सेवानिवृत्ति – आज का 60, जो कल 40 का था

 

2. Reboot. Reinvent. Rewire Managing Retirement in the Twenty First Century

वह देश जो दुनिया का “सबसे युवा” देश है, जहां 700 मिलियन से भी अधिक लोग 30 वर्ष से कम उम्र के हैं, लेकिन हमारे उसी देश में बढ़ती उम्र के लोगों की संख्या भी बढ़ रही है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में बेबी बूमर्स (‘बेबी बूमर’ वर्ष 1946 और वर्ष 1964 के बीच पैदा हुए व्यक्तियों के लिए वर्णनात्मक शब्द है।) की तरह, भारत में भी स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जन्मे बच्चे हैं, जिनका जन्म वर्ष 1947 के बाद हुआ था। इन बच्चों में से सबसे उम्रदराज़ वाले वर्ष 2015 में साठ पार होने को आए या साठ के आस-पास हैं, हालाँकि इनमें से कुछ अभी भी काम कर रहे हैं लेकिन आसन्न सेवानिवृत्ति का विचार करने लगे हैं।

सबसे पुराना 2015 में अपने साठ के दशक के उत्तरार्ध में होगा और इनमें से अधिकतर स्वतंत्रता वाले बच्चे शायद अभी भी काम कर रहे हैं लेकिन आने वाली सेवानिवृत्ति के बारे में सोच रहे हैं।

अपने बीते दिनों के बारे में सोचकर कभी-कभी मैं चकित रह जाता हूँ कि तब हममें से कई अपनी ज़िंदगी में केवल मनुष्यों की तरह कई बार बहुत अधिक लचीले और बहुत अधिक दृढ़ रहे थे। पर तब अंतिम समय तक हम काम में लगे रहे थे और अपने भविष्य की तैयारी करते हुए हमें अक्सर अंत के वर्षों तक नाशुक्राना और कभी-कभी अपमानजनक कार्य वातावरण सहन करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। तनाव हमारा सबसे अच्छा नया दोस्त बन जाता है क्योंकि हम कभी न ख़त्म होने वाले रोज़-ब-रोज़ के बिलों को भरते रहने की कोशिश में लगे रहते हैं जबकि कभी भी हमारा पत्ता पढ़ाई-लिखाई, कपड़ों-लत्तों, बड़ी गाड़ियों और शादियों जैसे बड़े खर्चों में कटता रहता है। हमें न चाहते हुए अपनी इच्छाओं और जज़्बे की तलाश को काफ़ी देर तक रोके रहना पड़ता है क्योंकि या तो हमारे पास पर्याप्त समय नहीं होता या उतना अतिरिक्त पैसा नहीं होता है।

ज्यों ही मैंने मंथन किया और अपनी खुद की वास्तविकता पर ज़िरह की, मैं सेवानिवृत्ति के बारे में अपने साथियों के दृष्टिकोण को जानने के लिए उत्सुक हो गया।

मैंने कई मित्रों से बात की, 60 वर्ष की आयु से अधिक पुरुषों और महिलाओं दोनों से, जो या तो सेवानिवृत्त हो चुके थे या जिन्होंने अभी-अभी इसके बारे में सोचना शुरू किया था। सबसे चौंकाने वाली बात जो मैंने देखी वह यह थी कि लोग सेवानिवृत्ति विषय पर सोचना तक नकार रहे थे और इस मुद्दे की बात को स्थगित रहने देना चाहते थे। जबकि कई लोग बचत और निवेश के बारे में चिंताशील थे, कुछ ने इसे मनोवैज्ञानिक झटका माना था जो आम तौर पर किसी सक्रिय कामकाजी करियर के अंत में होता है।

जबकि मुझे पहले-पहल लगा था कि मेरी स्वतंत्रता पर सर्वाधिक नियंत्रण मेरा होगा। मुझे कुछ भी इसलिए नहीं करना है कि उसे करना ज़रूरी है, बल्कि अब मैं वह करता हूँ जिसे करना मैं पसंद करता हूँ। इसलिए मैंने सेवानिवृत्ति को इस अर्थ में परिभाषित किया है, “जीवन के ऐसे पड़ाव पर पहुँचना जब किसी को अपनी इच्छा से जीने की आजादी मिलती है।” मुझे एक कविता याद हो आई, जो मैंने बहुत पहले कहीं पढ़ी थी…

