12 कारण जिनसे मोदी 2019 में फिर से पीएम बनेंगे

190314 Elections 2019

चुनावी बिगुल बज चुका है और मोदी सरकार की तमाम उपलब्धियों के बारे में पहले ही लिखा जा चुका है। श्री मोदी अपने पहले पाँच साल के कार्यकाल में जिन कामों को पूरा नहीं कर पाए हैं, उनके बारे में भी बहुत कुछ लिखा गया है।

औसत भारतीय मतदाता मुख्य रूप से जो प्राप्त करना चाहता है, वह है :

  1. साफ-सुथरा प्रशासन, क्योंकि हम गैर-भाजपाई सरकारों के चलते पिछले 70 वर्षों में भ्रष्टाचार की पराकोटी की अधिकता से बहुत नाराज और निराश हैं।
  1. देश का मजबूत आर्थिक विकास जिससे धन वृद्धि और रोजगार का सृजन होगा।
  1. सुरक्षित वातावरण जहाँ हम लगातार खतरों की आशंका के बिना रह सकें कि कहीं कोई हमें और हमारे परिवारों को शारीरिक रूप से नुकसान तो नहीं पहुंचा देगा। हम अपने कंधों को बिना भय के देखना चाहते हैं। क्या अब हम फिर मेज और कुर्सियों के नीचे अज्ञात बैग के डर को देखना चाहते हैं।
  1. जीवन की सभी आवश्यकताओं के साथ स्वच्छ वातावरण ताकि हम अपने परिवारों के साथ सामान्य जीवन जी सकें।

आइए हम उन कारणों की पड़ताल और जाँच करें जिसकी वजह से मेरा यह मानना है कि न केवल मोदी को सत्ता में वापस आना चाहिए, बल्कि मुझे विश्वास है कि मतदाताओं के मतों से वे ही सत्ता में वापस आएँगे।

  1. सकारात्मक रिपोर्ट कार्ड: पिछले चुनावों के दौरान 2014 में श्री मोदी ने वादा किया था कि वे 2019 में अपने रिपोर्ट कार्ड के साथ निर्वाचन क्षेत्र में वापस आएँगे। पहले पाँच साल के कार्यकाल की उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। कुल मिलाकर मतदाता श्री मोदी के शासन और भारत के लिए उनके द्वारा निर्धारित की गई दिशा से संतुष्ट है। विपक्षी नेताओं में से कुछ को छोड़ दें तो और कोई भी एक कार्यकाल में किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं करता है।
  1. अर्थव्यवस्था: भारत अब दुनिया की छठी सबसे बड़ी और क्रय शक्ति समानता के मामले में दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इससे भी महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि श्री मोदी भारत को अगले दशक में त्वरित वृद्धि की राह पर ले आए हैं। यहाँ ऐसा नेता है जो हर संभव सभी मजबूत निर्णय लेने से नहीं हिचकिचाया है, चाहे वे अर्थव्यवस्था से संबंधित हों या मौलिक संहिता सुधार हो जैसे कि दिवालियापन कोड।
  1. स्वच्छ सरकार: श्री मोदी ने उन्हें धमकाने वालों के दिमाग में भी स्पष्ट रूप से स्थापित कर दिया है कि वे बहुत साफ हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास किया है कि उनकी सरकार में कोई भ्रष्टाचार न हो। पिछले पाँच वर्षों में छोटा- बड़ा कोई घोटाला नहीं हुआ है। हममें से ज्यादातर लोग उसके लिए भी भुगतान करने के आदी हैं, जो अमूमनन हमारे अधिकार हैं। ड्राइविंग लाइसेंस या नया पासपोर्ट प्राप्त करना हमारी सरल आवश्यकताएँ हैं, जिसके लिए भी हम दलालों की तलाश करते थे। अब यह पूरी तरह से बंद हो गया है।
  1. भारतीय पासपोर्ट: स्पष्ट रूप से 30 साल पहले की तुलना में भारतीय पासपोर्ट आज अधिक सम्मानित है। मैं यह कह रहा हूँ दुनिया भर में यात्रा करने वाले अपने पिछले चार दशकों के काफी व्यक्तिगत अनुभव के साथ। इससे पहले, भारतीय पासपोर्ट को दुनिया भर के आव्रजन अधिकारियों द्वारा स्वेच्छा से और इतने सारे सवालों के बिना लिया नहीं जाता था। 
  1. विदेश नीति: भारत अब राष्ट्र मंडल में कद्दावर हुआ है। भारत पाकिस्तान को छोड़कर सभी पड़ोसी राज्यों के साथ बहुत अच्छे संबंध विकसित करने में कामयाब रहा है। साथ ही भारत संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस, ईरान और इजरायल के साथ-साथ चीन के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाए रखने में सफल रहा है। ईरान पर प्रतिबंध लगाते हुए भी संयुक्त राज्य अमेरिका भारत को उनसे तेल खरीदना जारी रखने के लिए सहमत हुआ। एयर इंडिया अब सऊदी अरब से इजरायल के लिए उड़ान भर सकता है और जब श्री मोदी ने जॉर्डन से फिलिस्तीन के लिए उड़ान भरी, तो इजरायली विमान ने उन्हें सुरक्षा प्रदान की। 
  1. महागठबंधन: स्पष्ट रूप से महागठबंधन काम नहीं कर रहा है। निश्चित रूप से उस तरीके से नहीं जिस तरह राहुल गाँधी ने उनसे एक और सभी के नेता के रूप में ताज पहनवाया था। क्षेत्रीय नेताओं के इस अभिप्रेरक समूह के किसी भी घटक के पास कोई सामान्य न्यूनतम कार्यक्रम नहीं है और न ही वे ऐसे किन्हीं मूल्यों के समान सेट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसे वे मतदाताओं के सामने प्रस्तुत कर सकते हैं। महागठबंधन के युद्धरत नेता जली-कटी बातें करते हुए अपना असली रंग दिखा रहे हैं। वे एक ही सांस में अपने गठबंधन सहयोगियों की आलोचना भी कर रहे हैं और प्रशंसा भी। उनका एकमात्र एकल बिंदु एजेंडा श्री मोदी को हटाना भर है। विपक्षी नेताओं ने खुले तौर पर कहा है कि लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन हो सकता है लेकिन प्रादेशिक चुनावों के लिए नहीं। ये राजनीतिक दल जितना समझते हैं, उससे कहीं अधिक भारतीय मतदाता होशियार है। क्या वे वास्तव में सोचते हैं कि हम मतदाता इतने मूर्ख हैं? 
  1. राहुल गाँधी: श्री गाँधी ऐसा कुछ भी करने में सक्षम नहीं हैं जिसका कुछ नतीजा निकले और तब भी वे यह मानना चाहते हैं कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में उनकी जीत केवल उनके खाते में थी, लेकिन अगर कोई चुनावी मतदानों को देखें तो वह संख्या कुछ अलग कहानी कहती है। श्री गाँधी ने भारत के लिए किसी भी स्पष्ट दृष्टिकोण या मार्ग की घोषणा नहीं की है। उनके पास अपने पूर्ववर्तियों की उपलब्धियों के राग आलापने के अलावा कुछ भी सकारात्मक नहीं है। वे बस राफेल सौदे पर भरोसा करते हैं और उम्मीद रखते हैं कि कुछ भ्रष्टाचार के आरोप श्री मोदी पर लग सकेंगे। जबकि कोई उन पर विश्वास नहीं करता। वे न केवल मतदाताओं के लिए बल्कि उनकी पार्टी के अधिकांश सदस्यों के लिए भी हँसी के पात्र बनते जा रहे हैं। 
  1. हिंदी केंद्रीय स्थल: हिंदी के केंद्रीय स्थलों का दिल अभी भी श्री मोदी के साथ हैं। हाँ, उन्होंने तीन राज्यों में भाजपा को मतदान कर बाहर कर दिया, लेकिन जब राष्ट्रीय चुनाव होंगे, तो वे बाहर आएँगे और श्री मोदी के लिए बहुत बड़ी संख्या में मतदान करेंगे, जो स्पष्ट रूप से आज देश के सबसे बड़े नेता हैं। बड़ी संख्या में मतदाताओं के मन में राम मंदिर एक बड़ा मुद्दा है, यही वजह है कि श्री गाँधी के वफादार प्रवक्ताओं ने यह नारा लगाना शुरू कर दिया है कि केवल काँग्रेस ही मंदिर का निर्माण कर सकती है। जब मंदिर की बात आती है, तो सभी जानते हैं कि केवल भाजपा ही अपने तार्किक निष्कर्ष के माध्यम से इसे देख सकती है। 
  1. आधारभूत संरचना: भारत के बुनियादी ढाँचे में दृश्यमान सुधार दिखता है। नई सड़कों के निर्माण से लेकर हवाई अड्डों तक और बिजली की बेहतर आपूर्ति से लेकर सुपर-फास्ट ट्रेनों तक, सबके लिए बेहतर बुनियादी ढाँचे की दिशा का रास्ता दिख रहा है। वर्ष 2014 से पहले, हमने अपने दैनिक जीवन के एक हिस्से के रूप में “लोड शेडिंग” को शामिल कर लिया था। जो अब बंद हो गया है। मतदाता का मानना है कि अभी और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है और श्री मोदी ने जो शुरू किया उसे पूरा करने के लिए वे उन्हें समय देने को तैयार हैं। 
  1. आतंक पर सख्त: चुनाव आयोग ने अनुमान लगाया है कि 80 मिलियन से अधिक नए मतदाता हैं जो वर्ष 2019 में पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। उनका अयोध्या या राम मंदिर से कोई सीधा संबंध नहीं है, लेकिन इन मिलियनों को श्री मोदी में एक ऐसा नेता दिखाई देता है, जिसमें साहस है, जो तेजी पलटवार और कठोर वार करता है। वे उनकी जीवनशैली में समग्र सुधार देखते हैं, और वे भारत के प्रति वैश्विक दृष्टिकोण में परिवर्तन भी देख पा रहे हैं। यही वह है जो उन्हें चुनाव के दिन “कमल” के प्रति प्रेरित करेगा। 
  1. पुलवामा और बालाकोट: हालाँकि किसी को भी राष्ट्रीय सुरक्षा और सशस्त्र बलों का उपयोग राजनीतिक हितों के लिए नहीं करना चाहिए, पर पुलवामा हमले और बालाकोट हवाई हमले की वास्तविकता सभी को दिख रही है। अगर विपक्ष ने श्री मोदी के 56 इंच के सीने की बात करते हुए पुलवामा हमले के बाद अपनी नाक नहीं घुसाई होती तो उन्हें हवाई हमले के बाद अपनी नाक नहीं कटवानी पड़ती। यह स्पष्ट रूप से मतदान के दिन मतदाता के दिमाग में होगा। 
  1. ग्रामीण अर्थव्यवस्था: हालाँकि विपक्षी दल चाहेंगे कि हम कुछ और विश्वास करें अन्यथा, तेजी से आगे बढ़ने वाली उपभोक्ता वस्तुओं की कंपनियों और ऑटोमोबाइल कंपनियों के आँकड़े ग्रामीण भारत में अपनी बिक्री में उल्लेखनीय सुधार दिखाते हैं। तीव्र तनाव होने पर यह संभव नहीं हो सकता था। यदि कुछ है तो वह यह कि श्री मोदी ने गरीबों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। हाँ, ग्रामीण भारत में और काम किए जाने की जरूरत है।

