प्रधान मंत्री इमरान खान

पाकिस्तान में बहुप्रतीक्षित चुनाव संपन्न हुए और परिणाम हालाँकि थोड़े विवादास्पद रहे लेकिन उसके बावजूद घोषित हो चुके हैं।

इमरान खान जनता की पसंद है और वे स्वतंत्र उम्मीदवारों को मिलाकर उस जादुई संख्या को पाने की जुगाड़ में है, जिसके बाद वे शपथ ले सकते हैं। चुनाव सेना द्वारा “प्रबंधित” थे या नहीं, अब यह कोई मुद्दा नहीं है। अब इमरान खान पृथ्वी के सबसे खतरनाक राष्ट्रों में से एक के नेता हैं। अपने प्रारंभिक भाषण में उन्होंने भारत के बारे में समोचित उद्गार व्यक्त किए जान पड़ते हैं लेकिन तब भी उन्होंने कश्मीर मामले में अपने देश की लकीर का फ़कीर होने का फैसला किया।

राजनीतिक प्रवक्ताओं और दुनिया भर के मीडिया द्वारा इन चुनावों की बड़े पैमाने पर आलोचना हुई। तालिबान का करीबी होने को लेकर इमरान की आलोचना की गई है।  उनकी पूर्व पत्नी रेहम ख़ान द्वारा बताई गई सभी बातें किताब में उनकी प्लेबॉय छवि को उकसाने की कोशिश कर रही हैं, जिसमें इमरान खान को “निदेशक का अभिनेता” कहा गया है। इस किताब को चुनाव से ठीक पहले जारी किया गया था लेकिन उसका कोई ख़ास असर पड़ा हो, ऐसा नहीं दिखा।

भारत और शेष दुनिया को अगले 5 वर्षों तक इमरान खान और उनके समर्थकों से निपटना होगा। भारत ने एहतियात बरतते हुए इमरान की जीत का स्वागत किया है और दक्षिण एशिया को आतंक और हिंसा से मुक्त करने की अपनी बात दोहराई है।

दो प्रमुख विपक्षी नेता और उनके दल, नवाज शरीफ (पीएमएल-एन) और बिलावल भुट्टो (पीपीपी) हार गए, लेकिन तब भी मजबूत और विश्वसनीय विपक्ष प्रदान करने में सक्षम होने के लिए पर्याप्त सीटें हासिल करने में वे कामयाब रहे हैं, बशर्तें अगर वे अपने ही मुद्दों को ठीक तरीके से सुलझाने में सक्षम हो जाते हैं, तो! दोनों पक्षों ने चुनाव परिणामों को खारिज कर दिया है हालाँकि पीएमएल (एन) ने पंजाब प्रांत में जीत पर सवाल नहीं उठाया है और न ही पीपीपी ने सिंध में बहुमत पर सवाल उठाया है। उनकी चुनाव के बाद की टिप्पणियाँ केवल अपने राजनीतिक पदों और अपनी असफलताओं के कारणों पर लिपा-पोती करने के रूप में देखी जानी चाहिए।

पाकिस्तानी मतदाता ने हफीज सईद की धार्मिक और भारत विरोधी राजनीति को दृढ़ता से खारिज कर दिया है, लेकिन वह और उसका संगठन अब भी बना हुआ है। ऐसा तब तक चलता रहेगा जब तक वह पाकिस्तानी सेना द्वारा शासित नहीं होता है, जो हो नहीं सकता है, तो वह ऐसे ही अपने लड़ाई उकसाने के काम और भारत के खिलाफ आतंकवादियों के खुले प्रशिक्षण को जारी रखेगा। दूसरी ओर स्वयंभू न खेलने वाले कप्तान जनरल परवेज मुशर्रफ़ हैं, जिन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि वे हफीज सईद की प्रशंसा करते हैं,जो चुनाव लड़ने की धमकी दे रहा था, जिसने अब ख़ुदबख़ुद छोटे पर्दे और युद्ध भड़काने वाले “विशेषज्ञों की टिप्पणियों” को अपनी ओर से कुछ प्रदान करना कम कर दिया है।

इमरान खान की “नया पाकिस्तान” की जीत के क्या प्रभाव हैं?