दस बरस की आयु में, हम बस मजे करते हैं

बीस बरस के होने पर भी, हम शरारती ही रहते हैं

तीस साल की उम्र में, हम बुलंद सोच रखते हैं

चालीसवें वर्ष में, हम सोचविचार करने लगते हैं

पचास वर्ष की आयु में, हम वास्तविकता का सामना करते हैं

साठ के होने पर, हम शांति की तलाश करते हैं

 लेखकअज्ञात

तथापि इन दिनों और इस काल में सेवानिवृत्ति के मायने उससे पूरी तरह से बदल गए हैं जिसे हमने अपने माता-पिता या बहुत हद तक दादा-दादी के दौर में देखा था।

आज के दिन और उम्र में, हमारे माता-पिता और शायद हमारे दादा दादी के साथ हमने जो देखा है उससे सेवानिवृत्ति प्रतिमान पूरी तरह से बदल गया है, हालाँकि संदेश वही हो सकता है, लेकिन पिछले तीन दशकों में उम्र निश्चित तौर पर बदल गई है।

जब मैं अपने निकट के एक मित्र से बुढ़ापे को लेकर चर्चा कर रहा था तो उसने मुझे कहा कि “कल का जो 60 था वह आज का 40 है।”

दूसरे का कहना था.. “आयु केवल एक आँकड़ा है”

इसलिए कर्मचारियों के रूप में सामान्य रूप से रोजगार की शर्तों के अनुसार अपनी नियमित नौकरियों में रहते हुए जब तक हम 60 से 65 वर्ष के नहीं हो जाते,तब तक हमसे काम करते रहने की अपेक्षा की जा सकती हैं।

जब मैंने वर्ष 1979 में 22 साल की आयु में काम करना शुरू किया था, तो मेरी कंपनी में सेवानिवृत्ति की उम्र 52 साल थी और तब मुझे लगता था कि तीन दशकों का लंबा सफर काफी दूर है। कुछ सालों बाद सेवानिवृत्ति के लिए 55 वर्ष की आयु कर दी गई थी और मेरे जैसे, कंपनी के कई युवा प्रबंधकों ने शिकायत की कि शीर्ष प्रबंधन भला ऐसे कैसे “वृद्धों” को 3 साल तक और रहने की अनुमति देकर हमारे करियर से खिलवाड़ कर रहा था! आज जब मैं 58 वर्ष के मुकाम पर पहुँच गया हूँ, मैं विस्मित होता हूँ कि अब जबकि मैं अपने करियर के शिखर पर हूँ तो ऐसे में सेवानिवृत्त होना कैसा रहेगा!

जैसे ही हम पेंशन पाने की या सेवानिवृत्ति की आयु तक पहुँचते हैं, तब मैं देखता हूँ कि बहुत सारे दोस्त असुरक्षित महसूस करने लगते हैं और अप्रासंगिक हो जाने से डरने लगते हैं। जब रिटायर होने का समय आ जाता है, तब हम भूल जाते हैं कि हमने खुद से क्या कहा था। पिछले तीन दशकों में ऐसा क्या बदल गया कि हम धीमे पड़ जाने या काम की गति कम हो जाने या इसे समझ पाने कि हमारे दिमाग और शरीर की उम्र बढ़ रही हैं, डरने लगे हैं?

हममें से अधिकांश ने वह हासिल कर लिया होगा जिसे उसने अपने करियर की शुरूआत में पाना तय किया था या दूसरी स्थिति में हमने स्वीकार लिया होगा कि अपने इस करियर चुनाव में जितना हासिल हो सकता था, हमने हासिल कर लिया है। हम उस दौर से भी गुज़र गए जब हमसे युवाओं ने कार्यस्थल पर अपनी जगह बनाने के लिए हमें धकेलना शुरू किया था ताकि वे हम दरक़िनार हो जाएँ और युवाओं का दल तेजी से आगे बढ़ सकें।

बीते कल के बारे में सोच-सोचकर हलक़ान होने में कोई तुक नहीं है क्योंकि जो बीत गया उसे अब हम बदल नहीं सकते हैं। मैंने हमेशा सकारात्मक रूप से सोचते हुए आगे देखने में विश्वास किया है।

