा आधारित कैलेंडर का पालन हममें से कई लोग करते हैं। अज्ञात उड़न खटोले (यूएफओ), अंतरिक्ष गेलेक्टिक मूवीज और कार्टून और वह सब, जो अंतरिक्ष के साथ जुड़ा है, हमें हमेशा रोमांचित करता है।

लेकिन तब भी जब वर्ष 1969 में नील आर्मस्ट्रांग चाँद पर उतरे थे, क्या अंतरिक्ष के प्रति आधुनिक मानव की रुचि वास्तव में शांत हो पाई थी। उनका कहा प्रसिद्ध वाक्य “मनुष्य का एक छोटा कदम, मानव जाति का एक विशाल कदम ” संभवत: अंतरिक्ष से संबंधित विश्व का सबसे अधिक याद किया जाने वाला उद्धरण होगा। मुझे याद है मैंने माँ से वर्ष 1969 की करवा चौथ पर पूछा था कि क्या चाँद इसके बाद भी पहले की तरह ही पवित्र रहेगा जबकि उस व्यक्ति ने 16 जुलाई 1969 को उस पर कदम रखा था!

जब प्रधान मंत्री मोदी ने 27 मार्च 2019 को मिशन शक्ति के सफल परीक्षण के बारे में भारत की घोषणा की और संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के साथ चार के चुनिंदा क्लब में भारत को शामिल करवाया तो यह वास्तव में भारत का एक विशाल कदम था, अंतरिक्ष में हमारे अधिकारों और हमारी सीमाओं की रक्षा करने का।

हर सही सोच वाले भारतीय को इस पर बहुत गर्व होना चाहिए। मैं ऐसे किसी भी भारतीय से मिलने पर दंग हो जाऊँगा जो देश की सर्वोत्तम संभव सुरक्षा नहीं चाहता है या यह नहीं चाहता है कि भारत को सुपर पावर के रूप में उसका सही स्थान मिले। केवल वे ही इस तरह नहीं सोच पाएँगे जो इस सरकार द्वारा उठाए हर कदम को आगामी चुनाव के निकटवर्ती चश्मा पहन देख रहे हैं।

कई विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएँ चौंका देने वाली और आश्चर्यजनक थीं। इन लोगों ने प्रक्षेपण की लागत की तुलना हमारे देश की भूखमरी को कम करने से की और बड़े कुटील तरीके से सफल परीक्षण की घोषणा को विमुद्रीकरण से जोड़ दिया, विपक्षी राजनेता और इन राजनेताओं से सहानुभूति रखने वाले पत्रकारों ने अपनी किताब में ऐसा कोई भी नकारात्मक विशेषण नहीं छोड़ा, जिसका उपयोग वे सरकार द्वारा उठाए गए किसी कदम से तुलना करने के लिए कर सकें। “केवल 300 किलोमीटर” या “केवल एक उपग्रह” जैसी टिप्पणियों से इन व्यक्तियों ने अपनी पूर्ण अज्ञानता का ही प्रदर्शन किया।

फिर निश्चित रूप से ऐसे लोग भी हैं जो हमारे देश में उठाए गए हर सकारात्मक कदम का श्रेय भारत के “प्रथम परिवार” को देते हैं। ये हमारे पहले प्रधानमंत्री द्वारा किए गए भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और उनके द्वारा स्थापित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के बारे में बातें करने से कभी नहीं अघाते।

आइए हम समझने की कोशिश करते हैं कि मिशन (लक्ष्य) शक्ति हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है।

  1. वर्ष बीतने के साथ हमने अंतर्राष्ट्रीय समुद्र के क्षेत्रीय अधिकारों वाले देशों को स्वीकार करना सीखा है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा क्षेत्रीय समुद्र को तटीय राज्य की आधार रेखा से 12 समुद्री मील या 22.2 किलोमीटर के रूप में परिभाषित किया गया है। ऐसी कोई परिभाषा अंतरिक्ष के लिए मौजूद नहीं है और संयुक्त राष्ट्र ने यह भी निर्दिष्ट किया है कि कोई भी देश हमारे चंद्रमा और हमारे ग्रहों सहित किसी भी खगोलीय निकाय पर क्षेत्रीय अधिकारों का दावा नहीं कर सकता है।
  1. अंतरिक्ष का निरीक्षण संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाह्य अंतरिक्ष मामलों द्वारा किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र की बाह्य अंतरिक्ष संधि के अनुसार, उस पर हस्ताक्षर किए 102 देशों में से कोई भी देश चंद्रमा पर संप्रभुता का दावा नहीं कर सकता है। शुरुआती खोजकर्ताओं जैसे क्रिस्टोफर कोलंबस और आदि जिन्होंने सदियों उनका अनुसरण किया और अपने देशों के लिए नए महाद्वीपों और व्यापारिक ठिकानों और उपनिवेशों की स्थापना की। इसलिए, न केवल चंद्रमा पर बल्कि अब मंगल पर भी पहुँचने और वहाँ स्थापित होने की हौड़ लगी है।
  1. बहुत कम देशों ने उपग्रहों के निर्माण और प्रक्षेपण की क्षमता विकसित की है और भारत इन चुनिंदा देशों में से एक है। यहाँ तक कि केवल कुछ ही देशों ने मनुष्य को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता विकसित करने में कामयाबी हासिल की है और भारत इस क्षमता को भी तेजी से विकसित कर रहा है।
  1. निरंतर माँग रखने वाली मानव जाति के लिए अंतरिक्ष अगला मोर्चा है जहाँ लगातार अधिक चुनौतियों की तलाश है। भारत के लिए, अंतरिक्ष में अपनी उपस्थिति के प्रबंधन की मजबूत क्षमता विकसित करना महत्वपूर्ण है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन विश्व के प्रमुख अंतरिक्ष निकायों में से एक है।
  1. यह भी समझने योग्य है कि रॉकेट का विकास राष्ट्र की रक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है। रॉकेट को इस तरह समझा जा सकता है कि वह कुछ और न होकर एक विशाल “निर्देशित मिसाइल” है और यह तकनीक नाटकीय रूप से अपनी सीमाओं को मजबूत करने के लिए भारत के पास उपलब्ध है। मिशन शक्ति हमें भविष्य में दुष्ट उपग्रहों को लक्षित करने की बहुत आवश्यक क्षमता प्रदान करती है।
  1. जो पहले जीत लेगा उसे अंतरिक्ष बहुत बड़ी संपत्ति का वादा दे सकता है। यही कारण है कि एलोन मस्क और रिचर्ड ब्रैनसन बड़ी रकम का निवेश कर रहे हैं। यदि कोई किन्हीं खगोलीय पिंडों तक पहुँचने और वहाँ से पृथ्वी पर लौटने का किफायती तरीका विकसित कर सकता है, तो उन अविश्वसनीय खनन अवसरों के बारे में सोचिए जिन्हें उत्पन्न किया जा सकता है। ये व्यवसायी पहले से ही अंतरिक्ष में मानव बस्तियाँ बसाने की बात कर रहे हैं और ऐसे व्यक्तियों की लंबी कतार है जो मंगल की “एक-तरफ़ा” यात्रा करने के लिए तैयार है।