पिछले कुछ महीनों में एक नई हवा आई है जो भारतीय जनता पार्टी में बड़ी उम्मीदें भर रही है और यह पार्टी नए सिरे से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है। सहयोगी दल वापस आ रहे हैं और विपक्षी दलों के नेता भाजपा में शामिल हो रहे हैं।

यहाँ तक कि सबसे कड़े विपक्षी समर्थकों को पता है कि कई विपक्षी दलों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे विकल्प के बारे में न के बराबर कुछ कहना तक भयावह है। वे हर महीने, जैसे ही संगीत बंद हो जाए,नए संगीत के साथ प्रधानमंत्री की स्थिति के लिए संगीत कुर्सी के खेल की कल्पना नहीं कर सकते!

मतदाता, जो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का बटन दबाने के साथ अंतिम निर्णय लेंगे, वे जानते हैं कि वे मोदी को चुनाव हारने नहीं दे सकते।

अभी तो इससे भी अच्छा होना बाकी है।

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लेखक कार्यकारी कोच और एंजेल निवेशक हैं। राजनीतिक समीक्षक और टीकाकार के साथ वे गार्डियन फार्मेसीज के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। वे 6 बेस्ट सेलर पुस्तकों – द ब्रांड कॉल्ड यू- The Brand Called You रीबूट- Reboot. रीइंवेन्ट Reinvent. रीवाईर Rewire: 21वीं सदी में सेवानिवृत्ति का प्रबंधन, Managing Retirement in the 21st Century; द कॉर्नर ऑफ़िस, The Corner Office; एन आई फ़ार एन आई An Eye for an Eye; द बक स्टॉप्स हीयर- The Buck Stops Here – लर्निंग ऑफ़ अ # स्टार्टअप आंतरप्रेनर और Learnings of a #Startup Entrepreneur and द बक स्टॉप्स हीयर- माय जर्नी फ़्राम अ मैनेजर टू ऐन आंतरप्रेनर, The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. के लेखक हैं। 

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12 Reasons why Mr Modi will be PM again in 2019

190314 Elections 2019

The elections are around the corner and much has been written already on all the achievements of the Modi government. A lot has also been written about all that Mr Modi has not been able to complete in his first five-year term.

The average Indian voter is primarily interested in getting:

  1. A clean administration since we have been angered and frustrated with the incredible amount of corruption that has been seen over the last 70 years in various non-BJP governments.
  1. Strong economic growth of the country which will lead to wealth creation and job creation.
  1. A secure environment without constantly having to look for potential threats that could physically harm us and our families. We do not want to keep looking over our shoulders. Now do we want to keep looking under tables and chairs for unidentified bags.
  1. A clean environment with all the necessities of life so that we can live normal lives with our families.

Let us explore and examine the reasons why I believe not only why Mr Modi should be voted back to power but why I believe he will be voted back to power.