तब भी यदि ज्यादातर लोग अपेक्षाकृत अधिक स्वस्थ जीवन जीते हैं, तो आधुनिक चिकित्सा के साथ हमारी जीवन प्रत्याशा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। सामान्य रूप से हमारे माता-पिता अपने अस्सी के दशक में अच्छे रहेंगे और हम उम्मीद कर सकते हैं कि वे अपने नब्बे के दशक में हमारे साथ रह सकें, शायद और भी ज़्यादा अगर हमने अपने शरीर के साथ बहुत ज़्यादा दुर्व्यवहार नहीं किया हो।

सेवानिवृत्त होना दुनिया का अंत नहीं है।

यह तनाव और घोर परिश्रम के बिना एक नए और अधिक पूर्ण जीवन की शुरुआत है, जब हम युवा थे तब हम बहुत दबाव और खींचाव में रहते थे। हम सेवानिवृत्ति के लिए तत्पर थे लेकिन एक परिपूर्ण सेवानिवृत्ति कभी हो ही नहीं पाई। आपको इसके लिए योजना बनाना है और इस योजना में आपको अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति, अपने जीवनसाथी को शामिल करना है। जब तक आप दोनों अपनी योजनाओं से सहमत नहीं होंगे, तब तक आप दोनों के जीवन में विसंगति बनी रहेगी।

साथ ही, मुझे एहसास हुआ कि बुजुर्ग माता-पिता के साथ अगली पीढ़ी की कमान मेरे पास आ रही थी। मेरे परिवार के अगली पीढ़ी के बच्चे मेरी ओर देख रहे थे। जब मैं उनके घर जाता, तो सबसे पहले बैठने का सम्मान मुझे मिलता था। रात का भोजन भी पहले मुझे परोसा जाता और जब भी मैं कुछ कहता, मेरी बातों को ध्यान से सुना जाता। इस विरोधाभास का समायोजन करना मेरे लिए मुश्किल था। एक ओर मैं अपने कार्यस्थल और समाज में कम प्रासंगिक महसूस करने लगा था, जबकि कभी मुझे लगता था कि मैं हर चीज़ काफी अच्छे तरीके से जानता हूँ और दूसरी तरफ मुझे अगली पीढ़ी से बहुत सम्मान मिल रहा था।

मैंने कई लोगों से मुलाकात की और उनसे  उनके सामने खड़ी चुनौतियों और उस पर उनके विचारों को जाना क्योंकि उन्हें सेवानिवृत्ति का सामना किया था। मैंने उन लोगों से बात की, जो अपने तीसवें और चालीसवें वर्ष में है क्योंकि वे अपने माता-पिता की सेवानिवृत्ति के बाद की योजनाएँ बनाकर हलक़ान थे। मैंने उन पत्नियों से बात की, जो अदद पतियों की सेवानिवृत्ति के बाद उनके साथ के नव सहजीवन की तैयारी कर रही हैं और मैंने उन पतियों से बात की जिन्होंने बहुत सफल करियर जीया है और अब उनकी पत्नियाँ सोच रही हैं कि अब दोनों के लिए जीवन कैसे होगा, क्योंकि दोनों को “पूरी दुनिया में हर समय एक साथ बिताना पड़ेगा।”

चलिए मैं सेवानिवृत्ति के साथ की नाकामयाबी की रेखा खींचता हूँ।

यह हमारे जीवन पर लगा पूर्णविराम है और हमें नई दिशा और नवीनीकृत शक्ति के साथ पुनरारंभ करने की आवश्यकता है। अपने करियर या निजी जीवन के हालिया झटके या निराशा के बारे में सोचें। सोचें कि तब आपको कैसा लगा था? आपको वापस अपनी पहली स्थिति में आने के लिए कितना समय लगा था? क्या आपने कोई कार्य योजना तैयार की थी? क्या आपने उस समय खुद को या दूसरों को इसके लिए दोषी ठहराया? क्या तब आपने “शुगर फिक्स (जीने का ज़ायका ठीक)” रखने के लिए मिठाई या आइसक्रीम की बड़ी प्लेट खा ली थी?