अंतरिक्ष की खोज करना महँगी प्रक्रिया है जो बहुत अधिक जोखिमों से भी भरी है। चुनाव के संदर्भ में निंदनीय प्रतिक्रियाएँ समझ में आती हैं, लेकिन अंतरिक्ष की खोज की लागत के साथ हमारे ग्रह पर भोजन और आवास की उपलब्धता से उसकी तुलना करना अल्पकालिक और पूरी तरह से संदर्भ रहित है।

अपने अपोलो कार्यक्रम के कुछ असफल प्रक्षेपणों के बाद नासा ने अपना अधिकांश धन खो दिया? राष्ट्रपति ओबामा ने विफलता के डर से नासा का वित्त पोषण कम कर दिया। राष्ट्रपति ट्रम्प ने नासा को फिर से मजबूत किया है और 2024 तक अंतरिक्ष यात्रियों को चाँद पर वापस भेजे जाने का आह्वान किया है।

राष्ट्र ने अंतरिक्ष में हमारे अधिकारों की रक्षा की नई क्षमता विकसित की है और हमें इस पर गर्व होना चाहिए। हमेशा सत्ता में जिसकी सरकार होगी, श्रेय उसे ही जाएगा और विपक्षी नेताओं के पास इस कठोर वास्तविकता को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

अंतरिक्ष अनुसंधान में निवेश करना महँगा है। पर यह हमारा भविष्य है और इसके लिए बहुत सरकारी धन की आवश्यकता लाज़मी भी है।

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए सरकार की इच्छा शक्ति की आवश्यकता होगी ताकि उसमें उचित निवेश हो। मिशन शक्ति, चँद्रमा और मंगल पर हमारे मिशन, निम्न पृथ्वी कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट-एलईओ) और भू स्थैतिक कक्षा (जियो स्टेशनरी ऑर्बिट- जीईओ) की हमारी सफल प्रक्षेपण क्षमताएँ अंतरिक्ष में बढ़ती उपस्थिति का प्रबंधन करने की हमारी क्षमताओं को दर्शाती हैं। हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के पास ज्ञान और अनुभव है और हमारे हितों की चरम सीमा तक का पता लगा सकते हैं।

केवल कोई मजबूत सरकार ही हमारे अतिआवश्यक अंतरिक्ष कार्यक्रम का समर्थन कर उसके लिए आवश्यक वित्त पोषण जारी रख सकती है।

ऐसी सरकार को हमारे समर्थन की ज़रूरत है।

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लेखक कार्यकारी कोच और एंजेल निवेशक हैं। राजनीतिक समीक्षक और टीकाकार के साथ वे गार्डियन फार्मेसीज के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। वे 6 बेस्ट सेलर पुस्तकों – द ब्रांड कॉल्ड यू- The Brand Called You रीबूट- Reboot. रीइंवेन्ट Reinvent. रीवाईर Rewire: 21वीं सदी में सेवानिवृत्ति का प्रबंधन, Managing Retirement in the 21st Century; द कॉर्नर ऑफ़िस, The Corner Office; एन आई फ़ार एन आई An Eye for an Eye; द बक स्टॉप्स हीयर- The Buck Stops Here – लर्निंग ऑफ़ अ # स्टार्टअप आंतरप्रेनर और Learnings of a #Startup Entrepreneur and द बक स्टॉप्स हीयर- माय जर्नी फ़्राम अ मैनेजर टू ऐन आंतरप्रेनर, The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. के लेखक हैं।

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Space – The Last Frontier. Mission Shakti.

190328 Mission Shakti

For hundreds of years human beings have wondered on what is going on in space.

Astronomers have searched for new celestial bodies and tried to understand what created the universe. Astrologers have looked at space from different perspectives in their search for the role celestial bodies play in managing our daily lives on planet Earth. Thousands of poems have been written about the moon. Prayers are offered to the moon. Lunar calendars govern the lives of many us. Unidentified Flying Objects (UFO’s), Inter galactic movies and cartoons and everything to do with space has always fascinated us.

Yet it is only when Neil Armstrong landed on the moon in 1969 did modern man’s interest in space truly get piqued. His famous line “One small step for man. One giant step for mankind.” would probably be the most remembered quote in the World relating to space. I remember asking my mother on Karwa Chauth in 1969 whether the moon would continue to be as holy as before now that man had stepped on it on 16th July 1969!

When Prime Minister Modi made the announcement of India of Mission Shakti on 27th March 2019 about the successful test of A-Sat that put India in the select club of four with United States, Russia and China, this was indeed a giant step for India in protecting our rights and our borders in space.

This should make every right-thinking Indian very proud. I would be surprised to meet any Indian who does not want the best possible security or does not want India to join her rightful place as a super power. Unless of course they are looking at every step taken by this Government through the myopic lens of the forthcoming elections.

The reactions from several opposition leaders were amusing and surprising. From comparing the cost of the launch to the impact on alleviating hunger in our country and from cynically comparing the announcement of A-Sat to that of demonetisation, the opposition politicians and the journalists who sympathise with these politicians did not leave any negative adjective in the book that they could find to counter the step taken by the Government. Comments like “only 300 kilometers” to “only one satellite” demonstrated the complete ignorance of these individuals.

Then of course there are a set of people who credit every positive step taken in our country to the “first family” of India. These people could not stop talking about India’s space programme and the Indian Institutes of Technology set up by our first Prime Minister.

Let us understand why Mission Shakti is important for us.