  1. Positive Report card: During the last elections in 2014 Mr Modi had promised that he would come back to the electorate in 2019 with his report card. A lot has been written about the significant achievements in the first five-year term. In overall terms, the electorate is satisfied with Mr Modi’s governance and the direction he has set for India. No one, barring some of the opposition leaders, expected miracles within one term.
  1. Economy: India is now the sixth largest economy in the world and the second largest in terms of purchasing power parity. The more important fact is that Mr Modi has put India on the track for quick growth in the next decade. Here is a leader who has not hesitated to take the strongest possible decisions whether they relate to the economy or to make fundamental course corrections such as the bankruptcy code.
  1. Clean Government: Mr Modi has clearly established even in the minds of his deterrents that he is squeaky clean. He has made every possible effort to make sure that there is no corruption in his government. There has been no major or minor scam in the past five years. Most of us have been used to paying for what is normally our right. These are simple necessities like getting our driving licence or getting a new passport where we used to look for touts. This has stopped completely.
  1. Indian Passport: The Indian passport is clearly far more respected today than it was 30 years ago. I say this with considerable personal experience having travelled around the World over the last four decades. Never before, has the Indian passport been received so willingly and without so many questions by immigration officials around the world.
  1. Foreign policy: India now stands tall in the comity of nations. India has managed to develop extremely good relationships with all neighbouring states barring Pakistan. At the same time India has managed to keep strong independent relationships with USA and Russia, Iran and Israel as well as a grudging economic relationship with China. While putting an embargo on Iran, the United States agreed to let India continue buying oil from them. Air India can now fly over Saudi Arabia to Israel and when Mr Modi flew from Jordan to Palestine, Israeli aircraft provided him security.
  1. Mahagathbandhan: The mahagathbandhan clearly is not working. Certainly not in the manner that Rahul Gandhi had envisaged with him being crowned as the leader by one and all. None of the constituents of this motley group of regional leaders have any common minimum programme nor do they represent a similar set of values that they can present to the electorate. The warring mahagathbandhan leaders are showing their true colours as they keep talking with forked tongues. Criticising and praising their alliance partners in the same breath. All that they have is a single point agenda of removing Mr Modi. Opposition leaders openly state that an alliance maybe possible for the Lok Sabha elections but not for the State elections. The Indian electorate is much smarter than what these political parties would like to believe.  Do they really think that we voters are so stupid?
  1. Rahul Gandhi: Mr Gandhi has not been able to deliver anything of consequence and though he would like to believe that his victory in the states of Rajasthan Madhya Pradesh and Chhattisgarh was only on account of him, if one looks at the electoral votes cast the numbers tell a different story. Mr Gandhi has not announced any clear vision or path for India. He has nothing positive to say except harp on the achievements of his predecessors. He simply raves and rants on the Rafale deal hoping that some corruption charges will stick to Mr Modi. No one believes him. He is becoming a laughing stock for not only the electorate but most of his party members as well.
  1. Hindi Heartland: The Hindi heartland clearly still has its heart with Mr Modi. Yes, they voted the BJP out in three states but when it comes to national elections, they will go out and vote in very large numbers for Mr Modi who is clearly the tallest leader in the country today. The Ram Mandir is a big issue in the minds of a significant number of voters which is why Mr Gandhi’s loyal spokespersons have started to chant the slogan that only the Congress can build the temple. When it comes to the temple, everyone knows that only the BJP can see this through to its logical conclusion.
  1. Infrastructure: There is visible improvement in India’s infrastructure. From building new roads to airports and from significantly improved power supply to super-fast trains, the path towards improved infrastructure is there for everyone to see. Prior to 2014, we had taken “load shedding” as a part of our daily lives. This has now stopped. The voter believes that much more needs to be done and is willing to give time to Mr Modi to complete what he started.
  1. Tough on Terror: The Election Commission has estimated that there are over 80 million new voters who will exercise their franchise for the first time in 2019. They have no links to Ayodhya or the Ram Temple but in Mr Modi, these millennials see a leader who has the courage to hit back fast and hit back hard. They see an overall improvement in their lifestyle, and they can see the visible change in global attitude towards India. This is what will guide them to the “lotus” on election day.
  1. Pulwama and Balakote: While no one should use National Security and the Armed Forces for meeting political ends, the reality of the Pulwama attack and the Balakote air strike are there for everyone to see. If the opposition had not put their foot in their mouth talking of Mr Modi’s 56 inch chest after the Pulwama attack, they would not have had to grind their nose in the dust after the air strikes. This will clearly be in the minds of the voter on polling day.
  1. Rural Economy: Though the opposition parties would like us to believe otherwise, the figures of the fast-moving consumer goods companies and the automobile companies show a significant improvement in their sales in Rural India. This could not have been possible if there was acute stress. If anything, Mr Modi has focussed his attention on the poor. Yes, more needs to be done for Rural India and it is being done.

Over the past few months there is a new wind that is filling the big sails of the Bhartiya Janata Party and it is forging ahead with renewed confidence. Allies are coming back to the party and leaders from opposition parties are joining the BJP.

Even the most hardened opposition supporters know that the alternatives being presented by the multiple opposition parties are frightening to say the least. They cannot visualize a musical chairs like situation for the position of the Prime Minister with a new incumbent every few months when the music stops!

The voters, who will take the final decision when they press the button of the Electronic Voting Machine know that they cannot let Mr Modi lose the election.

The best is yet to come.

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The author is an Executive Coach and an Angel Investor. A keen political observer and commentator, he is also the founder Chairman of Guardian Pharmacies. He is the author of 6 best-selling books, The Brand Called You; Reboot. Reinvent. Rewire: Managing Retirement in the 21st Century; The Corner Office; An Eye for an Eye; The Buck Stops Here – Learnings of a #Startup Entrepreneur and The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur.

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पाकिस्तान – अब आगे क्या

 

190303 Pakistan terrorism map

 विंग कमांडर अभिनंदन वापस आ गए हैं। पाकिस्तानी एफ़ 16 गिरा दिया गया और एक पायलट की मौत हो गई। पुलवामा का बदला जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) के आतंकवादी शिविरों का विनाश कर ले लिया गया है। और अब हमारे देश के वे लोग जो क्षमा की प्रार्थना करते रहते हैं वे फिर से तत्काल शांति वार्ता शुरू करने की उत्कंठा लिए बैठ गए हैं।

पाकिस्तान कहाँ है – भारत के संबंध प्रगाड़ हो रहे हैं और ऐसे में पाकिस्तान के लिए आगे क्या बदा है?

पुलवामा हमलों के बाद पूरा देश निराशा और गर्त में डूब गया था और सभी के मन में बदला लेने का भाव था। कुछ ही दिन बीते थे कि विपक्षी नेताओं ने व्यंग्यात्मक टिप्पणियाँ करनी शुरू कर दी थीं। बारह दिनों बाद भारतीय वायु सेना ने कड़ी टक्कर दी और पाकिस्तान में घुसकर उसके जैश-ए-मोहम्मद के तीन प्रशिक्षण शिविरों को नष्ट कर दिया और जिन 300 से 400 आतंकवादियों को वहाँ प्रशिक्षित किया जा रहा था, उन्हें तक मार गिराया। मारे गए आतंकवादियों में संगठन के 25 नेता भी शामिल थे। इस ओर ध्यान देना दिलचस्प होगा कि वे मुख्य रूप से अजहर मसूद के “पारिवारिक” सदस्य थे जो नेतृत्व के पदों पर थे (यहाँ इसका दूसरा और कोई अर्थ नहीं है)!

इस हमले की पूरे देश में सराहना हुई। यह भी आश्चर्यजनक था कि हर विपक्षी नेता भारतीय वायु सेना को बधाई दे रहा था, जो वास्तव में उसकी हक़दार भी थी, लेकिन इनमें से किसी भी राजनेता ने प्रधानमंत्री द्वारा लिए गए मजबूत निर्णय को स्वीकार नहीं किया। तिस पर विडंबना यह है कि हमलों के बारे में इतना शोर करने के बाद, ये राजनीतिक दल अब भारतीय वायुसेना की कार्रवाई का राजनीतिकरण करने के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

उसके अगले दिन पाकिस्तानी एफ़ 16 लड़ाकू जेट विमानों ने भारतीय आकाशी क्षेत्र (इंडियन एयर स्पेस) में प्रवेश करने की कोशिश की और जिन्हें हमारे जाँबाजों ने आगे बढ़ने से रोक दिया। इनमें से एक आधुनिक जेट को विंग कमांडर अभिनंदन ने ध्वस्त कर दिया, जिसे उन्होंने बंदी बना लिया। जिनेवा सम्मेलन में तय मसौदों के तहत और बहुत सारे कूटनीतिक और राजनीतिक पैंतरे अपनाए जाने के बाद उन्हें युद्ध नायक के रूप में छोड़ दिया गया।

तो अचानक ऐसा क्या हुआ कि प्रेस के कुछ लोग दूसरी बाजू हो गए?

इमरान खान कैसे राजनयिक कूटनीतिज्ञ बन गए और क्या हुआ कि हमारे कई पत्रकार और विपक्षी राजनेता पाकिस्तान को इतना श्रेय देने लगे।