  1. काफ़ी लंबे समय बाद, पाकिस्तान ने ऐसे नेता चुना है जो भ्रष्ट नहीं है और जिसने अप्रैल 1996 में तहरीक-ए-इंसाफ की स्थापना के बाद से तंत्र से लड़ते हुए अपने लचीलेपन को दिखाया है। उन्हें विभिन्न मोर्चों पर बार-बार लक्षित किया गया है, लेकिन शासन में सुधार लाने और भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए वे डटे हुए हैं। फिर भी, 269 सदस्यीय विधानसभा की 115 सीटों के साथ, उन्हें 15 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ये स्वतंत्र विधायक समर्थन देने की कीमत के रूप में क्या माँग करेंगे और इसका उनके शासन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
  2. उन पर पाकिस्तानी सेना का वरद हस्त है और इसे सकारात्मक विकास के रूप में देखा जाना चाहिए। सेना हमेशा से या तो राजनीतिक दल के सीधे नियंत्रण में रही है या उसके साथ विरोधी संबंध में रहे हैं। अब वह इमरान खान का समर्थन कर रही है, जो लोकतांत्रिक जीत के कुनबे में हैं, इससे भारत और बाकी दुनिया को किसी ऐसे व्यक्ति की बजाए, जो निर्णय लागू नहीं कर सकता है, तख़्त के पीछे की शक्तियों से सीधे निपटने का अवसर मिला है।
  3. पाकिस्तानी मतदाता बेचैन हो रहा है और सारे धार्मिक प्रचार से थक गया है। आजादी के बाद से पिछले सात दशकों में वह समृद्धि के लिए धैर्यपूर्वक इंतजार कर रहा है। मतदाताओं ने भारत का महती विकास देखा है और ऐसे नेता की तलाश में हैं जो उनके देश का भी आर्थिक विकास कर सके। इमरान खान को अपने पिछड़े राष्ट्र के लिए कार्य करने का अवसर मिला है।
  4. पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था दिवालियापन की कगार पर है। देश भारी कर्ज में डूबा हुआ है और उसके पास पैसा नहीं है। पाकिस्तानी रुपया अब तक का सबसे कमजोर है, जिससे बाहरी ऋण और भी बड़ा हो गया है। जून 2018 में, पाकिस्तान को वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) द्वारा फिर से आतंक वित्तपोषण पर नज़र रखने की सूची में रखा गया था। इमरान खान को पैसा खड़ा करने और अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण पर काम शुरू करने के लिए कुछ चतुर पैंतरों की आवश्यकता होगी। जब तक कि अर्थव्यवस्था फिर से संभल नहीं जाती और नौकरियाँ और धन निर्माण शुरू नहीं हो जाता है, तब तक किसी भी राजनेता से कुछ और अन्य महत्वपूर्ण करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है।
  5. पाकिस्तान के बारे में दुनिया की धारणा शायद अब तक की सबसे कम है। पाकिस्तान में कई सालों से कोई विदेश मंत्री नहीं है। नवाज शरीफ ने इस पोर्टफोलियो को सीधे संभालने का फैसला कर घटिया काम किया। ग्रीन पासपोर्ट को सम्मान का थोड़ा आभास कराने के लिए गहन आत्मविश्वासपूर्ण निर्माण उपायों की आवश्यकता है। आतंकवादियों को समर्थन देना जारी रखते हुए यह भी दावा करते रहना कि पाकिस्तान खुद ही उससे पीड़ित है, दुनिया भर के सत्ता गलियारों में अब स्वीकार्य नहीं है। सऊदी अरब, जिसकी ओर हमेशा पाकिस्तान देखता रहा है, वहाँ भी युवराज शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। अगर वे बदल सकते हैं, तो पाकिस्तान भी ऐसा कर सकता है।
  6. चीन, पाकिस्तान के सभी मौसमी सहयोगी चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का समर्थन करने में अपना स्वयं का एजेंडा रखते हैं क्योंकि ऐसा करने से एशिया के आस-पास की लंबी समुद्री यात्रा से बाधित हुए बिना चीनी निर्यात मध्य पूर्व और यूरोप तक पहुँच जाएगा। दूसरी तरफ, चीन अपने उइघुर प्रांत में आतंकवाद से भी परेशान है, जिस पर पाकिस्तान को समर्थन करने का आरोप लगा है। पाकिस्तान को भारत, यूएसए और रूस के साथ मजबूत संबंध बनाने की जरूरत है। इमरान खान ने इसे पहचान कर कहा है कि “आप एक कदम उठाते हैं और हम दो कदम उठाएंगे।”
  7. विपक्षी दल पीएमएल (एन) और पीपीपी संसद में जिम्मेदार विपक्ष की तरह जांच और संतुलन प्रदान करना है और न कि केवल विरोध करना है इसलिए व्यापार बाधित नहीं करते हुए अपने देश के प्रति अपनी वचनबद्धता का प्रदर्शन कर सकते हैं। उनके बीच, उनकी पर्याप्त संख्या है। बिलावल भुट्टो और मरियम नवाज शरीफ़ अभी युवा हैं और उनके आगे राजनीति में लंबा समय पड़ा है। विपक्ष में बैठना सीखने के लिए बेहतरीन अनुभव हो सकता है।