  1. Over the years we have learned to accept the territorial rights nations have in the international waters. Territorial sea is defined by the United Nations as 12 nautical miles or 22.2 kilometers from the baseline of a coastal state. No such definition exists in space and the United Nations has also specified that no nation can claim territorial rights on any celestial body including our moon and our planets.
  1. Space is overseen by the United Nations Office for Outer Space Affairs. According to the United Nations Outer Space Treaty, signed by every 102 countries, no nation can claim sovereignty over the Moon. Early explorers like Christopher Columbus and others who followed him over the centuries discovered new continents and established trading bases and colonies for their countries. Therefore, there is a race to reach and establish a presence not just on the moon but now Mars as well.
  1. Very few nations have developed the capability of building and launching satellites and India is one of these select countries. Even fewer countries have managed to develop the capability of putting a human being in space and India is fast developing this capability as well.
  1. Space is the next frontier for an ever-demanding human race that is constantly looking for more challenges. For India, it is critical to develop a strong capability of managing our presence in space. The Indian Space Research Organisation is one of the premier space bodies in the World.
  1. It is also worth understanding why developing rockets is important to the defence of a nation. A rocket is nothing more that a huge “guided missile” and this technology is available to India to fortify its borders dramatically. Mission Shakti gives us this much needed capability of targeting rogue satellites in the future.
  1. Space could also promise huge wealth to the people who conquer it first. This is the reason why Elon Musk and Richard Branson are investing large sums of money. If anyone can develop an economical way to reach some celestial bodies and return to Earth, think of the incredible mining opportunities that can be created. These businessmen are already talking of creating human colonies in space and there is a queue of individuals who are willing to take a “one-way” trip to Mars.

Exploration of space is an expensive process fraught with very high risks. Cynical reactions are understandable in the context of the elections but comparing the cost of space exploration to food and housing on our planet is short sighted and completely out of context.

NASA lost most of its funding after a few failed launches of its Apollo programme? President Obama reduced funding to NASA because of the fear the fallout of a failure. President Trump has reinvigorated NASA and has called for Astronauts being sent back to the moon by 2024.

The nation has developed a new capability to defend our rights in space and we must be proud of this. The credit will always go to the Government in power and opposition leaders have no choice but to accept this harsh reality.

Investing in space research is expensive. It is the future and deserves It needs a lot of Government funding.

More importantly, space research needs Government will so that its fair share of investment. Mission Shakti, our missions to the moon and Mars, our successful launch capabilities to low earth orbit (LEO) and to geo stationary orbit (GEO) show our capabilities to manage our growing presence in space. Our space scientists have the knowledge and the experience and can explore the last frontier to our advantage.

Only a strong Government can continue to support and fund our much-needed space programme.

Such a Government needs our support.

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The author is an Executive Coach and an Angel Investor. A keen political observer and commentator, he is also the founder Chairman of Guardian Pharmacies. He is the author of 6 best-selling books, The Brand Called You; Reboot. Reinvent. Rewire: Managing Retirement in the 21st Century; The Corner Office; An Eye for an Eye; The Buck Stops Here – Learnings of a #Startup Entrepreneur and The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. 

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12 कारण जिनसे मोदी 2019 में फिर से पीएम बनेंगे

190314 Elections 2019

चुनावी बिगुल बज चुका है और मोदी सरकार की तमाम उपलब्धियों के बारे में पहले ही लिखा जा चुका है। श्री मोदी अपने पहले पाँच साल के कार्यकाल में जिन कामों को पूरा नहीं कर पाए हैं, उनके बारे में भी बहुत कुछ लिखा गया है।

औसत भारतीय मतदाता मुख्य रूप से जो प्राप्त करना चाहता है, वह है :

  1. साफ-सुथरा प्रशासन, क्योंकि हम गैर-भाजपाई सरकारों के चलते पिछले 70 वर्षों में भ्रष्टाचार की पराकोटी की अधिकता से बहुत नाराज और निराश हैं।
  1. देश का मजबूत आर्थिक विकास जिससे धन वृद्धि और रोजगार का सृजन होगा।
  1. सुरक्षित वातावरण जहाँ हम लगातार खतरों की आशंका के बिना रह सकें कि कहीं कोई हमें और हमारे परिवारों को शारीरिक रूप से नुकसान तो नहीं पहुंचा देगा। हम अपने कंधों को बिना भय के देखना चाहते हैं। क्या अब हम फिर मेज और कुर्सियों के नीचे अज्ञात बैग के डर को देखना चाहते हैं।
  1. जीवन की सभी आवश्यकताओं के साथ स्वच्छ वातावरण ताकि हम अपने परिवारों के साथ सामान्य जीवन जी सकें।

आइए हम उन कारणों की पड़ताल और जाँच करें जिसकी वजह से मेरा यह मानना है कि न केवल मोदी को सत्ता में वापस आना चाहिए, बल्कि मुझे विश्वास है कि मतदाताओं के मतों से वे ही सत्ता में वापस आएँगे।