  1. यह मुझे हैरत में डाल देता है कि प्रेस के कुछ वर्गों ने यह टिप्पणी करना शुरू कर दी है कि युद्ध क्यों कभी कोई जवाब नहीं होता है। विपत्तियों के अमानवीय पुलिंदे से कोई कैसे इनकार कर सकता है। और तब जब आप देखते हैं कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा कितने ही वर्षों से हमारे देश को कितनी चोट पहुँचाई गई है, तो क्या ये पत्रकार हमें पीछे खींचने और यथास्थिति में वापस जाने की बात कर सकते हैं?
  1. कुछ पत्रकार सवाल कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री अपने सामान्य कार्य दिवसों में कैसे लौट गए। पर उन्हें क्यों नहीं लौटना चाहिए? मुझे यकीन है कि वे हर स्थिति का बारीकी से जायजा ले रहे हैं और उनके पास उत्कृष्ट नेताओं की टीम है जो इस मामले को अधिक मुस्तैदी से सीधे तौर पर संभाल रही है। यदि प्रधानमंत्री इसी मामले पर सारा समय लगा देते तो यहीं पत्रकार उनसे ऐसा पूछते हुए देखे जा सकते थे कि वे वैसा क्यों कर रहे हैं!
  1. कुछ पत्रकार पूछ रहे हैं कि क्या भारत के पास कोई रक्षा मंत्री है? मैं इस टिप्पणी को नहीं समझ पा रहा था। रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के अलावा, तीनों सेनाओं के प्रमुखों से मिलकर बना दल है और यह वही कोर टीम है जिसे प्रधान मंत्री की प्रत्यक्ष देखरेख में हर मुद्दे को विस्तार से संभालना होता है।
  1. कुछ राजनेता हड़कंप मचा रहे हैं कि प्रधान मंत्री द्वारा सभी राजनीतिक गतिविधियों को रोका जाना चाहिए। क्या उन लोगों ने अपनी तरफ से सारी राजनीतिक गतिविधियों को रोक दिया है? इसका उत्तर स्पष्टत: ‘ना’ है।
  1. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने उनकी पार्टी राज्य में कितनी सीटें जीतेगी, इसकी घोषणा कर दी है। मुझे लगता है कि यह बहुत ही असंवेदनशील टिप्पणी है और इसकी हर हाल में निंदा की जानी चाहिए।
  1. इसके अलावा एक बड़े राज्य के मुख्यमंत्री भी हैं जो बेलगाम बोले जा रहे हैं कि कैसे पुलवामा का पूरा घटनाक्रम सत्तारूढ़ दल द्वारा खेला गया नाटक था। ऐसी सोच की हर संभव तरीके से कड़ी आलोचना, निंदा होनी चाहिए। यह केवल उस मुख्यमंत्री की सोच को दर्शाता है।

मैं दृढ़ता से आग्रह करूँगा कि हमें अपनी चुनी हुई सरकार को उसका काम करने देना चाहिए।

दूसरी ओर, पाकिस्तान गंभीर संकट में है।

  1. उनकी अर्थव्यवस्था दिवालिया हो चुकी है, और हालाँकि उन्हें संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और चीन से कुछ पैसे मिल जाते थे, लेकिन अब यह सारा पैसा अटक गया है। अब उनके लिए मुफ़्त की दावत नहीं है और वे आज जो दरियादिली दिखा रहे हैं उसे किसी दिन उनसे निचोड़कर ले लिया जाएगा।
  1. प्रधान मंत्री इमरान खान वहाँ की शक्तिशाली सेना की कठपुतली मात्र है जिसका एकल बिंदु एजेंडा केवल भारत के खिलाफ युद्ध जारी रखना है। उनके पास उनके बने होने का और कोई कारण भी नहीं है।
  1. पाकिस्तान ने अपनी तमाम सीमाओं ईरान, अफगानिस्तान और भारत की ओर से खुद परेशानी मोल ले ली है। उसका मौसमी मित्र चीन केवल ‘चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी)’ के कारण उससे स्वार्थी वित्तीय साझेदारी को निभा रहा है।
  1. कोई भी निवेशक पाकिस्तान में आने और निवेश करने के लिए तैयार नहीं है।
  1. ढेर सारे वादे करने के बावजूद, पाकिस्तान की ओर से उसकी सेना द्वारा समर्थित आतंकवादी शिविरों के खिलाफ कोई विश्वसनीय कार्रवाई किए जाने की उम्मीद नहीं है।
  1. अंतत: सेना को हर बार इस देश पर शिकंजा कसते रहना पड़ेगा और जब भी कोई राजनेता उनका सिर ऊँचा उठाने की कोशिश करेगा, ये लोग उसे गिरा देंगे या नियंत्रित कर डालेंगे।

इस विषय पर अंतिम शब्द नहीं लिखे गए हैं। अंतिम गोली अभी नहीं चली है और हमने अंतिम जान नहीं खोई है। यह एक लंबी लड़ाई है जिसने कई लोगों को लहूलूहान कर दिया है और आगे भी कई लोगों की जानें जाती रहेंगी।

पाकिस्तान को कुछ गंभीर विश्वास निर्माण उपाय करने की आवश्यकता है जिनमें शामिल हैं:

  1. चीन को अजहर मसूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने और उसे ट्रायल के लिए सौंपने की अनुमति प्रदान करने देना।
  1. हाफिज सैय्यद को 26/11 हमले के मुकदमे के लिए भारत को सौंपना।
  1. मुंबई हमलों के सूत्रधार दाऊद इब्राहिम को सौंपना।

इन तीनों आतंकवादियों को सौंपने को प्रारंभक के तौर पर देखना होगा, लेकिन पाकिस्तान के बारे में जो लोकप्रिय राय है, उसे देते हुए इसकी संभावना बहुत कम है कि पाकिस्तान सेना कभी भी अपनी प्रमुख आतंकवादी भुजाओं को सौंपने के लिए सहमत होगी!

इस कार्रवाई के बाद ही उन्हें कश्मीर पर बातचीत करने के लिए कहा जाना चाहिए।

हमारे लिए पुलवामा को जल्द भूला पाना और सभी को माफ कर हमसे आगे बढ़ने की उम्मीद करना अवास्तविक है।

जैसा कि कहा जाता रहा है, मैं कहना चाहूँगा कि हमें उन्हें माफ कर देना चाहिए अगर वे आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं लेकिन हमें उन नुकसानों को कभी नहीं भूलना चाहिए जो उनकी वजह से हमें हुए हैं।

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लेखक कार्यकारी कोच और एंजेल निवेशक हैं। राजनीतिक समीक्षक और टीकाकार के साथ वे गार्डियन फार्मेसीज के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। वे 6 बेस्ट सेलर पुस्तकों – द ब्रांड कॉल्ड यू- The Brand Called You रीबूट- Reboot. रीइंवेन्ट Reinvent. रीवाईर Rewire: 21वीं सदी में सेवानिवृत्ति का प्रबंधन, Managing Retirement in the 21st Century; द कॉर्नर ऑफ़िस, The Corner Office; एन आई फ़ार एन आई An Eye for an Eye; द बक स्टॉप्स हीयर- The Buck Stops Here – लर्निंग ऑफ़ अ # स्टार्टअप आंतरप्रेनर और Learnings of a #Startup Entrepreneur and द बक स्टॉप्स हीयर- माय जर्नी फ़्राम अ मैनेजर टू ऐन आंतरप्रेनर, The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. के लेखक हैं।                                                       

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अनुवादक- स्वरांगी साने – अनुवादक होने के साथ कवि, पत्रकार, कथक नृत्यांगना, साहित्य-संस्कृति-कला समीक्षक, भारतीय भाषाओं के काव्य के ऑनलाइन विश्वकोष-कविता कोश में रचनाएँ शामिल। दो काव्य संग्रह- काव्य संग्रह “शहर की छोटी-सी छत पर” मध्य प्रदेश साहित्य परिषद, भोपाल द्वारा स्वीकृत अनुदान से प्रकाशित और काव्य संग्रह “वह हँसती बहुत है” महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई द्वारा द्वारा स्वीकृत अनुदान से प्रकाशित।

Pakistan – what next?

190303 Pakistan terrorism map

Wing Commander Abhinandan is back. One Pakistani F16 has been shot down and a pilot killed. Pulwama has been avenged with the destruction of the JeM terror camps. And our apologists are back to hankering for immediate commencement of peace talks.

Where is the Pakistan – India relationship heading and what happens next for Pakistan?

After the Pulwama attacks there was a complete sense of gloom and doom in the country and everyone wanted revenge. Within a few days sarcastic comments were being made by leaders of the opposition. Twelve days later, the Indian Air Force hit back hard and destroyed three Jaish-e-Mohammad training camps in Pakistan and killed between 300 – 400 terrorists who were being trained. Also killed were 25 leaders of the terrorist organisation. It is interesting to note that it is primarily “family” members of Azhar Masood who were in leadership positions (no other meanings intended here)!

These strikes were applauded all over the country. It was surprising that while every opposition leader congratulated the Indian Air Force which was their due, not one of these politicians acknowledged the strong decision making by the Prime Minister. Ironically, after making so much noise about the attacks, these political parties are now blaming the BJP for politicising the IAF action.

The following day, Pakistani F16 fighter jets tried to enter Indian Air space and were rebuffed. One of these modern jets was shot down by Wing Commander Abhinandan who has been taken into custody. Under the Geneva Convention and after a lot of behind the scenes diplomacy and political manoeuvre, he has been released and back as a war hero.

So why are some sections of the press suddenly swinging to the other side?