आप जीवन में लगे किसी धक्के से कैसे उबरते हैं, वहीं परिभाषित करता है कि आप क्या हैं? चलिए, इसे ऐसे समझते हैं, मान लीजिए कि स्पेक्ट्रम (रंगावली) के दो सिरे हैं – आशावादी और निराशावादी। आप स्पेक्ट्रम के किसी भी बिंदु पर हो सकते हैं।

  • आशावादी हर चुनौती का अनुभव लेते हैं। वे इसे अस्थायी स्थिति के रूप में देखते हैं, कुछ ऐसा जो कभी अतीत हो जाएगा। आशावादी अक्सर वैकल्पिक योजना बना लेते हैं, और उस पर काम करने लगते हैं। आशावादी व्यक्ति भविष्य देखता है।
  • निराशावादी स्पेक्ट्रम के विपरीत छोर पर हैं। उन्हें हर काम में समस्या दिखती है, और समस्या उनके जीवन के हर पहलू को प्रभावित करती है, और समस्या का कोई समाधान उनकी दृष्टि में नहीं होता है। आमतौर पर वे समस्या के लिए किसी को दोषी ठहरा देते हैं। क्या आपने कभी किसी निराशावादी को समस्या हल करने में उसकी मदद करने की कोशिश की है? वे आपसे हर बार बहस करेंगे कि हर संभव समाधान काम नहीं करेगा। उनके हिसाब से कोई अच्छा भविष्य नहीं है और सभी निराशाजनक है।

निराशावादी कहेंगे कि एक आशावादी यथार्थवादी नहीं है। शायद किसी मामले में ऐसा हो सकता है। हालांकि, शायद यह थोड़ा अवास्तविक विचार है जो आशावादी को चुनौती को पूरा करने और सफल होने की अनुमति देता है।

आप अपने उसी स्थान पर रहते हुए सेवानिवृत्ति स्पेक्ट्रम में सकारात्मक पक्ष के साथ जीवन को रीइंवेन्ट (पुनर्जीवित), रीबूट और रिवाईर (फिर से जीना) करना चाहते हैं, तो आप कैसे आगे बढ़ सकते हैं?

अपने व्यवहार स्वरूप की जाँच करें। खुद के प्रति ईमानदार रहे।

  • जब कोई चुनौती खड़ी होती है, तो एक कदम पीछे लें और देखें कि आख़िर मसला क्या है। चुनौती में छिपे अवसर की तलाश करें। कभी-कभी अवसर केवल उस माध्यम से प्राप्त होने वाले अनुभव से मिलता है।
  • समस्या को अपना जीवन न बनने दें।
  • तुरंत समस्या हल करने के लिए कार्रवाई में लग जाएँ। एक योजना बनाएँ और शुरू कर दें।
  • अपने आप में और अपनी शक्ति पर विश्वास करें।

उम्र बढ़ने की और सेवानिवृत्ति को लेकर समाज की धारणा को दूर कर दें। आशावादी को अधिक सफलता, स्वास्थ्य और खुशी मिल सकती है। निराशावादी दुःख और निराशा की खुद ने ही की भविष्यवाणी का अनुभव कर सकता है। आप स्पेक्ट्रम पर अपना स्थान चुनें, जहाँ से आप अपने जीवन को रिबूट करने की शुरुआत करेंगे।

अंत में यह मेरा विश्वास है कि हमारा नवजीवन, जीवन भर का साहस हो सकता है। यह स्थायी विश्राम नहीं होना चाहिए। अपने आप से पूछें कि सेवानिवृत्ति के बारे में आपकी नकारात्मक मान्यताएँ कहीं आपके जीवन के “तीसरे आधे” जीने के अपने तरीके के आड़े तो नहीं आ रही है!

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लेखक राजनीतिक समीक्षक, एंजेल निवेशक और कार्यकारी कोच हैं। वे गार्डियन फार्मेसीज के संस्थापक अध्यक्ष हैं। वे 5 बेस्ट सेलर पुस्तकों – रीबूट- Reboot. रीइंवेन्ट Reinvent. रीवाईर Rewire: 21वीं सदी में सेवानिवृत्ति का प्रबंधन, Managing Retirement in the 21st Century; द कॉर्नर ऑफ़िस, The Corner Office; एन आई फ़ार एन आई An Eye for an Eye; द बक स्टॉप्स हीयर- The Buck Stops Here – लर्निंग ऑफ़ अ # स्टार्टअप आंतरप्रेनर और Learnings of a #Startup Entrepreneur and द बक स्टॉप्स हीयर- माय जर्नी फ़्राम अ मैनेजर टू ऐन आंतरप्रेनर, The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. के लेखक हैं।

  • ट्विटर : @gargashutosh                                      
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