  1. सकारात्मक रिपोर्ट कार्ड: पिछले चुनावों के दौरान 2014 में श्री मोदी ने वादा किया था कि वे 2019 में अपने रिपोर्ट कार्ड के साथ निर्वाचन क्षेत्र में वापस आएँगे। पहले पाँच साल के कार्यकाल की उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। कुल मिलाकर मतदाता श्री मोदी के शासन और भारत के लिए उनके द्वारा निर्धारित की गई दिशा से संतुष्ट है। विपक्षी नेताओं में से कुछ को छोड़ दें तो और कोई भी एक कार्यकाल में किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं करता है।
  1. अर्थव्यवस्था: भारत अब दुनिया की छठी सबसे बड़ी और क्रय शक्ति समानता के मामले में दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इससे भी महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि श्री मोदी भारत को अगले दशक में त्वरित वृद्धि की राह पर ले आए हैं। यहाँ ऐसा नेता है जो हर संभव सभी मजबूत निर्णय लेने से नहीं हिचकिचाया है, चाहे वे अर्थव्यवस्था से संबंधित हों या मौलिक संहिता सुधार हो जैसे कि दिवालियापन कोड।
  1. स्वच्छ सरकार: श्री मोदी ने उन्हें धमकाने वालों के दिमाग में भी स्पष्ट रूप से स्थापित कर दिया है कि वे बहुत साफ हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास किया है कि उनकी सरकार में कोई भ्रष्टाचार न हो। पिछले पाँच वर्षों में छोटा- बड़ा कोई घोटाला नहीं हुआ है। हममें से ज्यादातर लोग उसके लिए भी भुगतान करने के आदी हैं, जो अमूमनन हमारे अधिकार हैं। ड्राइविंग लाइसेंस या नया पासपोर्ट प्राप्त करना हमारी सरल आवश्यकताएँ हैं, जिसके लिए भी हम दलालों की तलाश करते थे। अब यह पूरी तरह से बंद हो गया है।
  1. भारतीय पासपोर्ट: स्पष्ट रूप से 30 साल पहले की तुलना में भारतीय पासपोर्ट आज अधिक सम्मानित है। मैं यह कह रहा हूँ दुनिया भर में यात्रा करने वाले अपने पिछले चार दशकों के काफी व्यक्तिगत अनुभव के साथ। इससे पहले, भारतीय पासपोर्ट को दुनिया भर के आव्रजन अधिकारियों द्वारा स्वेच्छा से और इतने सारे सवालों के बिना लिया नहीं जाता था। 
  1. विदेश नीति: भारत अब राष्ट्र मंडल में कद्दावर हुआ है। भारत पाकिस्तान को छोड़कर सभी पड़ोसी राज्यों के साथ बहुत अच्छे संबंध विकसित करने में कामयाब रहा है। साथ ही भारत संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस, ईरान और इजरायल के साथ-साथ चीन के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाए रखने में सफल रहा है। ईरान पर प्रतिबंध लगाते हुए भी संयुक्त राज्य अमेरिका भारत को उनसे तेल खरीदना जारी रखने के लिए सहमत हुआ। एयर इंडिया अब सऊदी अरब से इजरायल के लिए उड़ान भर सकता है और जब श्री मोदी ने जॉर्डन से फिलिस्तीन के लिए उड़ान भरी, तो इजरायली विमान ने उन्हें सुरक्षा प्रदान की। 
  1. महागठबंधन: स्पष्ट रूप से महागठबंधन काम नहीं कर रहा है। निश्चित रूप से उस तरीके से नहीं जिस तरह राहुल गाँधी ने उनसे एक और सभी के नेता के रूप में ताज पहनवाया था। क्षेत्रीय नेताओं के इस अभिप्रेरक समूह के किसी भी घटक के पास कोई सामान्य न्यूनतम कार्यक्रम नहीं है और न ही वे ऐसे किन्हीं मूल्यों के समान सेट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसे वे मतदाताओं के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं। महागठबंधन के युद्धरत नेता जली-कटी बातें करते हुए अपना असली रंग दिखा रहे हैं। वे एक ही सांस में अपने गठबंधन सहयोगियों की आलोचना भी कर रहे हैं और प्रशंसा भी। उनका एकमात्र एकल बिंदु एजेंडा श्री मोदी को हटाना भर है। विपक्षी नेताओं ने खुले तौर पर कहा है कि लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन हो सकता है लेकिन प्रादेशिक चुनावों के लिए नहीं। ये राजनीतिक दल जितना समझते हैं, उससे कहीं अधिक भारतीय मतदाता होशियार है। क्या वे वास्तव में सोचते हैं कि हम मतदाता इतने मूर्ख हैं? 
  1. राहुल गाँधी: श्री गाँधी ऐसा कुछ भी करने में सक्षम नहीं हैं जिसका कुछ नतीजा निकले और तब भी वे यह मानना चाहते हैं कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में उनकी जीत केवल उनके खाते में थी, लेकिन अगर कोई चुनावी मतदानों को देखें तो वह संख्या कुछ अलग कहानी कहती है। श्री गाँधी ने भारत के लिए किसी भी स्पष्ट दृष्टिकोण या मार्ग की घोषणा नहीं की है। उनके पास अपने पूर्ववर्तियों की उपलब्धियों के राग आलापने के अलावा कुछ भी सकारात्मक नहीं है। वे बस राफेल सौदे पर भरोसा करते हैं और उम्मीद रखते हैं कि कुछ भ्रष्टाचार के आरोप श्री मोदी पर लग सकेंगे। जबकि कोई उन पर विश्वास नहीं करता। वे न केवल मतदाताओं के लिए बल्कि उनकी पार्टी के अधिकांश सदस्यों के लिए भी हँसी के पात्र बनते जा रहे हैं। 
  1. हिंदी केंद्रीय स्थल: हिंदी के केंद्रीय स्थलों का दिल अभी भी श्री मोदी के साथ हैं। हाँ, उन्होंने तीन राज्यों में भाजपा को मतदान कर बाहर कर दिया, लेकिन जब राष्ट्रीय चुनाव होंगे, तो वे बाहर आएँगे और श्री मोदी के लिए बहुत बड़ी संख्या में मतदान करेंगे, जो स्पष्ट रूप से आज देश के सबसे बड़े नेता हैं। बड़ी संख्या में मतदाताओं के मन में राम मंदिर एक बड़ा मुद्दा है, यही वजह है कि श्री गाँधी के वफादार प्रवक्ताओं ने यह नारा लगाना शुरू कर दिया है कि केवल काँग्रेस ही मंदिर का निर्माण कर सकती है। जब मंदिर की बात आती है, तो सभी जानते हैं कि केवल भाजपा ही अपने तार्किक निष्कर्ष के माध्यम से इसे देख सकती है। 
  1. आधारभूत संरचना: भारत के बुनियादी ढाँचे में दृश्यमान सुधार दिखता है। नई सड़कों के निर्माण से लेकर हवाई अड्डों तक और बिजली की बेहतर आपूर्ति से लेकर सुपर-फास्ट ट्रेनों तक, सबके लिए बेहतर बुनियादी ढाँचे की दिशा का रास्ता दिख रहा है। वर्ष 2014 से पहले, हमने अपने दैनिक जीवन के एक हिस्से के रूप में “लोड शेडिंग” को शामिल कर लिया था। जो अब बंद हो गया है। मतदाता का मानना है कि अभी और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है और श्री मोदी ने जो शुरू किया उसे पूरा करने के लिए वे उन्हें समय देने को तैयार हैं। 
  1. आतंक पर सख्त: चुनाव आयोग ने अनुमान लगाया है कि 80 मिलियन से अधिक नए मतदाता हैं जो वर्ष 2019 में पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। उनका अयोध्या या राम मंदिर से कोई सीधा संबंध नहीं है, लेकिन इन मिलियनों को श्री मोदी में एक ऐसा नेता दिखाई देता है, जिसमें साहस है, जो तेजी पलटवार और कठोर वार करता है। वे उनकी जीवनशैली में समग्र सुधार देखते हैं, और वे भारत के प्रति वैश्विक दृष्टिकोण में परिवर्तन भी देख पा रहे हैं। यही वह है जो उन्हें चुनाव के दिन “कमल” के प्रति प्रेरित करेगा। 
  1. पुलवामा और बालाकोट: हालाँकि किसी को भी राष्ट्रीय सुरक्षा और सशस्त्र बलों का उपयोग राजनीतिक हितों के लिए नहीं करना चाहिए, पर पुलवामा हमले और बालाकोट हवाई हमले की वास्तविकता सभी को दिख रही है। अगर विपक्ष ने श्री मोदी के 56 इंच के सीने की बात करते हुए पुलवामा हमले के बाद अपनी नाक नहीं घुसाई होती तो उन्हें हवाई हमले के बाद अपनी नाक नहीं कटवानी पड़ती। यह स्पष्ट रूप से मतदान के दिन मतदाता के दिमाग में होगा। 
  1. ग्रामीण अर्थव्यवस्था: हालाँकि विपक्षी दल चाहेंगे कि हम कुछ और विश्वास करें अन्यथा, तेजी से आगे बढ़ने वाली उपभोक्ता वस्तुओं की कंपनियों और ऑटोमोबाइल कंपनियों के आँकड़े ग्रामीण भारत में अपनी बिक्री में उल्लेखनीय सुधार दिखाते हैं। तीव्र तनाव होने पर यह संभव नहीं हो सकता था। यदि कुछ है तो वह यह कि श्री मोदी ने गरीबों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। हाँ, ग्रामीण भारत में और काम किए जाने की जरूरत है।