Why has Imran Khan become a diplomat par excellence and what makes so many of our journalists and opposition politicians give so much credit to Pakistan.

  1. It surprises me that some sections of the press have started to comment on why war is never an answer. Quite an inane set of platitudes because no one can deny this. But when you see how much hurt has been caused to our nation over the years by Pakistan supported terrorists, are these journalists talking about pulling back and going back to status quo ante?
  1. Some journalists are questioning why the Prime Minister is going about his normal work day. Why shouldn’t he? I am sure he is monitoring the situation closely and has a team of excellent leaders who are more directly handling the matter. The same journalists would take the counter view if the Prime Minister was seen to be spending all this time on this matter!
  1. Some journalists have asked whether India has a Defence Minister? I was not able to understand this comment. In addition to the Defence Minister and the National Security Advisor, there are three Chiefs of Staff and it is this core team that must be handling every detailed issue under the direct supervision of the Prime Minister.
  1. Some politicians are screaming that all political activity must be stopped by the PM. Have they stopped all political activity from their side? The answer is a clear No.
  1. One senior BJP leader has announced how many seats his party will win in a state. I think this is a very insensitive comment and must be condemned at all costs.
  1. Then there is the Chief Minister of a major state who can’t stop talking about how this entire Pulwama episode has been stage managed by the ruling party. This thinking needs to be condemned in the strongest possible terms. It only shows the thinking of this Chief Minister.

I would strongly urge that we should let our elected Government do its work.

On the other hand, Pakistan is in serious trouble.

  1. Their economy is bankrupt, and though they are receiving some money from United Arab Emirates, Saudi Arabia and China, all this money is coming with strings attached. There is no free lunch and some day payment will be extracted from Pakistan for today’s largesse.
  1. Prime Minister Imran Khan is a puppet of the powerful Army whose single point agenda is to keep war mongering against India. They have no other reason to exist.
  1. Pakistan has created trouble on all its borders with Iran, Afghanistan and India. Its all-weather friend China only looks at a selfish financial partnership on account of the China Pakistan Economic Corridor (CPEC).
  1. No investors are willing to come and invest in Pakistan.
  1. Despite so many promises, no credible action is expected to be taken by Pakistan against the terrorist camps being supported by their Army.
  1. Finally, the Army will continue to have a stranglehold on the country and every time a politician attempts to raise his head, they will either cut it or control it.

The last word has not been written on this subject. The last bullet has not been fired and the last life has not been lost. This is a long battle which has scarred many and will continue to scar many more.

Pakistan needs to take some serious confidence building measures which would include:

  1. Allowing China to declare Azhar Masood as an international terrorist and hand him over for trial.
  1. Hand over Hafeez Sayyed to India to stand trial for the 26/11 attacks.
  1. Hand over Dawood Ibrahim, the architect of the Bombay attacks.

Handing over these three terrorists would be a starter but given popular opinion, it is highly unlikely that the Pakistan Army will ever agree to handing over their prime terror arm!

It is only after this action has been taken should they ask for a dialogue on Kashmir.

It is too early for us to forget Pulwama and it is unrealistic to expect everyone to forgive and move on.

As the old saying goes me must forgive if they take action against the terrorists but we must never forget the harm they have caused us.

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The author is an Executive Coach and an Angel Investor. A keen political observer and commentator, he is also the founder Chairman of Guardian Pharmacies. He is the author of 6 best-selling books, The Brand Called You; Reboot. Reinvent. Rewire: Managing Retirement in the 21st Century; The Corner Office; An Eye for an Eye; The Buck Stops Here – Learnings of a #Startup Entrepreneur and The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. 

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पुलवामा, पाकिस्तान और जैश-ए-मोहम्मद

190220 Pulwama

वेलेंटाइन डे अपने साथ जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमलावर द्वारा किए गए नृशंस हमले की भयावह खबर लेकर आया। हमलावर ने वीडियो भी रिकॉर्ड किया, जिसमें उसने बड़े गर्व से घोषणा की कि दुनिया जब तक उसका वीडियो देख नहीं लेती, तब तक वह उसके वादा किए हुए प्रतिश्रुत देश में होगा!

पुलवामा हमले की धृष्टता और उसके परिमाण पकड़ आने में मुझे कई दिन लग गए और मैं इस हमले की कड़ी निंदा करता हूँ। सैनिकों की शहादत को कभी भूलाया नहीं जा सकता, उनके अनाथ परिवारों की हर संभव मदद की जानी चाहिए। ज़ाहिरन हर भारतीय की भावनाएँ चरम पर हैं। हमारी सेना पर कोई हमला करें इसे कोई भी नहीं देखना चाहता और इस तरह के कायरतापूर्ण आत्मघाती हमले की सभी ओर से निंदा होना भी उचित है।

पाकिस्तान को इसके निहितार्थ दूरगामी झेलने होंगे और दोनों राष्ट्रों को यथास्थिति में वापस लौटने में बहुत लंबा समय लगेगा, जिनमें वैसे भी अत्यधिक तनावपूर्ण संबंध थे।

इस समय राष्ट्र रक्त की उचित पुकार कर रहा है और प्रधान मंत्री ने आश्वस्त किया है कि पाकिस्तान को इस बला की बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। अजहर मसूद की धमकियों के साये में होने के बावजूद जिस तरह से इमरान ख़ान ने “उचित प्रतिक्रिया” दी है, उसे समझा जा सकता है, पर ऐसा करते हुए वे पिछले सभी युद्धों में पाकिस्तान की दुर्गति को शायद भूल गए हैं।

ओसामा बिन लादेन से लेकर दाऊद इब्राहिम तक और अजहर मसूद से लेकर हाफिज सईद तक, हर ज्ञात आतंकवादी को पाकिस्तान में संरक्षण प्राप्त है। क्या यह संरक्षण पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के अनुमोदन पर हो रहा है, यह घिनौनी बहस का विषय हो सकता है लेकिन तथ्य तो यह है कि ये लोग उस देश में हैं।

आइए हम कुछ दिलचस्प बिंदुओं को देखते हैं:

  1. 13 फरवरी 2019 को आत्मघाती हमलावर द्वारा 27 ईरानी क्रांतिकारी रक्षक मारे गए थे। ईरानी सरकार ने पाकिस्तान को उनके कुलीन रक्षकों की हत्या पर कड़ी प्रतिक्रिया के साथ धमकी दी। क्या पाकिस्तान ने यह हमला सऊदी राजकुमार को अपने पक्ष में करने के लिए किया था?
  1. अफगानिस्तान लगातार उन हमलों का सामना कर रहा है जो पाकिस्तानी धरती पर पलते हैं और अफगानिस्तान और अशरफ गनी पर किए जाते हैं, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति पाकिस्तान को आतंकवादी राज्य कहने में कभी हिचकिचाते नहीं है।
  1. बलूचिस्तान पाकिस्तान के लिए बड़ा काँटा है। स्थानीय लोगों द्वारा किए जा रहे तमाम प्रतिरोधों को नष्ट करने और मजबूत अलगाववादी आंदोलन पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए पाकिस्तान के पास अत्यधिक बल प्रयोग करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है। पश्चिम पाकिस्तान से अत्यधिक मतभेदों के चलते बांग्लादेश बना था। तब क्या बलूचिस्तान दुनिया का अगला स्वतंत्र देश होगा?
  1. बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका ने न डगमगाते हुए भारत में हुए हमले की निंदा की है और पाकिस्तान को इस क्षेत्र से कोई सहानुभूति नहीं मिल रही है। पाकिस्तान ने अपने कर्मों से सार्क की प्रभावशीलता को बेअसर कर दिया है।
  1. चीन को छोड़ दें तो दुनिया के हर देश ने आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा की है और पाकिस्तान जल्दबाज़ी में कोई दोस्त नहीं बना पा रहा है।
  1. चीन को अपने चीनी-पाकिस्तानी आर्थिक गलियारे के लिए वर्तमान में पाकिस्तान की आवश्यकता है। चीन के लिए सभी रिश्ते अंततः पैसों पर आकर थमते हैं। वह दिन दूर नहीं जब चीन भी समझ जाएगा कि किसी साँप को अपनी आस्तीन के अंदर पालतू बनाकर रखने और उम्मीद करने से कि वह कभी काटेगा नहीं, तो वैसा संभव नहीं हो सकता।
  1. राष्ट्रपति ट्रम्प ने बिना किसी संदेह या शर्तों के भारत के साथ एकजुटता व्यक्त की है और पाकिस्तान से कहा है कि वह अपनी धरती पर आतंकवादियों को शरण देना बंद करें।

पाकिस्तान वैश्विक परित्यक्त बन गया है और हर पाकिस्तानी नागरिक अपने राजनीतिक, धार्मिक और सेना के नेताओं के कुकृत्यों के प्रभाव को महसूस कर रहा होगा। पाकिस्तानी नागरिक अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए अपनी सरकार पर दबाव क्यों नहीं डालते? वे धार्मिक और राजनीतिक बयानबाजी क्यों बह जाते हैं?