भारत के साथ पूरी दुनिया को इमरान खान को अपने बचाव को छोड़े बिना शासन का अलग मॉडल रखने का मौका देना होगा। शांतिपूर्ण पाकिस्तान इस पूरे क्षेत्र के संवर्धन और विकास में मददगार होगा और इसकी सफलता में सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी पाकिस्तान की है।

इमरान खान को अपने देश की कथा बदलने की जरूरत है। अपने देश के भीतर कई विरोधाभासी विचारों को साथ लेकर चलने के लिए उन्हें विकास और सुशासन का सरल वादा देने की ज़रूरत है। उनके लिए अनुकरण करने के दिन खत्म हो गए हैं और आलोचना एवं आरोप लगाने का खेल खेलने का समय आ गया है।

आम पाकिस्तानी नागरिक उन राजनेताओं से ऊब गया है और तंग आ चुका है, जिन्होंने बार-बार पैसे और असीमित शक्ति के लालच का प्रदर्शन किया है और आम पाकिस्तानी के लिए कुछ भी नहीं किया। इमरान खान को बहुत हद तक राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधान मंत्री मोदी की तरह सीधे लोगों से संवाद शुरू करने की जरूरत है, ताकि उनका संदेश सीधे जनता तक पहुँच सके और बीच की व्याख्या में कहीं खो न जाए।

उनके पास अन्य कोई विकल्प भी नहीं है।

इसके अलावा, शायद उनके पास यह एकमात्र अवसर है !

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लेखक गार्डियन फार्मेसीज के संस्थापक अध्यक्ष हैं। वे 5 बेस्ट सेलर पुस्तकों – रीबूट- Reboot. रीइंवेन्ट Reinvent. रीवाईर Rewire: 21वीं सदी में सेवानिवृत्ति का प्रबंधन, Managing Retirement in the 21st Century; द कॉर्नर ऑफ़िस, The Corner Office; एन आई फ़ार एन आई An Eye for an Eye; द बक स्टॉप्स हीयर- The Buck Stops Here – लर्निंग ऑफ़ अ # स्टार्टअप आंतरप्रेनर और Learnings of a #Startup Entrepreneur and द बक स्टॉप्स हीयर- माय जर्नी फ़्राम अ मैनेजर टू ऐन आंतरप्रेनर, The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. के लेखक हैं।

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