पिछले कुछ महीनों में एक नई हवा आई है जो भारतीय जनता पार्टी में बड़ी उम्मीदें भर रही है और यह पार्टी नए सिरे से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है। सहयोगी दल वापस आ रहे हैं और विपक्षी दलों के नेता भाजपा में शामिल हो रहे हैं।

यहाँ तक कि सबसे कड़े विपक्षी समर्थकों को पता है कि कई विपक्षी दलों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे विकल्प के बारे में न के बराबर कुछ कहना तक भयावह है। वे हर महीने, जैसे ही संगीत बंद हो जाए,नए संगीत के साथ प्रधानमंत्री की स्थिति के लिए संगीत कुर्सी के खेल की कल्पना नहीं कर सकते!

मतदाता, जो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का बटन दबाने के साथ अंतिम निर्णय लेंगे, वे जानते हैं कि वे मोदी को चुनाव हारने नहीं दे सकते।

अभी तो इससे भी अच्छा होना बाकी है।

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लेखक कार्यकारी कोच और एंजेल निवेशक हैं। राजनीतिक समीक्षक और टीकाकार के साथ वे गार्डियन फार्मेसीज के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। वे 6 बेस्ट सेलर पुस्तकों – द ब्रांड कॉल्ड यू- The Brand Called You रीबूट- Reboot. रीइंवेन्ट Reinvent. रीवाईर Rewire: 21वीं सदी में सेवानिवृत्ति का प्रबंधन, Managing Retirement in the 21st Century; द कॉर्नर ऑफ़िस, The Corner Office; एन आई फ़ार एन आई An Eye for an Eye; द बक स्टॉप्स हीयर- The Buck Stops Here – लर्निंग ऑफ़ अ # स्टार्टअप आंतरप्रेनर और Learnings of a #Startup Entrepreneur and द बक स्टॉप्स हीयर- माय जर्नी फ़्राम अ मैनेजर टू ऐन आंतरप्रेनर, The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. के लेखक हैं। 

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  • अनुवादक- स्वरांगी साने – अनुवादक होने के साथ कवि, पत्रकार, कथक नृत्यांगना, साहित्य-संस्कृति-कला समीक्षक, भारतीय भाषाओं के काव्य के ऑनलाइन विश्वकोष-कविता कोश में रचनाएँ शामिल। दो काव्य संग्रह- काव्य संग्रह “शहर की छोटी-सी छत पर” मध्य प्रदेश साहित्य परिषद, भोपाल द्वारा स्वीकृत अनुदान से प्रकाशित और काव्य संग्रह “वह हँसती बहुत है” महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई द्वारा द्वारा स्वीकृत अनुदान से प्रकाशित।

12 Reasons why Mr Modi will be PM again in 2019

190314 Elections 2019

The elections are around the corner and much has been written already on all the achievements of the Modi government. A lot has also been written about all that Mr Modi has not been able to complete in his first five-year term.

The average Indian voter is primarily interested in getting:

  1. A clean administration since we have been angered and frustrated with the incredible amount of corruption that has been seen over the last 70 years in various non-BJP governments.
  1. Strong economic growth of the country which will lead to wealth creation and job creation.
  1. A secure environment without constantly having to look for potential threats that could physically harm us and our families. We do not want to keep looking over our shoulders. Now do we want to keep looking under tables and chairs for unidentified bags.
  1. A clean environment with all the necessities of life so that we can live normal lives with our families.

Let us explore and examine the reasons why I believe not only why Mr Modi should be voted back to power but why I believe he will be voted back to power.

  1. Positive Report card: During the last elections in 2014 Mr Modi had promised that he would come back to the electorate in 2019 with his report card. A lot has been written about the significant achievements in the first five-year term. In overall terms, the electorate is satisfied with Mr Modi’s governance and the direction he has set for India. No one, barring some of the opposition leaders, expected miracles within one term.
  1. Economy: India is now the sixth largest economy in the world and the second largest in terms of purchasing power parity. The more important fact is that Mr Modi has put India on the track for quick growth in the next decade. Here is a leader who has not hesitated to take the strongest possible decisions whether they relate to the economy or to make fundamental course corrections such as the bankruptcy code.
  1. Clean Government: Mr Modi has clearly established even in the minds of his deterrents that he is squeaky clean. He has made every possible effort to make sure that there is no corruption in his government. There has been no major or minor scam in the past five years. Most of us have been used to paying for what is normally our right. These are simple necessities like getting our driving licence or getting a new passport where we used to look for touts. This has stopped completely.
  1. Indian Passport: The Indian passport is clearly far more respected today than it was 30 years ago. I say this with considerable personal experience having travelled around the World over the last four decades. Never before, has the Indian passport been received so willingly and without so many questions by immigration officials around the world.
  1. Foreign policy: India now stands tall in the comity of nations. India has managed to develop extremely good relationships with all neighbouring states barring Pakistan. At the same time India has managed to keep strong independent relationships with USA and Russia, Iran and Israel as well as a grudging economic relationship with China. While putting an embargo on Iran, the United States agreed to let India continue buying oil from them. Air India can now fly over Saudi Arabia to Israel and when Mr Modi flew from Jordan to Palestine, Israeli aircraft provided him security.
  1. Mahagathbandhan: The mahagathbandhan clearly is not working. Certainly not in the manner that Rahul Gandhi had envisaged with him being crowned as the leader by one and all. None of the constituents of this motley group of regional leaders have any common minimum programme nor do they represent a similar set of values that they can present to the electorate. The warring mahagathbandhan leaders are showing their true colours as they keep talking with forked tongues. Criticising and praising their alliance partners in the same breath. All that they have is a single point agenda of removing Mr Modi. Opposition leaders openly state that an alliance maybe possible for the Lok Sabha elections but not for the State elections. The Indian electorate is much smarter than what these political parties would like to believe.  Do they really think that we voters are so stupid?
  1. Rahul Gandhi: Mr Gandhi has not been able to deliver anything of consequence and though he would like to believe that his victory in the states of Rajasthan Madhya Pradesh and Chhattisgarh was only on account of him, if one looks at the electoral votes cast the numbers tell a different story. Mr Gandhi has not announced any clear vision or path for India. He has nothing positive to say except harp on the achievements of his predecessors. He simply raves and rants on the Rafale deal hoping that some corruption charges will stick to Mr Modi. No one believes him. He is becoming a laughing stock for not only the electorate but most of his party members as well.
  1. Hindi Heartland: The Hindi heartland clearly still has its heart with Mr Modi. Yes, they voted the BJP out in three states but when it comes to national elections, they will go out and vote in very large numbers for Mr Modi who is clearly the tallest leader in the country today. The Ram Mandir is a big issue in the minds of a significant number of voters which is why Mr Gandhi’s loyal spokespersons have started to chant the slogan that only the Congress can build the temple. When it comes to the temple, everyone knows that only the BJP can see this through to its logical conclusion.
  1. Infrastructure: There is visible improvement in India’s infrastructure. From building new roads to airports and from significantly improved power supply to super-fast trains, the path towards improved infrastructure is there for everyone to see. Prior to 2014, we had taken “load shedding” as a part of our daily lives. This has now stopped. The voter believes that much more needs to be done and is willing to give time to Mr Modi to complete what he started.
  1. Tough on Terror: The Election Commission has estimated that there are over 80 million new voters who will exercise their franchise for the first time in 2019. They have no links to Ayodhya or the Ram Temple but in Mr Modi, these millennials see a leader who has the courage to hit back fast and hit back hard. They see an overall improvement in their lifestyle, and they can see the visible change in global attitude towards India. This is what will guide them to the “lotus” on election day.
  1. Pulwama and Balakote: While no one should use National Security and the Armed Forces for meeting political ends, the reality of the Pulwama attack and the Balakote air strike are there for everyone to see. If the opposition had not put their foot in their mouth talking of Mr Modi’s 56 inch chest after the Pulwama attack, they would not have had to grind their nose in the dust after the air strikes. This will clearly be in the minds of the voter on polling day.
  1. Rural Economy: Though the opposition parties would like us to believe otherwise, the figures of the fast-moving consumer goods companies and the automobile companies show a significant improvement in their sales in Rural India. This could not have been possible if there was acute stress. If anything, Mr Modi has focussed his attention on the poor. Yes, more needs to be done for Rural India and it is being done.