पाकिस्तान दुष्ट राष्ट्र बन चुका है और विश्व यह बात स्वीकार रहा है। अगर पाकिस्तान अपनी थोड़ी भी साख बनाए रखना चाहता है तो उसे ठोस कदम उठाने की जरूरत है। वह अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता की तलवार को खड़खड़ा सकता है, जैसा कि वह चाहता है लेकिन वह यह भी जानता है कि उसकी इस धमकाने वाली तलवार का कोई उपयोग नहीं होने वाला।

दशकों तक इस तरह के समर्थन की पेशकश का प्रभाव आम पाकिस्तानी नागरिक द्वारा महसूस किया जाता रहा है। सेना द्वारा देश का धन बहुतायत में हथियार खरीदने में खर्च होता है, संभवतः काफी बड़ी मात्रा में धन का दूसरा हिस्सा जनरलों और राजनेताओं की जेबें भरने में खर्च हो जाता है। औसत पाकिस्तानी को पूरी दुनिया में बिना उसकी किसी गलती के अवमानना झेलनी पड़ती है।

पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था दिवालिया होने की कगार पर है। बेलआउट पैकेज के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास जाना कोई विकल्प नहीं है क्योंकि आईएमएफ पाकिस्तान को अपनी अर्थव्यवस्था में मौलिक सुधार करने के लिए कहेगा। इसलिए उनके नेता कटोरा लेकर देश-देश घूम रहे हैं कि कहीं से जम़ानती रिहाई के लिए कुछ राशि मिल जाएँ। चीन, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब ने थोड़ा ऋण दिया है लेकिन बड़ी साफ़ कठोर शर्तों के साथ कि ऋण तो चुकाना ही होगा। पाकिस्तान अब केवल इतना करने की स्थिति में है कि किसी तरह से अपरिहार्य घटने को कुछ महीनों के लिए रोक दें।

सर्वाधिक इष्ट राष्ट्र- मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएमएन-MFN) का दर्जा वापस लेने से पाकिस्तानी निर्यातकों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। अपने उत्पादों के लिए तैयार बाज़ार खोजना आसान नहीं होगा, यह तब और अधिक कठिन होगा जब अंतर्राष्ट्रीय भावना उनके देश के खिलाफ है। उनके सामने अधिक आर्थिक चुनौतियाँ आने की आशंका जताई जा रही है।

इमरान खान ने जो वादा किया था वह “नया” पाकिस्तान कहाँ है? जिस तरह के काम इमरान खान की सरकार कर रही है उसे देखकर तो यही लगता है कि यह सरकार नई बोतल में पुरानी शराब की तरह है और वह भी ऐसी शराब जो समय के साथ बासी होती जा रही है!

भारत सरकार पर बढ़ते दबाव को देखकर लगता है कि क्या भारत ईरान के साथ अपने उत्कृष्ट संबंधों का उपयोग करेगा और संयुक्त रूप से दोनों देश मिलकर पाकिस्तान द्वारा लगातार हो रहे “योजनाबद्ध” हमलों का बदला लेंगे? क्या भारत सरकार इज़राइल से उनकी सटीक मिसाइल की सहायता देने की माँग करेगी?

प्रधान मंत्री मोदी पुलवामा का बदला बहुत मजबूत जवाब देकर लेंगे। प्रतिक्रिया किस तरह से दी जाएँ इसके चयन के लिए वे समय ले रहे हैं, न कि वे निर्देशित या सार्वजनिक भावना में घी डालकर कोई काम करना चाहते हैं।

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लेखक कार्यकारी कोच और एंजेल निवेशक हैं। राजनीतिक समीक्षक और टीकाकार के साथ वे गार्डियन फार्मेसीज के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। वे 6 बेस्ट सेलर पुस्तकों – द ब्रांड कॉल्ड यू- The Brand Called You रीबूट- Reboot. रीइंवेन्ट Reinvent. रीवाईर Rewire: 21वीं सदी में सेवानिवृत्ति का प्रबंधन, Managing Retirement in the 21st Century; द कॉर्नर ऑफ़िस, The Corner Office; एन आई फ़ार एन आई An Eye for an Eye; द बक स्टॉप्स हीयर- The Buck Stops Here – लर्निंग ऑफ़ अ # स्टार्टअप आंतरप्रेनर और Learnings of a #Startup Entrepreneur and द बक स्टॉप्स हीयर- माय जर्नी फ़्राम अ मैनेजर टू ऐन आंतरप्रेनर, The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. के लेखक हैं।                                                       

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अनुवादक- स्वरांगी साने – अनुवादक होने के साथ कवि, पत्रकार, कथक नृत्यांगना, साहित्य-संस्कृति-कला समीक्षक, भारतीय भाषाओं के काव्य के ऑनलाइन विश्वकोष-कविता कोश में रचनाएँ शामिल। दो काव्य संग्रह- काव्य संग्रह “शहर की छोटी-सी छत पर” मध्य प्रदेश साहित्य परिषद, भोपाल द्वारा स्वीकृत अनुदान से प्रकाशित और काव्य संग्रह “वह हँसती बहुत है” महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई द्वारा द्वारा स्वीकृत अनुदान से प्रकाशित।

Pulwama, Pakistan and Jaish-E-Mohammad

190220 Pulwama

Valentine’s Day brought the horrific news of the dastardly attack by a Jaish-E-Mohammad suicide bomber who, in his recorded video, proudly announced that by the time the World saw his video, he would be in the promised land!

It has taken me several days to come to grips with the audacity and magnitude of the Pulwama attack and I strongly condemn the attack. The martyrdom of the soldiers should never be forgotten, and everything needs to be done for the orphaned families. Understandably, the emotions of every Indian are highly charged. No one likes to see an attack on our forces and such a cowardly suicide attack is rightly condemned by everyone.

The implications this will have on Pakistan will be far reaching and will take a very long time to for the two nations come back to status quo ante, which in any case was a highly strained relationship.

The nation is rightly screaming for blood and the Prime Minister has assured everyone that Pakistan will pay a major price for their misadventure. Understandably, Imran Khan, despite being covered by the menacing shadow of Azhar Mahmood, has made the expected noise about a “fitting response”, forgetting Pakistan’s misadventure in all the previous wars.

From Osama bin Laden to Dawood Ibrahim and from Azhar Mamood to Hafiz Sayed, every known terrorist finds protection in Pakistan. Whether this is done with the express approval of the Pakistani Army and its ISI can be debated ad nauseum but the fact remains that these individuals are in the country.

Let us look at a few interesting points:

  1. 27 Iranian Revolutionary Guards were killed by a suicide bomber on 13th February 2019. The Iranian Government has threatened Pakistan with a strong response for the killing of their elite guards. Did Pakistan carry out this attack to curry favour with the visiting Saudi Prince?
  1. Afghanistan is continuously faced with the attacks that are planned on Pakistani soil and executed in Afghanistan and Ashraf Ghani, the Afghan President has never hesitated in calling Pakistan a terrorist state.
  1. Baluchistan is a major thorn in the side of Pakistan. Short of destroying all resistance of locals, Pakistan has no other option to retain its control over the strong separatist movement but to use extreme force. Bangladesh was created because of the extreme differences with West Pakistan. Will Baluchistan be the next independent country of the World?
  1. Bangladesh, Nepal, Bhutan and Sri Lanka have condemned the attack in India in no uncertain terms and Pakistan is not getting any sympathy in the region. Pakistan, through its actions has neutralised the effectiveness of SAARC.
  1. Every country in the World, has strongly condemned the terrorist attacks and Pakistan is not making any friends in a hurry.
  1. China currently needs Pakistan for its China Pakistan Economic Corridor. For China, all relationships ultimately boil down to money. It is only a matter of time before China too will realise that you cannot keep a pet snake inside your shirt and hope that it will not bite.
  1. President Trump has, in no uncertain terms, expressed solidarity with India and asked Pakistan to stop harbouring terrorists on its soil.