Over the past few months there is a new wind that is filling the big sails of the Bhartiya Janata Party and it is forging ahead with renewed confidence. Allies are coming back to the party and leaders from opposition parties are joining the BJP.

Even the most hardened opposition supporters know that the alternatives being presented by the multiple opposition parties are frightening to say the least. They cannot visualize a musical chairs like situation for the position of the Prime Minister with a new incumbent every few months when the music stops!

The voters, who will take the final decision when they press the button of the Electronic Voting Machine know that they cannot let Mr Modi lose the election.

The best is yet to come.

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The author is an Executive Coach and an Angel Investor. A keen political observer and commentator, he is also the founder Chairman of Guardian Pharmacies. He is the author of 6 best-selling books, The Brand Called You; Reboot. Reinvent. Rewire: Managing Retirement in the 21st Century; The Corner Office; An Eye for an Eye; The Buck Stops Here – Learnings of a #Startup Entrepreneur and The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur.

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पाकिस्तान – अब आगे क्या

 

190303 Pakistan terrorism map

 विंग कमांडर अभिनंदन वापस आ गए हैं। पाकिस्तानी एफ़ 16 गिरा दिया गया और एक पायलट की मौत हो गई। पुलवामा का बदला जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) के आतंकवादी शिविरों का विनाश कर ले लिया गया है। और अब हमारे देश के वे लोग जो क्षमा की प्रार्थना करते रहते हैं वे फिर से तत्काल शांति वार्ता शुरू करने की उत्कंठा लिए बैठ गए हैं।

पाकिस्तान कहाँ है – भारत के संबंध प्रगाड़ हो रहे हैं और ऐसे में पाकिस्तान के लिए आगे क्या बदा है?

पुलवामा हमलों के बाद पूरा देश निराशा और गर्त में डूब गया था और सभी के मन में बदला लेने का भाव था। कुछ ही दिन बीते थे कि विपक्षी नेताओं ने व्यंग्यात्मक टिप्पणियाँ करनी शुरू कर दी थीं। बारह दिनों बाद भारतीय वायु सेना ने कड़ी टक्कर दी और पाकिस्तान में घुसकर उसके जैश-ए-मोहम्मद के तीन प्रशिक्षण शिविरों को नष्ट कर दिया और जिन 300 से 400 आतंकवादियों को वहाँ प्रशिक्षित किया जा रहा था, उन्हें तक मार गिराया। मारे गए आतंकवादियों में संगठन के 25 नेता भी शामिल थे। इस ओर ध्यान देना दिलचस्प होगा कि वे मुख्य रूप से अजहर मसूद के “पारिवारिक” सदस्य थे जो नेतृत्व के पदों पर थे (यहाँ इसका दूसरा और कोई अर्थ नहीं है)!

इस हमले की पूरे देश में सराहना हुई। यह भी आश्चर्यजनक था कि हर विपक्षी नेता भारतीय वायु सेना को बधाई दे रहा था, जो वास्तव में उसकी हक़दार भी थी, लेकिन इनमें से किसी भी राजनेता ने प्रधानमंत्री द्वारा लिए गए मजबूत निर्णय को स्वीकार नहीं किया। तिस पर विडंबना यह है कि हमलों के बारे में इतना शोर करने के बाद, ये राजनीतिक दल अब भारतीय वायुसेना की कार्रवाई का राजनीतिकरण करने के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

उसके अगले दिन पाकिस्तानी एफ़ 16 लड़ाकू जेट विमानों ने भारतीय आकाशी क्षेत्र (इंडियन एयर स्पेस) में प्रवेश करने की कोशिश की और जिन्हें हमारे जाँबाजों ने आगे बढ़ने से रोक दिया। इनमें से एक आधुनिक जेट को विंग कमांडर अभिनंदन ने ध्वस्त कर दिया, जिसे उन्होंने बंदी बना लिया। जिनेवा सम्मेलन में तय मसौदों के तहत और बहुत सारे कूटनीतिक और राजनीतिक पैंतरे अपनाए जाने के बाद उन्हें युद्ध नायक के रूप में छोड़ दिया गया।

तो अचानक ऐसा क्या हुआ कि प्रेस के कुछ लोग दूसरी बाजू हो गए?

इमरान खान कैसे राजनयिक कूटनीतिज्ञ बन गए और क्या हुआ कि हमारे कई पत्रकार और विपक्षी राजनेता पाकिस्तान को इतना श्रेय देने लगे।

  1. यह मुझे हैरत में डाल देता है कि प्रेस के कुछ वर्गों ने यह टिप्पणी करना शुरू कर दी है कि युद्ध क्यों कभी कोई जवाब नहीं होता है। विपत्तियों के अमानवीय पुलिंदे से कोई कैसे इनकार कर सकता है। और तब जब आप देखते हैं कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा कितने ही वर्षों से हमारे देश को कितनी चोट पहुँचाई गई है, तो क्या ये पत्रकार हमें पीछे खींचने और यथास्थिति में वापस जाने की बात कर सकते हैं?
  1. कुछ पत्रकार सवाल कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री अपने सामान्य कार्य दिवसों में कैसे लौट गए। पर उन्हें क्यों नहीं लौटना चाहिए? मुझे यकीन है कि वे हर स्थिति का बारीकी से जायजा ले रहे हैं और उनके पास उत्कृष्ट नेताओं की टीम है जो इस मामले को अधिक मुस्तैदी से सीधे तौर पर संभाल रही है। यदि प्रधानमंत्री इसी मामले पर सारा समय लगा देते तो यहीं पत्रकार उनसे ऐसा पूछते हुए देखे जा सकते थे कि वे वैसा क्यों कर रहे हैं!
  1. कुछ पत्रकार पूछ रहे हैं कि क्या भारत के पास कोई रक्षा मंत्री है? मैं इस टिप्पणी को नहीं समझ पा रहा था। रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के अलावा, तीनों सेनाओं के प्रमुखों से मिलकर बना दल है और यह वही कोर टीम है जिसे प्रधान मंत्री की प्रत्यक्ष देखरेख में हर मुद्दे को विस्तार से संभालना होता है।
  1. कुछ राजनेता हड़कंप मचा रहे हैं कि प्रधान मंत्री द्वारा सभी राजनीतिक गतिविधियों को रोका जाना चाहिए। क्या उन लोगों ने अपनी तरफ से सारी राजनीतिक गतिविधियों को रोक दिया है? इसका उत्तर स्पष्टत: ‘ना’ है।
  1. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने उनकी पार्टी राज्य में कितनी सीटें जीतेगी, इसकी घोषणा कर दी है। मुझे लगता है कि यह बहुत ही असंवेदनशील टिप्पणी है और इसकी हर हाल में निंदा की जानी चाहिए।
  1. इसके अलावा एक बड़े राज्य के मुख्यमंत्री भी हैं जो बेलगाम बोले जा रहे हैं कि कैसे पुलवामा का पूरा घटनाक्रम सत्तारूढ़ दल द्वारा खेला गया नाटक था। ऐसी सोच की हर संभव तरीके से कड़ी आलोचना, निंदा होनी चाहिए। यह केवल उस मुख्यमंत्री की सोच को दर्शाता है।

मैं दृढ़ता से आग्रह करूँगा कि हमें अपनी चुनी हुई सरकार को उसका काम करने देना चाहिए।

दूसरी ओर, पाकिस्तान गंभीर संकट में है।

  1. उनकी अर्थव्यवस्था दिवालिया हो चुकी है, और हालाँकि उन्हें संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और चीन से कुछ पैसे मिल जाते थे, लेकिन अब यह सारा पैसा अटक गया है। अब उनके लिए मुफ़्त की दावत नहीं है और वे आज जो दरियादिली दिखा रहे हैं उसे किसी दिन उनसे निचोड़कर ले लिया जाएगा।
  1. प्रधान मंत्री इमरान खान वहाँ की शक्तिशाली सेना की कठपुतली मात्र है जिसका एकल बिंदु एजेंडा केवल भारत के खिलाफ युद्ध जारी रखना है। उनके पास उनके बने होने का और कोई कारण भी नहीं है।
  1. पाकिस्तान ने अपनी तमाम सीमाओं ईरान, अफगानिस्तान और भारत की ओर से खुद परेशानी मोल ले ली है। उसका मौसमी मित्र चीन केवल ‘चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी)’ के कारण उससे स्वार्थी वित्तीय साझेदारी को निभा रहा है।
  1. कोई भी निवेशक पाकिस्तान में आने और निवेश करने के लिए तैयार नहीं है।
  1. ढेर सारे वादे करने के बावजूद, पाकिस्तान की ओर से उसकी सेना द्वारा समर्थित आतंकवादी शिविरों के खिलाफ कोई विश्वसनीय कार्रवाई किए जाने की उम्मीद नहीं है।
  1. अंतत: सेना को हर बार इस देश पर शिकंजा कसते रहना पड़ेगा और जब भी कोई राजनेता उनका सिर ऊँचा उठाने की कोशिश करेगा, ये लोग उसे गिरा देंगे या नियंत्रित कर डालेंगे।

इस विषय पर अंतिम शब्द नहीं लिखे गए हैं। अंतिम गोली अभी नहीं चली है और हमने अंतिम जान नहीं खोई है। यह एक लंबी लड़ाई है जिसने कई लोगों को लहूलूहान कर दिया है और आगे भी कई लोगों की जानें जाती रहेंगी।

पाकिस्तान को कुछ गंभीर विश्वास निर्माण उपाय करने की आवश्यकता है जिनमें शामिल हैं:

  1. चीन को अजहर मसूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने और उसे ट्रायल के लिए सौंपने की अनुमति प्रदान करने देना।
  1. हाफिज सैय्यद को 26/11 हमले के मुकदमे के लिए भारत को सौंपना।
  1. मुंबई हमलों के सूत्रधार दाऊद इब्राहिम को सौंपना।

इन तीनों आतंकवादियों को सौंपने को प्रारंभक के तौर पर देखना होगा, लेकिन पाकिस्तान के बारे में जो लोकप्रिय राय है, उसे देते हुए इसकी संभावना बहुत कम है कि पाकिस्तान सेना कभी भी अपनी प्रमुख आतंकवादी भुजाओं को सौंपने के लिए सहमत होगी!