Pakistan has become a global pariah and every Pakistani citizen must be feeling the impact of the misadventures of their political, religious and Army leaders. Why does the Pakistani citizen not put pressure on their Government to improve their lives? Why do they get carried away with religious and political rhetoric?

Pakistan has become a rogue nation and the World has acknowledged this. Pakistan needs to take substantial steps if it wants to gain some semblance of credibility. It can sabre rattle its nuclear power capability all it wants but they know they cannot use this deterrent.

The impact of decades of offering such support is felt by the common Pakistani citizen. The Army spends most of the country’s money on buying arms, a large amount of which probably lines the pockets of the Generals and politicians. The average Pakistani is treated with contempt all over the World for no fault of theirs.

The Pakistani economy is on the verge of bankruptcy. Going to the International Monetary Fund for a bailout package is not an option since IMF will ask Pakistan to make fundamental corrections to their economy. Their leaders are therefore, running from country to country with the proverbial begging bowl, asking for some bail out money. China, UAE and Saudi Arabia have given some loans, but these loans will have some stringent conditions and by its very definition, a loan must be repaid. All that Pakistan has managed to do is to delay the inevitable for a few more months.

Withdrawal of the Most Favoured Nation (MFN) status will hurt Pakistani exporters significantly. Finding ready markets for their products will not be easy, more so when International sentiment is against the country. More economic challenges can be expected.

Where is the “Naya” Pakistan that Imran Khan had promised? All that this action seems to show is the Government of Imran Khan is simply old wine in a new bottle and that too has become rancid with the passage of time!

With increasing pressure on the Government of India, will India use its excellent relations with Iran and jointly take revenge for the attacks “engineered” by Pakistan in the two countries on consecutive days? Will the Government of India seek assistance from Israel to get their accurate missiles?

Prime Minister Modi will choose a very strong response to avenge Pulwama. He will do this at a time of his choosing rather than be guided or pushed by public sentiment.

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The author is an Executive Coach and an Angel Investor. A keen political observer and commentator, he is also the founder Chairman of Guardian Pharmacies. He is the author of 6 best-selling books, The Brand Called You; Reboot. Reinvent. Rewire: Managing Retirement in the 21st Century; The Corner Office; An Eye for an Eye; The Buck Stops Here – Learnings of a #Startup Entrepreneur and The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur.

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राहुल गाँधी – झूठे या केवल भ्रम?

190202 Rahul Gandhi

काँग्रेस पार्टी के अध्यक्ष नामित होने के बाद लगता है कि राहुल गाँधी को अचानक अपनी आवाज़ मिल गई है, जो तब से खो गई थी, जब उनकी सरकार सत्ता में थी और संसद के अपने पहले 10 वर्षों में वे लगभग चुप या अनुपस्थित थे।

यह एक ऐसा व्यक्ति है, जिसे वास्तव में ऐसा लगता है कि राष्ट्र उसके पूर्वजों की वजह से उसके प्रति निष्ठा रखता है और वह हर चीज का हकदार है।

अपने परिवार के नाम के चलते वे पार्टी में शीर्ष स्थान के हक़दार हो गए। अपने पूर्वजों द्वारा किए गए त्याग और बलिदानों के कारण वे सत्ता के माया जाल और उससे जुड़ी अतिरिक्त सुविधाओं से घिरने के हक़दार बन गए। इसी वजह से वे कुछ भी कहने के हक़दार हो गए क्योंकि वे जानते हैं कि वरिष्ठ नेताओं की बड़ी टुकड़ी उनके बचाव में कूद जाएगी। इतना ही नहीं, बिना किसी जवाबदेही के देश का नेतृत्व करने की महत्त्वाकांक्षा रखने के भी हक़दार बन बैठे।

श्री गाँधी का विश्वास निश्चित रूप से इस दर्शन पर हैं कि वे यदि कोई आरोप लगाकर लंबे समय तक रोना-गाना करते हैं, कीचड़ उछालते हैं तो थोड़ा-बहुत कीचड़ तो ज़रूर चिपकेगा। उनका मानना है कि उनके अपने परिवार और पार्टी की ख़राब आर्थिक ख़्याति के चलते जहाँ उनका हर कदम कीचड़ में धँसा है, प्रधानमंत्री मोदी भी ऐसे बेतुके आरोपों से कलंकित हो सकते हैं। वे पहचानते हैं कि उनके और उनके परिवार को मुक्ति केवल तभी मिल सकती है, जब वे किसी भी तरह मतदाताओं को यह मनवा देते हैं कि मोदी और सत्तारूढ़ दल भी “भ्रष्ट” है!

अपने मन के गहरे भीतर वे भी जानते हैं कि ऐसा कुछ नहीं होगा, क्योंकि इस सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई दाग नहीं है।

अत: उन्होंने झूठ की पूरी गठरी तैयार करने का फैसला किया है। यदि बार-बार और दृढ़तापूर्वक कहा जाए, तो झूठ और असत्य निश्चित ही श्रोताओं के मन में सीमित अवधि के लिए संदेह के बीज बो सकते हैं।

आइए हम उनके कुछ और हालिया झूठों और उसके बाद उनके अपने ही झूठ से पलट जाने की जाँच करें।