इस कार्रवाई के बाद ही उन्हें कश्मीर पर बातचीत करने के लिए कहा जाना चाहिए।

हमारे लिए पुलवामा को जल्द भूला पाना और सभी को माफ कर हमसे आगे बढ़ने की उम्मीद करना अवास्तविक है।

जैसा कि कहा जाता रहा है, मैं कहना चाहूँगा कि हमें उन्हें माफ कर देना चाहिए अगर वे आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं लेकिन हमें उन नुकसानों को कभी नहीं भूलना चाहिए जो उनकी वजह से हमें हुए हैं।

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लेखक कार्यकारी कोच और एंजेल निवेशक हैं। राजनीतिक समीक्षक और टीकाकार के साथ वे गार्डियन फार्मेसीज के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। वे 6 बेस्ट सेलर पुस्तकों – द ब्रांड कॉल्ड यू- The Brand Called You रीबूट- Reboot. रीइंवेन्ट Reinvent. रीवाईर Rewire: 21वीं सदी में सेवानिवृत्ति का प्रबंधन, Managing Retirement in the 21st Century; द कॉर्नर ऑफ़िस, The Corner Office; एन आई फ़ार एन आई An Eye for an Eye; द बक स्टॉप्स हीयर- The Buck Stops Here – लर्निंग ऑफ़ अ # स्टार्टअप आंतरप्रेनर और Learnings of a #Startup Entrepreneur and द बक स्टॉप्स हीयर- माय जर्नी फ़्राम अ मैनेजर टू ऐन आंतरप्रेनर, The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. के लेखक हैं।                                                       

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अनुवादक- स्वरांगी साने – अनुवादक होने के साथ कवि, पत्रकार, कथक नृत्यांगना, साहित्य-संस्कृति-कला समीक्षक, भारतीय भाषाओं के काव्य के ऑनलाइन विश्वकोष-कविता कोश में रचनाएँ शामिल। दो काव्य संग्रह- काव्य संग्रह “शहर की छोटी-सी छत पर” मध्य प्रदेश साहित्य परिषद, भोपाल द्वारा स्वीकृत अनुदान से प्रकाशित और काव्य संग्रह “वह हँसती बहुत है” महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई द्वारा द्वारा स्वीकृत अनुदान से प्रकाशित।

Pakistan – what next?

190303 Pakistan terrorism map

Wing Commander Abhinandan is back. One Pakistani F16 has been shot down and a pilot killed. Pulwama has been avenged with the destruction of the JeM terror camps. And our apologists are back to hankering for immediate commencement of peace talks.

Where is the Pakistan – India relationship heading and what happens next for Pakistan?

After the Pulwama attacks there was a complete sense of gloom and doom in the country and everyone wanted revenge. Within a few days sarcastic comments were being made by leaders of the opposition. Twelve days later, the Indian Air Force hit back hard and destroyed three Jaish-e-Mohammad training camps in Pakistan and killed between 300 – 400 terrorists who were being trained. Also killed were 25 leaders of the terrorist organisation. It is interesting to note that it is primarily “family” members of Azhar Masood who were in leadership positions (no other meanings intended here)!

These strikes were applauded all over the country. It was surprising that while every opposition leader congratulated the Indian Air Force which was their due, not one of these politicians acknowledged the strong decision making by the Prime Minister. Ironically, after making so much noise about the attacks, these political parties are now blaming the BJP for politicising the IAF action.

The following day, Pakistani F16 fighter jets tried to enter Indian Air space and were rebuffed. One of these modern jets was shot down by Wing Commander Abhinandan who has been taken into custody. Under the Geneva Convention and after a lot of behind the scenes diplomacy and political manoeuvre, he has been released and back as a war hero.

So why are some sections of the press suddenly swinging to the other side?

Why has Imran Khan become a diplomat par excellence and what makes so many of our journalists and opposition politicians give so much credit to Pakistan.

  1. It surprises me that some sections of the press have started to comment on why war is never an answer. Quite an inane set of platitudes because no one can deny this. But when you see how much hurt has been caused to our nation over the years by Pakistan supported terrorists, are these journalists talking about pulling back and going back to status quo ante?
  1. Some journalists are questioning why the Prime Minister is going about his normal work day. Why shouldn’t he? I am sure he is monitoring the situation closely and has a team of excellent leaders who are more directly handling the matter. The same journalists would take the counter view if the Prime Minister was seen to be spending all this time on this matter!
  1. Some journalists have asked whether India has a Defence Minister? I was not able to understand this comment. In addition to the Defence Minister and the National Security Advisor, there are three Chiefs of Staff and it is this core team that must be handling every detailed issue under the direct supervision of the Prime Minister.
  1. Some politicians are screaming that all political activity must be stopped by the PM. Have they stopped all political activity from their side? The answer is a clear No.
  1. One senior BJP leader has announced how many seats his party will win in a state. I think this is a very insensitive comment and must be condemned at all costs.
  1. Then there is the Chief Minister of a major state who can’t stop talking about how this entire Pulwama episode has been stage managed by the ruling party. This thinking needs to be condemned in the strongest possible terms. It only shows the thinking of this Chief Minister.

I would strongly urge that we should let our elected Government do its work.

On the other hand, Pakistan is in serious trouble.

  1. Their economy is bankrupt, and though they are receiving some money from United Arab Emirates, Saudi Arabia and China, all this money is coming with strings attached. There is no free lunch and some day payment will be extracted from Pakistan for today’s largesse.
  1. Prime Minister Imran Khan is a puppet of the powerful Army whose single point agenda is to keep war mongering against India. They have no other reason to exist.
  1. Pakistan has created trouble on all its borders with Iran, Afghanistan and India. Its all-weather friend China only looks at a selfish financial partnership on account of the China Pakistan Economic Corridor (CPEC).
  1. No investors are willing to come and invest in Pakistan.
  1. Despite so many promises, no credible action is expected to be taken by Pakistan against the terrorist camps being supported by their Army.
  1. Finally, the Army will continue to have a stranglehold on the country and every time a politician attempts to raise his head, they will either cut it or control it.

The last word has not been written on this subject. The last bullet has not been fired and the last life has not been lost. This is a long battle which has scarred many and will continue to scar many more.

Pakistan needs to take some serious confidence building measures which would include:

  1. Allowing China to declare Azhar Masood as an international terrorist and hand him over for trial.
  1. Hand over Hafeez Sayyed to India to stand trial for the 26/11 attacks.
  1. Hand over Dawood Ibrahim, the architect of the Bombay attacks.

Handing over these three terrorists would be a starter but given popular opinion, it is highly unlikely that the Pakistan Army will ever agree to handing over their prime terror arm!

It is only after this action has been taken should they ask for a dialogue on Kashmir.

It is too early for us to forget Pulwama and it is unrealistic to expect everyone to forgive and move on.

As the old saying goes me must forgive if they take action against the terrorists but we must never forget the harm they have caused us.

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The author is an Executive Coach and an Angel Investor. A keen political observer and commentator, he is also the founder Chairman of Guardian Pharmacies. He is the author of 6 best-selling books, The Brand Called You; Reboot. Reinvent. Rewire: Managing Retirement in the 21st Century; The Corner Office; An Eye for an Eye; The Buck Stops Here – Learnings of a #Startup Entrepreneur and The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. 

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