  1. राफेल: राफेल विमान खरीद पर राहुल गाँधी के तर्क उदात्त से हास्यास्पद की ओर बढ़ रहे हैं। उन्हें अगस्ता वेस्टलैंड एक्सपोज़र पर किसी पलटवार की आवश्यकता है जो कि जल्द ही सामने आ सकता है और बोफोर्स मामला भी अब तक मतदाताओं के दिमाग में गहरे पैठा है। नकी उकताहट भरी टिप्पणियों को शेष वरिष्ठ काँग्रेस नेता पूरी वफ़ादारी से तोता पढंत की तरह दुहरा रहे हैं, क्योंकि एक बार उनके “राजकुमार” ने बात कह दी, तो उनके पास उसके अनुपालन और बचाव के अलावा अन्य कोई विकल्प बचता नहीं है। उनके पास अपने आरोपों को स्थापित करने के लिए कुछ भी ठोस नहीं है।
  1. घोर पूंजीवाद (क्रोनी कैपिटलिज्म): श्री गाँधी और उनका परिवार वर्षों से कई कॉरपोरेट घरानों का लाभार्थी रहा है। अपने स्वयं के मुद्दों को छिपाने के लिए, उन्होंने प्रधान मंत्री पर घोर पूंजीवाद का इलज़ाम लगाने का मार्ग चुना है। जबकि श्री अनिल अंबानी की कंपनी की हाल ही में दिवालिएपन के लिए दायरा वाली जानकारी को श्री गाँधी ने अपनी सुविधा से नजरअंदाज कर दिया है, क्योंकि यह उनके कथन उनके खिलाफ़ है।
  1. श्री पर्रिकर: वे खुद गोवा के मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य की जानकारी लेने व्यक्तिगत दौरे पर गए थे और फिर बाद में एक चुनावी रैली में श्री पर्रिकर को गलत ठहरा दिया। जब श्री पर्रिकर ने उनके झूठ पर सवाल किया, तो उन्होंने बिना किसी मलाल के श्री मोदी पर दोष मढ़ देने की कोशिश की।
  1. ईवीएम: जब उनकी पार्टी चुनाव हार जाती है, तब राहुल गाँधी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को दोष देते हैं और जब उनकी पार्टी चुनाव जीतती है तो वे चुप रहने का मार्ग अपनाते हैं। उनके लिए, ईवीएम और चुनाव आयोग केवल सुविधा की बात है – जिसे अपनी सुविधा से, जब उनके और उनकी पार्टी के खिलाफ़ काम हो तो गाली दे देना और तब नज़रअंदाज़ कर देना जब उनके पक्ष में काम हो रहा हो!
  1. ऋण माफी: राहुल गाँधी ने राजस्थान और मध्य प्रदेश में चुनाव अभियानों में ऋण माफी की घोषणा की। नई सरकारों को श्रेय मिल सकें इसलिए तुरंत ऋण माफ भी कर दिए गए थे। हालाँकि, वादे का मज़ाक उड़ाते हुए गरीब किसानों के आम तौर पर 1,000 रुपए से कम के ऋण माफ किए गए थे। जो वादे किए गएँ उन पर फिर से विचार करने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। ये चुनाव खत्म बीत गए और 5 साल बाद नए वादे करने होंगे।
  1. नॉनपरफॉर्मिंग एसेट्स: राहुल गाँधी गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) के लिए प्रधानमंत्री को दोषी ठहराते रहे हैं, बिना यह समझे कि वे बकाया होने पर ऋण ही गैर-निष्पादित हो जाते हैं। ऋण आम तौर पर 5 साल के लिए दिए जाते हैं और उसके बाद चुकौती होती है। एक बार जब ऋण देय होता है और यदि पुनर्भुगतान शुरू नहीं होता है, तो ऋण को गैर-निष्पादित श्रेणी में वर्गीकृत कर दिया जाता है। इस तरह वे अनर्जक परिसंपत्ति (एनपीए) जो एनडीए के कार्यकाल के दौरान दिख रही हैं वे यूपीए के कार्यकाल के दौरान दिए गए ऋण थे।
  1. रोजगार निर्माण: उनका कोरा दावा है कि उन्होंने अगले 5 वर्षों में 70 मिलियन नौकरियों के निर्माण की योजना विकसित की है। लेकिन इसे कैसे हासिल किया जाएगा और इन नौकरियों का निर्माण किस क्षेत्र में होगा, इस बारे में कोई योजना नहीं बताई है। हालांकि, वे जो भी कहते हैं, उस पर उनसे किसी जवाबदेही की माँग नहीं की जाती है। यह तथ्य भी देखा जाना चाहिए कि यूपीए के 10 साल के कार्यकाल में 17 मिलियन से भी कम नौकरियाँ ईज़ाद हुई थीं।
  1. शारदा घोटाला: राहुल गाँधी को गंभीरता से चिंतन कर इस मामले में अपना और अपनी पार्टी का पक्ष रखने की ज़रूरत है। वर्ष 2014 के नुकसान के बारे में बात करने से लेकर घोटाले पर कार्रवाई न करने के लिए ममता बनर्जी को फटकारने से लेकर अब पूरा समर्थन देने तक वास्तव में कोई नहीं जानता कि उनका पक्ष क्या होगा और उनका अगला यू-टर्न क्या होगा। ज़ाहिर है, उनकी स्थिति इस बात पर निर्धारित होती है कि उनका क्या मानना उन्हें कहाँ और कब कुछ सुर्खियाँ दिला सकता है। अतीत की गाथा उनके कृपापात्रों द्वारा गाई जाती रहेगी और उन्हें हर हाल में संरक्षित किया जाएगा।
  1. अन्य विपक्षी दलों से संबंध: यह देखना दिलचस्प है कि राहुल गाँधी कितनी आसानी से अपनी भूमिका बदल लेते हैं। किसी अन्य विपक्षी पार्टी के नेता को कोसने और गाली देने से लेकर निर्विवाद रूप से समर्थन देने तक उनकी भूमिका बिना किसी स्पष्टीकरण के निर्बाध होती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोई ऐसा नेता है, जिसके साथ उन्होंने दुर्व्यवहार नहीं किया है और बाद में उसी के साथ साझेदारी करने की माँग न की हो। क्या किसी भी विपक्षी दल का कोई भी नेता वे जो कुछ भी कहते हैं उस पर विश्वास करता है, या यह चुनाव खत्म होने तक चुप रहने की सुविधा और समझदारी की बात है?

बचाव का सबसे अच्छा तरीका अपराध है।

जब कुछ और काम नहीं करता है और झूठ भी कारगर नहीं होता दिखता है, तो राहुल गाँधी बहुत आसानी से इसका-उसका नाम लेने लगते हैं। पिछले सालभर में उन्होंने  कई बार श्री मोदी को एकतरफा बहस की धमकी दी लेकिन लोकसभा में वे आश्चर्यजनक रूप से चुप रहते दिखे। उन्होंने अपनी पुस्तक में श्री मोदी के लिए जर्मन शब्द फ्यूहरर जिसका अर्थ है “लीडर” या “गाइड” से लेकर चोर से लेकर असुरक्षित तानाशाह तक हर संभव नकारात्मक विशेषण का इस्तेमाल किया है। दुर्भाग्यवश कोई भी उनकी कथा नहीं खरीद रहा और यह उन्हें और भी निराश कर रहा है।

तो क्या माननीय काँग्रेस अध्यक्ष पैदाइशी झूठे हैं जैसा कि स्मृति ईरानी कहती हैं या वे केवल भ्रम हैं?

शब्द “भ्रमजनक- डिल्यूजनल” लैटिन शब्द से बना है जिसका अर्थ है “धोखा देना।” इसलिए भ्रमपूर्ण सोच मतलब अपमानजनक बातों पर विश्वास करके खुद को धोखा देने जैसा है। भ्रम गलत विचार है। यह ऐसा विश्वास है जिसका कोई प्रमाण नहीं है। भ्रमित व्यक्ति विश्वास करता है और चाहता है कि कुछ ऐसा हो जाए, जो वास्तव में सत्य नहीं है। यह और अधिक मजबूत आशा में बदलता है कि कुछ ऐसा चमत्कारी घटित होगा जो उसकी मान्यताओं को सच कर देगा।

इस लेख के विषय के संदर्भ में यह विशेष रूप से परिचित लगता है?

जाहिर है, राहुल गांधी का एकमात्र उद्देश्य हर मुद्दे का राजनीतिकरण करना है, बजाय इसके तार्किक निष्कर्ष पर कोई मुद्दा देखना। उनसे अक्सर उन विभिन्न आरोपों के सबूत दिखाने के लिए कहा जाता है जो वे लगाते रहते हैं और राफेल पर उनकी अपनी स्वीकारोक्ति थी लेकिन वे अभी तक सबूत नहीं दिखा पाए हैं। उनका स्वयं का भ्रम उन्हें ऐसा दिखाता है कि यह साबित करने के लिए कि वे सही थे, प्रमाण स्वयं प्रकट होंगे। तब तक, वह अपनी “दागो और भागो” राजनीति अनायास ही जारी रखेंगे।

उन्हें यह विश्वास नहीं है कि वे आगामी चुनावों में शानदार जीत हासिल कर पाएँगे। मतदाताओं ने भी उन पर विश्वास करना बंद कर दिया है। यह कुछ ही समय की बात है और फिर यह भी होगा कि जब उनकी पार्टी के कार्यकर्ता भी उन पर विश्वास करना बंद कर देंगे। वह दिन दूर नहीं जब भीड़ में से कोई यह कहता दिखेगा कि “राजकुमार के पास कपड़े नहीं है!

श्री गाँधी कब तक “भेड़िया आया-भेड़िया आया” चिल्लाते रहेंगे?

जैसा कि राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने प्रसिद्ध रूप से कहा था, “आप सभी लोगों को कुछ समय तक और कुछ लोगों को हर समय मूर्ख बना सकते हैं, लेकिन आप सभी लोगों को हर समय मूर्ख नहीं बना सकते हैं।”

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लेखक कार्यकारी कोच और एंजेल निवेशक हैं। राजनीतिक समीक्षक और टीकाकार के साथ वे गार्डियन फार्मेसीज के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। वे 6 बेस्ट सेलर पुस्तकों – द ब्रांड कॉल्ड यू- The Brand Called You रीबूट- Reboot. रीइंवेन्ट Reinvent. रीवाईर Rewire: 21वीं सदी में सेवानिवृत्ति का प्रबंधन, Managing Retirement in the 21st Century; द कॉर्नर ऑफ़िस, The Corner Office; एन आई फ़ार एन आई An Eye for an Eye; द बक स्टॉप्स हीयर- The Buck Stops Here – लर्निंग ऑफ़ अ # स्टार्टअप आंतरप्रेनर और Learnings of a #Startup Entrepreneur and द बक स्टॉप्स हीयर- माय जर्नी फ़्राम अ मैनेजर टू ऐन आंतरप्रेनर, The Buck Stops Here – My Journey from a Manager to an Entrepreneur. के लेखक हैं।                                               

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